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BJP चुनावी बेला में लगा रही है 'कमल मेला'

 Vikas Tiwari |  2016-11-23 04:11:17.0

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तहलका न्यूज़ ब्यूरो


लखनऊ. बीजेपी चुनावी बेला में जनता का रेला खुद से जोड़ने के लिए अब मेला लगा रही है. इसका आगाज बुंदेलखंड से हो चुका है. बांदा में पहला 'कमल मेला' लगाया गया. फीडबैक के आधार पर इस कवायद को आगे बढ़ाए जाने की तैयारी है. बीजेपी यात्रा, सम्मेलनों और अभियानों के जरिए यूपी में जनता को जोड़ने की कवायद में लगी है.


कमल मेला भी इसी का विस्तार है. 18 से 20 नवंबर तक बांदा के राजकीय इंटर कॉलेज के मैदान में इसे लगाया गया था. प्रदेश महामंत्री विजय बहादुर पाठक ने मेले का आगाज किया था. जिला संगठन को यह जिम्मेदारी पायलट प्रॉजेक्ट के तौर पर दी गई थी.


इस दौरान केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं को डिसप्ले किया गया था. वहीं, मेला पंडाल में मेहंदी, बोतल फोड़, भाग्य पहिया, रिंग टास, निशानेबाजी व कठपुतली जैसे खेलों के स्टॉल थे.


चाट, मूंगफली और मोदी की चाय के स्टाल भी लगे और चुनावी गीत भी बजे. सेल्फी विद मोदी जैसे आकर्षण भी मेले का हिस्सा थे.


नए वोटरों पर नजर


चुनाव के परंपरागत प्रचार के तरीके बहुत से लोगों को नहीं लुभाते हैं. वहीं, अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धता के चलते बहुत से वोटर दूसरे दलों के परंपरागत राजनीतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने में रुचि नहीं दिखाते.


ऐसे में यह नई कवायद उन वोटरों को अपने मंच पर ले आने की है. मेले और मनोरंजन के मंच पर बहुत बार बच्चों और परिवार का दबाव उससे जुड़ने का होता है.


बीजेपी के एक नेता का कहना है कि इस कवायद में हमारी कोशिश लोगों को अपने तक लाने की है. मेले के बहाने योजनाओं और नीतियों से लोग रूबरू होंगे. वहीं कार्यकर्ता व वॉलंटियर भी उनसे इस मुद्दे पर बात करेंगे.


अहम यह है कि महिलाएं भी इस राजनीतिक सहभागिता का हिस्सा हो सकेंगी जो परिवार में अनुकूल माहौल बनाने में प्रभावी हो सकती हैं.


नोटबंदी ने किया 'मायूस'


बांदा में तीन दिन तक चले मेले पर हालांकि नोटबंदी का ताजा असर भी काफी दिखा. इस समय जनता की पहली प्राथमिकता लाइन लगाकर नोट बदलने की है. दूसरे ओर जिनकी नोट बदल भी गई या जिनके पास वैलिड करेंसी है, उनका जोर इस समय अपनी अहम जरूरतों को पूरा करने पर है.


बुवाई का सीजन होने से किसान भी खेती-बाड़ी में जुटे हैं. इसलिए मेले का रेस्पॉन्स फीका रहा. हालांकि बांदा के जिलाध्यक्ष इंद्रपाल सिंह पटेल का कहना है कि तीन दिन में 25 हजार से अधिक लोगों ने मेले में हिस्सेदारी की लोगों की भागीदारी उत्साहजनक है.


इस कवायद को कुछ बदलावों के साथ आगे लागू किया जा सकता है. मसलन स्टॉल मैनेजमेंट व भीड़ प्रबंधन और प्रभावी किए जाने की जरूरत है.

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