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ईंट भट्टों के ज़हरीले धुएं में सांस लेने को विवश यूपी का निर्मल गाँव

 Sabahat Vijeta |  2016-05-19 15:21:19.0

bhattaमीरजापुर . बजबजाती गलियों, कूड़े का अम्बार तथा गहरे पर्यावरण प्रदूषण के बीच रहने के लिए मजबूर हैं निर्मल गॉव के लोग विश्व स्तर पर गत वर्षो की भांति इस वर्ष भी पर्यावरण दिवस मनाया जायेगा.


पूरे देश में स्वच्छ भारत निर्मल भारत का नारा गूँज रहा है, जागरुगता कार्यक्रमों के आयोजन हो रहे हैं. आयोजनों पर बड़ी रकम खर्च हो रही है. स्वच्छता के पैमाने पर खरा बताकर एक एक करके अब तक दर्जनों गॉवो को राष्ट्रीय निर्मल गॉव पुरस्कार दिया जा चुका है. हाल में ही मीरजापुर जिले के पुरे सीखड़ विकास खण्ड को निर्मल घोषित किया गया, नरायनपुर विकास खण्ड का चयन हो रहा है. अब चर्चा है कि निर्मल जनपद घोषित करने की तैयारी है.


किन्तु पीछे मुड़कर देखें तो स्थिति निर्मलता के खिताब को मुंह चिढ़ा रही है. बजबजाती नालियां खड़जे के उपर फैला सीवर रास्ते के किनारे कूड़े अम्बार के बीच राष्ट्रीय निर्मल गॉव का खिताब हासिल करने के लगभग दस वर्ष के भीतर ही नरायनपुर विकास खण्ड के बरेवॉ निर्मलता की दम टूट गयी. गॉव के प्रतिनिधि व प्रशासनिक अधिकारियों की उपेक्षा के बीच ग्रामीण बजबजाती जानलेवा गलियों, कूड़े के अम्बार तथा गहरे प्रदूषण के बीच रहने के लिए मजबूर हैं. गॉव से लगे चारों ओर आधा दर्जन से अधिक ईंट भठ्ठों की चिमनियॉ जहरीला काला धुआ उगल रही हैं. ईट भठ्ठों के हजारों मजदूर खुले में शौच करते हैं. स्थिति इस कदर बदतर है कि यहॉ का पर्यावरण ग्रामीणों तथा अन्य जीव जन्तुओं के लिए अभिशाप बन चुका है.


बर्ष 2006 में राष्ट्रीय निर्मल गॉव के लिये चयन हुआ. तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के हाथों तत्कालीन प्रधान को राष्ट्रीय निर्मल गॉव पुरस्कार प्रदान किया गया किन्तु ग्रामीणों के जागरुकता के अभाव, जनप्रतिनिधि की शिथिलता तथा प्रशासनिक लापरवाही के चलते वर्तमान में यहॉ के ग्रामीण अपनी बदहाली पर आंसू बहाने के लिए मजबूर हैं. गॉव से लगे आधा दर्जन ईट भठ्ठों की चिमनियॉ जहरीला धुआ उगलकर पूरे वातावरण को प्रदूषित कर रही हैं. पूरा गॉव जहरीली गैस तथा मिट्टी, राबिस के धुन्ध की चादर से ढंका हुआ है. शुद्ध ताजगी देने वाली सुबह की हवा ग्रामीणो के लिये बीते जमाने की सिर्फ यादें बनकर रह गयी हैं. वहीं इन ईंट भठ्ठो पर अस्थायी आवास बनाकर काम करने वाले हजारों मजदूर चारों ओर खुले में शौच कर रहे हैं. गॉव के सेटेलाइट मैप पर यहॉ की हकीकत आसानी से समझा जा सकती है. नक़्शे पर गॉव से लगा उत्तर पूर्व तथा पश्चिम उत्तर तीन महत्वपूर्ण दिशाओं ईंट भठ्ठो के बड़े-बड़े गड्ढे, दर्जनो चिमनियॉ स्पष्ट देखी जा सकती हैं.


