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मायावती ने बताई थी यूपी की राजनीति में ब्राह्मणों की हैसियत, अब 'शीला' की बारी

 Abhishek Tripathi |  2016-07-19 06:03:34.0

sheila_dixitअभिषेक त्रिपाठी
लखनऊ. यूपी में शीला दीक्षित को कांग्रेस ने सीएम प्रत्याशी के तौर पर उतारा है। इसके बाद से यूपी में एक बार फिर से ब्राह्मण वोट बैंक की चर्चा है। राजनीतिक गलियारों में तो ये भी चर्चा है कि कांग्रेस ने शीला को मैदान में उतारकर पहले ही बाजी मार ली। बता दें कि, पिछले कुछ सालों से यूपी में ब्राह्मण वर्ग को राजनीति में कुछ भी नहीं समझा जाने लगा था। ये बात भी जगजाहिर है कि यूपी का ब्राह्मण वर्ग एक समय में कांग्रेस का समर्थक रहा है। वहीं, तत्कालीन सीएम मायावती ने ही 2007 के विधानसभा चुनाव में ब्राह्मणों को उनकी ऐहमियत बताई थी।

'तिलक तराजू और तलवार' जैसे नारों के साथ चुनावी समर में उतरने वाली बसपा भी जब कुछ ही सालों में दलित-ब्राह्मण गठजोड़ पर उतर आई तो इससे ब्राह्मण समुदाय में अपने राजनीतिक पुनरुत्थान की रोशनी दिखी। बसपा के इस प्रयोग को जबरदस्त सफलता मिली और 2007 में उसने विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत हासिल किया। उसके बाद तो समाजवादी पार्टी (सपा) समेत सभी राजनीतिक दलों ने अपने यहां ब्राह्मणों को महत्व देना शुरू किया।


यूपी में ब्राह्मण मतदाता वैसे तो महज 11 फीसद ही हैं, लेकिन जानकारों का कहना है कि मतदाताओं का यह वर्ग किसी पार्टी के लिए माहौल बनाने में बड़ी भूमिका निभाता है। राजनीतिक प्रेक्षकों का मानना है कि कांग्रेस पार्टी न सिर्फ शीला दीक्षित को सीएम घोषित करने के फैसले को चुनाव में भुनाएगी बल्कि वो इस बात को भी प्रचारित करेगी कि एकमात्र कांग्रेस पार्टी ने ही राज्य में ब्राह्मण मुख्यमंत्री दिए हैं।

कांग्रेस सूत्रों की मानें तो, चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अपनी फीडबैक में कहा था कि दलित मायावती को नहीं छोड़ेंगे, इसीलिए उसे अपने परंपरागत वोट बैंक ब्राह्मण और मुस्लिम समुदाय पर फोकस करना चाहिए। जातीय समीकरण को ध्यान में रखते हुए ही कांग्रेस ने पिछड़ा वर्ग से राज बब्बर को प्रदेश का अध्यक्ष बनाया था।

यूपी की बहू हैं शीला दीक्षित, मिलेगा लाभ
शीला दीक्षित यूपी की बहू भी हैं। इसका लाभ भी उन्हें मिल सकता है। उनका विवाह उन्नाव के आईएएस अधिकारी (दिवंगत) विनोद दीक्षित के साथ हुई थी। विनोद कांग्रेस के बड़े नेता उमाशंकर दीक्षित के बेटे थे। शीला साल 1984 से लेकर 1989 तक यूपी के कन्नौज सीट से सांसद भी रही हैं। इस दौरान वह केंद्र सरकार में मंत्री भी रहीं। शीला दीक्षित राजनीति में जाना-माना चेहरा हैं। वह साल 1998 में पहली बार दिल्ली की मुख्यमंत्री बनीं। शीला का जन्म 31 मार्च 1938 को पंजाब के कपूरथला में हुआ था। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के मिरांडा हाउस से इतिहास में मास्टर डिग्री हासिल की है।

कांग्रेस ने तो पहले ही बाजी मार ली...
भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को तो पहले से ही ब्राह्मणों की पार्टी कहा जाता था। राजनीतिक दलों की ओर से इस वर्ग को महत्व तो मिलने लगा, लेकिन इसके सामने अब भी नेतृत्व संकट बना हुआ था। ऐसे में जब कांग्रेस पार्टी ने शीला दीक्षित को यूपी के चुनावी समर में आगे कर दिया है, तो राजनीतिक हल्कों में ये चर्चा शुरू हो गई है कि इस लिहाज से तो कांग्रेस ने बाजी मार ही ली है।

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