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बुद्धत्व की तलाश में जाएंगे काशी से काशगर तक

 Anurag Tiwari |  2016-10-27 04:06:50.0

[caption id="attachment_128102" align="aligncenter" width="1062"]Varanasi, Kashi, Kashgar, India, China, Archeological Survey of India, ASI, Buddhism, Sarnat चीन के काशगर श्ह्स्र का पुराना हिस्सा[/caption]

तहलका न्यूज ब्यूरो

वाराणसी. एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) के अधिकारी बौद्ध धर्म के इतिहास की तालाश में काशी टू काशगर की जर्नी करेंगे. काशगर पश्चिमी चीन का एक शहर है.  बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार की तलाश काशी से शुरू होगी और कई शहर होते हुए चीन के काशगर में खत्म होगी.

एएसआई ने बौद्ध धर्म के प्रचार और प्रसार के इतिहास को खंगालने की योजना बनाई है. सन 629-645 ईसवी के बीच चीनी यात्री ह्वेनसांग द्वारा लिखे गए यात्रा संस्मरण के आधार पर चीन के शहरों में फैली भारतीय संस्कृति की भी स्टडी की जाएगी. इस महत्वपूर्ण यात्रा को केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने भी हरी झंडी दे दी है. इन्तजार है तो बस विदेश मंत्रालय से मंजूरी मिलने का. एएसआई की जर्नी पर कुल पांच करोड़ रुपये का खर्च आएगा.


इस योजना को बनाने वाले एएसआई के डायरेक्टर जनरल डॉ. राकेश तिवारी हैं और यह यात्रा उन्हीं के द्वारा गठित टीम पूरी करेगी. एएसआई के एक अधिकारी के मुताबिक सभी को पता है कि बौद्ध धर्म का जन्म वाराणसी के सारनाथ में हुआ था और यहीं से यह पूरे विश्व फैला. चीनी यात्री ह्वेनसांग ने अपनी किताब में बौद्ध धर्म के विस्तार के बारे में कई स्थानों का वर्णन भी किया है.

चीनी यात्री ह्वेनसांग सम्राट हर्षवर्धन के शासनकाल में 17 साल वाराणसी में रहे और उन्होंने यहीं बौद्ध धर्म की दीक्षा ली थी. अधिकारी के मुताबिक़ इससे भारत और चीन के बीच परस्पर सांस्कृतिक संबंध और भी मजबूत होंगे. डायरेक्टर जनरल द्वारा तैयार तीन पेज की रिपोर्ट के मुताबिक महात्मा बुद्ध के ज्ञान प्राप्त करने से लेकर बौद्ध धर्म के विस्तार में कई अहम् मोड़ आए थे.

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