Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

BSP बन गई है रियल एस्टेट कंपनी, मालकिन हैं मायावती

 Girish Tiwari |  2016-06-30 08:53:23.0

download (1)

तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो
लखनऊ.
बसपा सुप्रीमो मायावती को गुरुवार को एक और तगड़ा झटका दिया गया। बसपा महासचिव आैर वरिष्ठ नेता आरके. चौधरी ने पार्टी से इस्‍तीफा दे दिया। चौधरी ने मायावती पर कई गंभीर आरोप भी लगाए हैं। फिलहाल, चौधरी ने अभी किसी भी राजनीतिक पार्टी में शामिल होने का ऐलान नहीं किया है। उन्होंने कहा कि 11 जुलाई को वे बैठक कर आगे की रणनीति के बारे में बताएंगे। हालांकि, अभी तक स्वामी  प्रसाद मौर्य से चौधरी की कोई बात नहीं हुई है।

आर के चौधरी मायावती पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मायावती को धन उगाही का शौक है। चौधरी ने कहा कि बसपा अब कोई राजनीतिक दल नहीं बल्कि एक रियल एस्टेट कंपनी बन चुकी है। जिसकी मालकिन मायावती हैं। अंबेडकर के मिशन को मायावती भूल गई हैं और पार्टी के कई नेता और कार्यकर्ता उनसे त्रस्त आ चुके हैं।


बता दें कि आरके चौधरी 2013 अप्रैल में 12 साल बाद बसपा में वापस आए थे। आरके चौधरी ने कहा कि बसपा की कमान जब तक कांशीराम के हाथों में थी तब तक सबकुछ ठीक चल रहा था, लेकिन मायावती के हाथ में कमान आते ही धन वाले लोगों का रसूख बढ़ता गया। पैसे लेकर चुनाव में टिकट बांटे और काटे जाने लगे। मायावती के कारण बसपा बाबा साहब और कांशीराम की नीतियों से अलग हो गई

सूत्रों की माने तो आर. के. चौधरी मोहनलालगंज से टिकट मांग रहे थे, लेकिन बसपा सुप्रीमो ने यहां से राजबहादुर को पार्टी प्रत्याशी घोषित कर दिया है। इससे नाराज चल रहे आर के चौधरी बसपा छोड़ दिया।

आरके चौधरी ने कहा कि पहले उनकी पार्टी का बसपा में विलय कराया गया और उन्हें तीन मंडलों की जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके बाद उसमें एक मंडल उनके पास से हटा लिया गया। उनसे कहा गया कि अब वह मिर्जापुर जाकर काम देखें। उन्हें लखनऊ आने की जरूरत नहीं है। उनके इस तरह के रवैये से पार्टी के लोगों में खासी नाराजगी है। वह कांशीराम जी के बताए रास्तों पर चल रहे हैं। ऐसे लोगों को पार्टी में उपेक्षित किया जा रहा है।

आरके चौधरी ने कहा कि भविष्य की नीति के बारे में अभी कुछ तय नहीं किया है।11 जुलाई को कार्यकर्ताओं की बैठक बुलाई गई है। कार्यकर्ताओं की राय के बाद ही वो आगे की कोई योजना बनाएंगे।


बताते चले कि आर के चौधरी बड़े पासी नेता हैं। आर के चौधरी बसपा की स्थापना के पहले से कांशीराम के साथ दलित समाज को जागरूक करने के अभियान के हिस्सेदार रहे हैं। आर के चौधरी बसपा के संस्थापक सदस्यों में हैं। आर के चौधरी सपा-बसपा की पहली साझा सरकार में मंत्री भी बने थे। लेकिन  बाद में बसपा में मायावती का प्रभाव बढ़ने के साथ उनकी दूरियां बढ़ती गईं। इसके बाद 2001 में उन्हें बसपा से बाहर का रास्ता दिखाया गया। फिर आरके चौधरी ने राष्ट्रीय स्वाभिमान पार्टी बना ली।  लगातार दो चुनाव लखनऊ की मोहनलालगंज विधानसभा सीट से अपनी पार्टी के निशान पर जीते। बाद में उनकी पार्टी का बसपा में विलय करा दिया गया।

Tags:    

  Similar Posts

Share it
Share it
Share it
Top