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अपनी फिल्मों का भाग्य खुद लिखने वाली 'विद्या'

 Girish Tiwari |  2016-12-31 09:46:27.0

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तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो
मुंबई: बॉलिवुड में अपनी एक खास जगह बनाने वाली विद्या बालन इंडस्ट्री की उन कुछ अभिनेत्रियों में से हैं जो अपने दम पर फिल्में हिट कराने का दम रखती हैं। वह मानती की अगर काम का जुनून और कड़ी मेहनत करना आता हो तो, आप अपनी किस्मत खुद लिख सकते हैं। आपको बता दे कि 1 जनवरी को एक तमिल परिवार में जन्मीं विद्या बालन का कल जन्मदिन है .


विद्या बचपन से ही माधुरी दीक्षित और शबाना आजमी को देककर बड़ी हुई हैं और बचपन में उन्हें देखते हुए ही आगे चलकर सिनेमा जगत से जुड़ने का मन बना लिया। एकता कपूर के टेलीविजन शो ‘हम पांच’में 16 साल की उम्र में उन्होंने काम किया लेकिन वह फिल्मों में करियर बनाना चाहती थीं। उनके माता-पिता ने उनके इस फैसले का समर्थन किया, लेकिन साथ ही पढ़ाई पूरी करने की शर्त भी रखी।


विद्या ने सेंट जेवियर्स कॉलेज से समाजशास्त्र में स्नातक डिग्री और इसके बाद मुंबई विश्वविद्यालय से मास्टर की डिग्री हासिल की। विद्या मलयालम और तमिल फिल्म जगत में कई प्रयासों के बाद भी वह असफल रहीं। फिल्मों में करियर बनाने की राह आसान नहीं थी। विद्या को बांग्ला फिल्म 'भालो थेकोसे' पहचान मिली।


इस फिल्म में निभाए आनंदी के किरदार के लिए उन्होंने सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का आनंदलोक पुरस्कार भी जीता। बॉलिवुड में उन्होंने ‘परिणीता’ फिल्म से कदम रखा। इस फिल्म में अपने अभिनय के दम पर उन्होंने सर्वश्रेष्ठ नवोदित अभिनेत्री का पुरस्कार जीता।


इसके बाद उन्होंने ‘लगे रहो मुन्ना भाई’, ‘गुरु’ और ‘सलाम-ए-इश्क’ जैसी कई फिल्में की लेकिन लोगों ने उन्हें कुछ खास पसंद नहीं किया । साल 2007 में आई प्रियदर्शन की फिल्म ‘भूल-भुलैया’ उनके करियर के लिए नया मोड़ साबित हुई। इसमें निभाए गए 'अवनी' के किरदार की आलोचकों ने भी प्रशंसा की। इसके बाद 2009 में आई ‘पा’ और विशाल भारद्वाज की ‘इश्किया’ ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार दिलाया। यहां से विद्या के लिए सफलता के रास्ते खुल गए। इसके बाद उन्हें 2011 में आई फिल्म ‘द डर्टी पिक्चर’ के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार (सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री) मिला।

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