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बियर बार और वेश्यावृत्ति से लड़कियां मुक्त कराईं तो मैडम ने कर दिया ट्रांसफर

 Sabahat Vijeta |  2016-08-29 16:18:34.0

sharda-raut


राजीव सिंह

मुम्बई. पालघर जिले में अपराधों पर अंकुश लगाने में नाकाम रहीं एसपी शारदा राउत अब एक नए विवाद में फंस गयी हैं. शारदा राउत ने हाल ही में 5 ऐसे पुलिस अधिकारियों का तबादला कर दिया जिनकी पोस्टिंग अभी हाल में हुयी थी. इन पुलिस अधिकारियों बस इतनी सी गलती थी कि इन्होंने मैडम की मर्जी के बगैर बार में रेड डाली थी.




बताया जाता है कि महेश गोसावी नाम के पुलिस अधिकारी को एसपी शारदा राउत ने मानिकपुर में ज्वाइन करने के 2 महीने बाद जव्हार में ट्रांसफर कर दिया. गोसावी को वसई विरार का वसंत ढोबले कहा जाता है. वसई पश्चिम के समुद्री किनारे से लेकर स्टेशन तक एक तरफ जहां बियर बार के नाम पर पिकअप पॉइंट बना हुआ है वहीं होटल और लॉज के नाम पर जमकर वेश्या वृत्ति हो रही थी. हाल ही में नालासोपारा की 3 लड़कियों को मॉडल बनाने के नाम पर वसई के ही लॉज में ले जाकर बलात्कार किया गया और वीडियो बना लिये गए. इसके बाद उन्हें ब्लैकमेल किया जा रहा था. जब गोसावी ने कमान संभाली तो उन्होंने इलाके में एक में बाद एक कई ठिकानों पर रेड की. सैकड़ों लड़कियों को बियर बार और वेश्या व्यवसाय से मुक्त कराया गया.



लगातार उनके ऐसे कामो को देखते हुए आम जनता उन्हें वसई विरार का वसंत ढोबले कहने लगी. लॉज और होटल के साथ साथ जब महेश गोसावी ने बीयर बार के खिलाफ भी मुहिम शुरू की तो उनके अपने ही उनके दुश्मन बन बैठे. जिले के एसपी को माणिकपुर पुलिस थाने के इन्स्पेक्टर ने गोसावी के खिलाफ एक गलत रिपोर्ट बनाकर दे दी. इसी रिपोर्ट के आधार पर उनका ट्रांसफर कर दिया गया.


गोसावी के ट्रांस्फर के आदेश कोई वजह नहीं बतायी गयी. इस मसले पर गोसावी ने कहा कि दरअसल इलाके में चल रहे अवैध कारोबार से भ्रष्टाचार में लाखों की आमदनी उनकी कार्यवाही के बाद बंद हो गयी थी. इस वजह से वह अधिकारियों की आँखों में खटकने लगे थे और एक साजिश के तहत उनका ट्रांसफर महज 2 महीने में कर दिया गया. गोसावी ने इस आदेश के खिलाफ मैट में केस दाखिल कर दिया है. जल्द ही हाईकोर्ट में भी अपील करने वाले हैं.


गोसावी एसपी शारदा के सताये इकलौते पुलिस अधिकारी नहीं हैं. इन्स्पेक्टर रैंक के जिले के 4 थानों के इंचार्ज भी एसपी और महकमे के आदेश के खिलाफ मैट में गए हैं. जिसमें से नालासोपारा पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक रविंद्र बड गुजर को मैट ने दोबारा उसी पुलिस थाने का इंचार्ज बना कर भेजा है. जबकि सागरी सुरक्षा तुलींज पुलिस स्टेशन और पालघर कण्ट्रोल से जुड़े पुलिस अधिकारियों के मामले में भी आईपीएस अधिकारियों को फटकार मिली है. जल्द ही इनके तबादले का आदेश भी मैट से रद्द होने की सम्भावना जताई जा रही है.

जिले के एसपी की कार्य प्रणाली पर सवाल इसलिए उठे हैं क्योंकि ईमानदार और मेहनती अधिकारियों को काम नहीं करने दिया जा रहा है. जिन 4 इन्स्पेक्टर का तबादला किया गया था उनके आदेश में भी सूत्रों की माने तो कोई ठोस वजह नहीं बताई गयी थी.


एक युवक को नशे की हालत में पकड़कर पीटने के मामले में भी एसपी ने एक इन्स्पेक्टर और कांस्टेबल को इसलिए सस्पेंड कर दिया क्योंकि उनके मुताबिक स्थानीय मीडिया का बहुत प्रेशर था. उस मामले में पीड़ित परिवार को आप पार्टी से जुड़े लोगों ने स्पॉन्सर करके एडिशनल एसपी ऑफिस के बाहर धरने पर बैठा दिया था. ऐसे में शुरू में पुलिस की कार्यवाही की सही ठहराने वाली एसपी को महीने भर बाद गलत नजर आने लगा और उन्होंने उन अधिकारियों को सस्पेंड ही नहीं किया बल्कि अपने ही अधिकारियों पर पिटाई और किडनैपिंग का केस भी दर्ज कर दिया, क्योंकि एसपी को डर सता रहा था कि कुछ दिनों बाद ही विधान सभा सत्र शुरू होने वाला था ऐसे में उनके नाम पर कहीं विवाद न हो. जबकि जिस युवक की पिटाई का आरोप पुलिस पर था वह नशेड़ी था और कुछ महीने पहले ड्रग्स लेने की वजह से ही रिहैब सेंटर से बाहर आया था. आप आदमी पार्टी ने अपनी राजनीति चमकाने के लिए उसके सहारे पुलिस पर खूब दबाव बनाया और इसमें कामयाब भी रहे.


एस पी के इस आदेश से पुलिस का मनोबल गिरने की बात दबी जुबान में जिले में पुलिस अधिकारी ही कहने लगे क्योंकि किसी को हिरासत में लेने के बाद निश्चित समय सीमा में पुलिस थाने में लेकर जाना और उसकी आधिकारिक डायरी तक बनाने के बावजूद वह अपराध की श्रेणी में कैसे आ सकता है कि किसी अधिकारी पर किडनैपिंग का केस कैसे दर्ज कर दिया जाए.

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