Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

BSF ने पाक सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए लगाई लेजर दीवारें

 Tahlka News |  2016-04-28 04:42:21.0

india-pak-international-border_650x400_71443515327

तहलका न्यूज ब्यूरो
नई दिल्ली, 28 अप्रैल. पंजाब में भारत-पाकिस्तान के बीच की अंतरराष्ट्रीय सीमा (आईबी) के संवेदनशील क्षेत्रों में आतंकियों का घुसपैठ रोकने के लिए अब एक दर्जन 'लेजर दीवारें' बनाई गई है। झरझरा नदी और दूसरे दुर्गम स्थानों से घुसपैठ रोकने और निगरानी बढ़ाने के लिए बीएसएफ ने इन लेजर दीवारों का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। सुरक्षा प्रणाली को कड़ा करने के तहत यह कदम उठाया गया है।

सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक पंजाब में आईबी पर नदी पट्टी के संवेदनशील क्षेत्र में 8 इन्फ्रारेड और लेजर सिस्टम को लगा दिया गया है, जबकि चार अन्य जगह भी जल्द ही इसे शुरू कर दिया जाएगा। वहीं जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और गुजरात पर सीमा की सुरक्षा करने वाली बीएसएफ ही इस लेजर सिस्टम के जरिये निगरानी रखेगी।


उन्होंने बताया कि घुसपैठ का पता लगाने वाली इंफ्रा रेड लेजर बीम प्रणाली वाली आठ दीवारों को पंजाब के पास अंतराष्ट्रीय सीमा पर अतिसंवेदनशील जगहों पर लगाया गया है और बाकी की दीवारों को भी जल्द ही काम में लिया जाएगा।


अधिकारियों के मुताबिक जैसे ही इन दीवारों के आसपास किसी तरह की गतिविधि दिखेगी तो सिस्टम इसे पकड़ लेगा। अगर कोई इसे पार करने की कोशिश करेगा तो जोर से साइरन बजने लगेगा। सेंसर पर उपग्रह आधारित सिग्नल कमांड सिस्टम के जरिये निगरानी रखी जाएगी। इस सिस्टम की खासियत यह है कि रात के अंधेरे के अलावा कोहरे के दौरान भी यह निगरानी कर सकेगा।

इस संबंध में पीटीआई को प्राप्त योजना के ब्लूप्रिंट के मुताबिक, करीब दो साल पहले बीएसएफ ने पंजाब की नदी पट्टी वाले उस क्षेत्र में लेजर दीवारें लगाने का फैसला लिया था, जहां कंटीले तार लगाना संभव नहीं है। मगर ये क्षेत्र सुरक्षा की दृष्टि से काफी संवेदनशील हैं। पंजाब व जम्मू में आईबी पर करीब 45 जगहों पर इस तरह की लेजर दीवारें खड़ी की जाएंगी।


गृह मंत्रालय द्वारा स्वीकृत योजना के तहत इनके अलावा जम्मू व गुजरात में भी अतंरराष्ट्रीय सीमा के 30-40 किलोमीटर लंबे हिस्से में और पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश सीमा पर भी ऐसे चार अन्य पायलट प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे। वहीं बीएसएफ अधिकारी के मुताबिक आने वाले छह महीनों में इस योजना पर काम पूरा हो जाएगा।

  Similar Posts

Share it
Share it
Share it
Top