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जानिए क्या कहते हैं सीएम अखिलेश के सितारे, आगे होगा क्या?

 Anurag Tiwari |  2016-09-16 14:41:27.0

Chief Minister, Uttar Pradesh, Akhilesh Yadav, Horoscope, Forecast

Pitra Paksh, Shraddh, Procedure, Dr JN Tripathi
डॉ जेएन त्रिपाठी


समाजवादी पार्टी में चल रही सियासी उठापटक पर सभी की नजर है. सभी इसका आंकलन अपने हिसाब से कर रहे हैं. ऐसे में ज्योतिषीय क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ भी ग्रह-नक्षत्रों की गणना कर रहे हैं. ज्योतिषाचार्य डॉ जेएन त्रिपाठी ने भी उत्तर प्रदेश के सीएम की कुंडली का अध्ययन कर अपना आकलन दिया.

डॉ त्रिपाठी के अनुसार उन्होंने शुक्रवार को सीएम अखिलेश यादव की कुंडली का अवलोकन किया और उसमें छिपी बारीकियों को देखने का प्रयास किया. उन्होंने बताया कि विभिन्न श्रोतों से प्राप्त डिटेल्स के आधार पर उनका जन्म 24 अक्टूबर को प्रातः 5:53 बजे इटावा जिले के सैफई गांव में हुआ था. इस तिथि अनुसार इनकी कुंडली तुला लग्न की बनती है.  इनकी कुंडली को केंद्र बनाकर अध्ययन करतें है तो विश्लेषणात्मक अध्ययन में यह सामने आता है कि


  1. लग्न का स्वामी शुक्र है जो सूर्य के घर में है और लग्न में 11वें का स्वामी सूर्य नीच का होकर बैठा है. राहु और गुरु से दृष्ट है, राहु तीसरे भाव में स्वग्रही गुरु के साथ है, गोचर में गुरु 13 अगस्त 2016 तक ग्यारहवें घर में था, तब तक तो उसने संबंधों को संभल कर रखा परंतु 13 अगस्त के बाद कन्या अर्थात 12वें घर में चला गया, इसके चलते संबंधों की दरार पर जो पर्दा था वह फट गया क्योकि बारहवां भाव दूरी का है. चाचा से संबंधों के लिए सूर्य को एवं करक मंगल को भी देखना चाहिए, मंगल 12वें भाव में दूर चला गया है। चौथा स्वामी  शनि है जो कि लोकतंत्र का कारक है , वह अष्टम में है. इस तरह लग्नेश, तीसरे, चौथे व 11वें भाव तथा करक मंगल सभी पीड़ित है. नवमांश में भी लग्न तुला ही है। इसमें  तीसरे भाव में राहु, शुक्र, सूर्य, चंद्र हैं जिस पर केतु और बुध की नज़र है, तीसरे का स्वामी  गुरु, नीच मंगल के साथ दशम भाव में  बैठा है, यहाँ भी 11वें भाव का स्वामी  सूर्य ,राहु से ग्रसित है। कारक मंगल नीच का होकर चौथे घर में है.

  2. अब आते है दशमांश कुंडली पर यह भी तुला लग्न है ,शुक्र अष्टम में ,तीसरे का स्वामी गुरु छठे घर में केतु के साथ, जो की राहु और शनि से दृष्ट है, दसवें  का स्वामी  शनि बारहवें घर में राहु के साथ और छठे के स्वामी  गुरु से दृष्ट है. गोचर के अनुसार  तुला लग्न लेतें हैं तो शुक्र बारहवें भाव में नीच का, गुरु के साथ  जो तीसरे और छठे का स्वामी  है और  बारहवें भाव में है, चौथे घर का स्वामी शनि मंगल के साथ दूसरे घर में है. ग्यारहवें का स्वामी  सूर्य, राहु और बुध के साथ अपने ही भाव में है और पांचवें में बैठे चंद्र को भी राहु देख रहा है.

  3. इस प्रकार हम देख रहे है कि कुटुंब की समस्याओं का उदय होगा ही और अनेक संबंधों में बिखराव आने के पूरी सम्भावना है , क्योंकि लग्न के दोनों ओर ग्रह (द्वितीय, तृतीय, ग्यारहवें और बारहवें भाव में हैं) अपनी नकारात्मक अवस्था में हैं। उनका असर आना स्वाभाविक है.




गणना के अनुसार यह लगता है कि यह बिखराव अभी बढ़ेगा और इसका प्रभाव 2017 में आने वाले चुनावों में जरूर दिखेगा और सत्ता में बदले हुए चेहरे दिखाई देंगे.

(लेखक ज्योतिषाचार्य डॉ जेएन त्रिपाठी ज्योतिषीय विशेषज्ञ हैं, ऊपर लिखे विचार उनके अपने हैं)

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