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कई गंभीर आरोपों के घेरे में अवध विवि के कुलपति, कोर्ट सदस्यों ने माँगा जवाब

 Abhishek Tripathi |  2016-06-05 12:45:35.0

Avadh_university_faizabadतहलका न्यूज़ ब्यूरो


फैज़ाबाद. डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कुलपति पर आर्थिक भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं. कोर्ट सदस्यों ओम प्रकाश सिंह और सुधीर द्विवेदी ने कुलपति प्रो. जी.सी.आर. जायसवाल पर अवध विश्वविद्यालय की 800 करोड़ की पूंजी पर गिद्ध द्रष्टि रखने का इलज़ाम लगाया है. विश्वविद्यालय में 200 करोड़ की लागत से मेडिकल फैकल्टी वह पास करवा चुके हैं. अब उसके निर्माण के लिए ऐसे व्यक्ति की तलाश में जुटे हैं जो उन्हें 15 फीसदी कमीशन दे दे.


कोर्ट सदस्यों ने आज प्रेस कांफ्रेंस कर कुलपति से यह सवाल पूछा कि उन्होंने किस नियम के तहत सीपीएमटी परीक्षा के लिए एकल खाता खुलवाकर करोड़ों रुपये की हेराफेरी कर ली. कोर्ट सदस्यों ने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार करने की नीयत से ही महाविद्यालयों की एक-एक साल की विश्वविद्यालय से सम्बद्धता की जा रही है जबकि अदालत भी यह मानती है कि सम्बद्धता कम से कम तीन साल के लिए होनी चाहिए.


कोर्ट सदस्यों ने इलज़ाम लगाया कि कुलपति के कई करीबी शिक्षकों के अपने महाविद्यालय चल रहे हैं और ऐसे महाविद्यालयों को ही लाभ पहुँचाया जा रहा है. इन महाविद्यालयों में नक़ल विरोधी अभियान भी नहीं चलाया जाता. इसी तरह से कुलपति की काली कमाई के हिस्सेदार शिक्षकों के बच्चों को गोल्ड मेडल दिए गए. महाविद्यालय शिक्षक संघ के वर्तमान अध्यक्ष के बच्चे को भी गोल्ड मेडल मिला है. इसकी जांच होनी चाहिए.


कोर्ट सदस्यों ने कुलपति पर ट्रैक सूट खरीद में भी घोटाला किया. 400 रूपये के ट्रैक सूट का 1800 रूपये भुगतान लिया गया. यह मामला खुल गया तो कुलपति ने कोआर्डीनेटर को हटा दिया और कहा कि मामले की जांच होगी. बाद में उसी कोआर्डीनेटर को खेल-कूद प्रभारी बना दिया.


कोर्ट सदस्यों ने इलज़ाम लगाया कि कुलपति प्रो. जी.सी.आर. जायसवाल मनमाने तरीके से काम करते हैं और अपने मुंहलगे लोगों को फायदा पहुंचाते रहते हैं. इतिहास विभाग के एक शिक्षक को 6 साल का अनुभव दिखाकर उन्होंने प्रोन्नति दे दी जबकि इस शिक्षक की प्रोन्नति का वित्त अधिकारी ने विरोध किया था. मामले ने तूल पकड़ा तो शिक्षक ने अपनी फ़ाइल ही गायब करा दी.


कोर्ट सदस्यों ने कुलपति से पूछा है कि किन नियमों के तहत उन्होंने विश्वविद्यालय के अनुदानित शिक्षकों की सूची को ऑनलाइन नहीं किया. उन्होंने किस नियम के तहत पैसा दो केन्द्राध्यक्ष लो की नीति बनाई. किस नियम के तहत अमेठी के छीड़ा महाविद्यालय के पीजीडीसीए कोर्स को अनुमति दी. इस महाविद्यालय के शिक्षक डॉ. अनिल यादव को महाविद्यालय में रिवाल्वर लगाकर धमकी दी गई तो उन्होंने क्या कार्रवाई की.


कोर्ट सदस्यों ने कुलपति से कई गंभीर सवाल पूछे हैं. खेल-कूद प्रभारी विनोद श्रीवास्तव को क्यों हटाया गया? इतिहास विभाग के शिक्षक डॉ. एन.के.तिवारी को श्रीराम शोध पीठ से क्यों हटाया गया ? अपने प्रिय छात्र श्रीश अस्थाना को किस नियम के तहत आई.टी. का प्रशासनिक अधिकारी बनाया ? पीएचडी प्रवेश परीक्षा में बिना सूची के ही छात्रों का प्रवेश कैसे हो गया ? सम्बद्धता व प्रबंध समिति के अनुमोदन की फ़ाइलों को महीनों क्यों रोके रखा गया ? विश्विद्यालय के शिक्षकों और कर्मचारियों का किस नियम के तहत प्रमोशन नहीं किया जा रहा है? कोर्ट सदस्यों ने कुलपति पर और भी कई गंभीर आरोप लगाए हैं.

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