पर्यावरण कार्यकर्ता प्रदीप कुमार शुक्ल ने बताया कि ईट भठ्ठों के स्थापना के सम्बन्ध में उ.प्र. सरकार की दिशा निर्देश के अनुसार गॉव की आबादी से एक किलो मीटर के भीतर चिमनियों की स्थापना निषिद्धि है. वही एक चिमनी से दूसरे चिमनी के बीच की दूरी 800 मीटर निर्धारित है किन्तु यहॉ सभी नियम कायदे को ताख पर रखकर महज एक किलोमीटर की परिधि में दर्जन भर ईट भठ्ठे धॅधक रहे है, चिमनियॉ धुवॉ उगल रहीं हैं. श्रम विभाग की ओर से ईट भठ्ठा मजदूरों के लिए शौचालय की व्यवस्था करने का निर्देश है किन्तु इसकी व्यवस्था नहीं होने से मजदूर खुले में शौच करने के लिए विवश हैं. श्री शुक्ल ने बताया कि यहॉ के ग्रामीणों, पालतू पशुओं तथा जीव जन्तुओं के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है. यदि इसको तत्काल रोका नही गया तो आने वाले निकट भविष्य मे निर्मल गॉव का कागजी खिताब से पुरस्कृत इस गॉव के आस-पास की पूरी इकोलाजी तहस-नहस हो जायेगी.




  • किसी ईंट भठ्ठा के संचालन को स्वीकृति नही है.

  • आरटीआई से हुआ चौंकाने वाला खुलासा


आस पास स्थापित सभी ईंट भठ्ठे तथा चिमनियों का सारे नियम कायदे को ताख पर रखकर संचालन हो रहा है. इसका खुलासा आर.टी. आई के तहत जिम्मेदार विभागों के जबाब से हुआ है. जिले के पर्यावरण कार्यकर्ता प्रदीप कुमार शुक्ल ने जिलाधिकारी कार्यालय को आर.टी. आई. के तहत आवेदन प्रेषित कर ईट भठ्ठे के मिटृी खनन के लिए व्यवसायियों के आवेदन पत्र तथा उनको जारी अनुज्ञा पत्र की जानकारी मॉगी. इस पर खान अधिकारी का जो जबाब प्राप्त हुआ वह चौकाने वाला है. खान अधिकारी ने बताया है कि मिटृी खनन की स्वीकृति के लिए जिले से कोई आवेदन-पत्र नहीं प्राप्त हुआ है, न ही कोई अनुज्ञा पत्र ही जारी हुआ है. श्री शुक्ला के ही आर.टी. आई के तहत पूछे गए सवाल के जबाब में प्रदूषण नियन्त्रण बोर्ड ने बताया है कि वर्ष 2015-16 में जिले किसी ईट भठ्ठे को अनापत्ति प्रमाण पत्र नही जारी किया गया है.


बावजूद इसके पूरे जिले में कच्चे ईटो के अम्बार तथा चिमनियों से धुँआ निकलने लगा. ऐसे में सवाल यह उठता है कि निर्मल गॉव बरेवॉ ही नहीं पूरे जिले का कारोबार किस नियम तथा किसके आदेश पर चल रहा है.




  • सामाजिक कार्यकर्ता ने राष्ट्रपति सहित जिम्मेदार अधिकारियों को लिखा पत्र


पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप कुमार शुक्ल ने इंट मिटृी का अवैध खनन तथा अनियमित चिमनियों के संचालन का सच जानने तथा इसका खुलासा करने के बाद कार्यवाही की दिशा में आगे कठोर कदम उठाया है. श्री शुक्ल ने जिलाधिकारी सहित कार्य के लिए जिम्मेदार सभी अधिकारियों को पत्र लिखकर मामले की तत्काल जॉचकर कार्यवाही की मॉग की है.


डीएम को सम्बोधित पत्र में श्री शुक्ल ने खान अधिकारी और प्रदूषण अधिकारी से प्राप्त सूचना के आधार पर सवाल खड़ा किया कि आखिर इतना बड़ा कारोबार जो खुलेआम हो रहा है. जिम्मेदार अधिकारी पूरे कारोबार का सच जानकर भी चुप क्यों बैठे हैं. पर्यावरण के सभी कायदे कानून को ताख पर रखकर मिटृी का खनन होने से उपजाऊ भूमि की भौगौलिक संरचना बिगड़ रही है. इसका दूरगामी परिणाम भूजल को भी प्रभावित करेगा.


उप्र सरकार द्वारा चिमनियों की स्थापना व प्रचालन के लिए जारी दिशा निर्देश की अनदेखी कर धॅधक रही चिमनियों के जहरीले धॅुवे से जिले के कई गॉव बुरी तरह प्रभावित हो रहे है. आस-पास की फसलें, बाग-बगीचे बर्बादी की कगार पर खड़े हैं. इतना ही नहीं यह कारोबार नियमित न होने से सरकार को लाखों रुपये टैक्स और राजस्व की क्षति हो रही है.

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