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बसपा से निकलकर दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं स्वामी प्रसाद मौर्य : मायावती

 Sabahat Vijeta |  2016-06-25 12:50:07.0

mayawatiतहलका न्यूज़ ब्यूरो


लखनऊ. बहुजन समाज पार्टी विधानमंडल दल की बैठक में नरैनी, जिला बाँदा के विधायक गया चरण दिनकर को स्वामी प्रसाद मौर्य के स्थान पर नया नेता चुन लिया गया. सर्व सम्मति से पारित इस प्रस्ताव के बाद बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती विधानसभा अध्यक्ष को यह प्रस्ताव भेजेंगी कि श्री सोनकर को नेता विरोधी दल की मान्यता दे दें.


बसपा विधानमंडल दल की बैठक से पहले पार्टी कार्यालय पर पत्रकारों से मुखातिब बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने आज फिर से दोहराया कि स्वामी प्रसाद मौर्य के निकल जाने से बी.एस.पी. को नुकसान नहीं बल्कि फायदा ही पहुंचा है, क्योंकि वे निजी व पारिवारिक स्वार्थ में काफी ज़्यादा लीन होकर पार्टी के मिशनरी काम से काफी हद तक भटक गये थे. उनके समाज के लोगों का भी कहना है कि मौर्य ने अकेले पार्टी छोड़ी है और उनका समाज पहले की तरह ही पूरी तरह से बी.एस.पी. के साथ है. मायावती ने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य स्वयं के अलावा अपने पुत्र व पुत्री के लिये भी फिर से विधानसभा का टिकट माँगने की जि़द कर रहे थे और इस प्रकार समाजवादी पार्टी की तरह ही बी.एस.पी. में ’’घोर परिवारवाद’’ को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहे थे.


उन्हें बार-बार समझाने की कोशिश की जा रही थी कि वे ’’परिवारवाद’’ का मोह छोड़ें, परन्तु वे इसके लिये कतई तैयार नहीं नज़र आ रहे थे जिस कारण आज नहीं तो कल उनका बी.एस.पी. से निष्कासन सुनिश्चित था. अच्छा ही हुआ कि वे स्वयं ही पार्टी छोड़कर चले गये.


मायावती ने कहा कि मैं समझती हूं कि बी.एस.पी. को छोड़कर उन्होंने एक प्रकार से पार्टी पर उपकार ही किया है. इससे बी.एस.पी. को फायदा ही होगा, नुकसान नहीं.


उन्होंने कहा कि मौर्य के समाज के लोगों के पूरे प्रदेश भर से लगातार फीडबैक मिल रहे हैं और वे लोग खुश हैं कि एक स्वार्थी व्यक्ति ने स्वयं ही पार्टी छोड़ दी है यह पार्टी के हित की बात है. इसके अलावा विधायकों में भी तीखी प्रतिक्रिया है. उनका कहना है कि बी.एस.पी. नेतृत्व ने मौर्य को हमेशा ही उनकी हैसियत व गुणों से कहीं ज़्यादा बक्शा. वे पार्टी व बी.एस.पी. की सरकारों में भी हमेशा ही उच्च पदों पर रहे, जिसके लिये उन्हें पार्टी नेतृत्व का कृतज्ञ रहना चाहिये था, परन्तु इसके बदले में उन्होंने विश्वासघात करने का काम किया है जिसकी जितनी भी निंदा की जाए वह कम है.


मायावती ने कहा कि बी.एस.पी. का सिद्धान्त जिस प्रकार से ’’परिवारवाद’’ को बढ़ावा देने की इजाजत नहीं देता है, ठीक उसी प्रकार से बी.एस.पी. का उसूल है कि वह किसी एक व्यक्ति की गलती की सजा कभी भी उसके पूरे समाज को नहीं देती है. इसलिये स्वामी प्रसाद मौर्य की गलती की सजा उसके पूरे समाज को कतई नहीं दी जायेगी अर्थात् उत्तर प्रदेश में मौर्य, शाक्य, कुशवाहा व सैनी आदि विभिन्न नामों से पहचानी जाने वाली इन जातियों को जिस प्रकार से बी.एस.पी. में पहले आदर-सम्मान दिया जाता था उसी प्रकार से आगे भी उन्हें हर स्तर पर पूरा-पूरा आदर-सम्मान दिया जाता रहेगा.


उन्होंने कहा कि बी.एस.पी. के अस्तित्व में आने के बाद से कुछ स्वार्थी किस्म के गिने-चुने लोग पार्टी छोड़कर चले गये, किन्तु उनमें से कोई भी, चाहे वह किसी भी जाति या धर्म का व्यक्ति रहा है, वह पनप नहीं पाया. बी.एस.पी. मूवमेन्ट से दगा करने वाले उन लोगों का आज कुछ भी अता-पता नहीं है. सभी शून्य हो गये हैं. उनमें से कुछ लोगों ने अपनी गलती पर पछताने और फिर माँफी माँगने पर पार्टी में वापस कर लिये गये. कुछ लोग अभी भी अपनी गलती के सम्बन्ध में माफी मांग रहे हैं, लेकिन स्वामी प्रसाद मौर्य की गलती उन लोगों जैसी है जिसे कभी भी माफ नहीं किया जा सकता. इसके अलावा मौर्य के समाज के लोगों का भी कहना है कि उनकी गलती माफ करने योग्य नहीं है. इस प्रकार उनके समाज के लोगों की भावनाओं का सम्मान करते हुये भी अब मौर्य के लिये बी.एस.पी. के दरवाजे हमेशा के लिये बन्द हो गये हैं.


उन्होंने कहा कि वैसे भी मौर्य मूल रूप से बी.एस.पी. के नहीं थे बल्कि कई पार्टियाँ बदलने के बाद बी.एस.पी. में शामिल हुये थे. सपा का परिवारवादी रंग उन पर कुछ ज्यादा ही चढ़ा था और विधायकों की शिकायत रही थी कि सदन के भीतर वह सपा सरकार के प्रति नरम रवैया अपनाया करते थे. साथ ही, नेता प्रतिपक्ष के हैसियत से प्रदेश की जनता के हित के लिए जिस जिम्मेदारी व दमदारी से उन्हें सदन में काम करना चाहिये था वह भूमिका वह सही से ईमानदारीपूर्वक नहीं निभा रहे थे.


मायावती ने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य ने 22 जून 2016 को पार्टी छोड़ दी थी. उसी दिन से ही विधानसभा में बी.एस.पी. विधायक दल के नेता का पद खाली हो गया था. इस खाली पद को ही भरने के लिये आज की यह विधानमण्डल दल की बैठक खासकर बुलायी गयी है, जिसमें नये नेता का चुनाव किया जाएगा.


मायावती ने कहा कि स्वामी प्रसाद मौर्य आज विभिन्न पार्टियों में दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं और हर कोई उन्हें गिरी हुई नजर से देख रहा है. सपा के कुछ बड़े नेता तो उनके खिलाफ अशोभनीय टिप्पणी भी कर रहे हैं. यह सब देखकर स्वयं उनके समाज को भी बुरा लग रहा है कि परिवार के मोह ने मौर्य को कहाँ से कहाँ लाकर खड़ा कर दिया.


बहुजन समाज पार्टी के विधान मण्डल दल की मायावती की मौजूदगी में हुई बैठक में जगपाल, सदस्य विधान सभा ने प्रस्ताव किया कि स्वामी प्रसाद मौर्य, जिन्हें गत 10 मार्च 2012 को बहुजन समाज पार्टी विधान मण्डल दल का नेता चुना गया था, ने दिनांक 22 जून 2016 को मीडिया में यह वक्तव्य दिया है कि उन्होंने बहुजन समाज पार्टी छोड़ दी है. अतः स्वामी प्रसाद मौर्य को बहुजन समाज पार्टी के विधान मण्डल दल के नेता पद से अपदस्थ करते हुए गया चरण दिनकर (विधायक, नरैनी, जिला बाँदा) को बहुजन समाज पार्टी, विधान मण्डल दल, उत्तर प्रदेश का नेता चुना गया. उनके नाम के प्रस्ताव का अनुमोदन जीतेन्द्र कुमार उर्फ नन्दू चौधरी सदस्य विधान सभा ने किया. उक्त प्रस्ताव को सर्वसम्मति से उपस्थित सभी विधान मण्डल दल के सदस्यों द्वारा पारित किया गया.

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