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बुंदेलखंड के वंचितों के हक में उठी आवाज़

 Sabahat Vijeta |  2016-05-25 17:44:19.0

bundelkhandजालौन. बुंदेलखंड में व्याप्त आकाल, सूखा, भुखमरी, पलायन व सूखे के कारण बुंदेलखंड के दलित व वंचित समुदायों के हालत को लेकर बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच (BDAM) ने आपदा एवं सूखा राहत आंकलन की यथास्थिति रिपोर्ट को लेकर जिला मुख्यालय कलेक्ट्रेट परिसर में आज जालौन जिले के हजारों दलित, वंचित सूखा पीड़ित लोगों ने बुंदेलखंड सूखा राहत अधिकार पर जन सभा की व सूखा राहत देने की गुहार लगाई.
बुंदेलखंड क्षेत्र में सूखे को लेकर किये गए सूखा राहत एवं आपदा आंकलन जिसमें जालौन जिले के कदोरा,महेवा,माधौगढ़,रामपुरा,नादीगावं,जालौन व डकोर ब्लाक ब्लाक के 61 गाँव में बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच के ग्राम स्तरीय वालेंटियर द्वारा 14 अप्रैल से 23 मई तक पहले चरण में आपदा आंकलन कर उनके आवेदन भरवाए गए व आज सूखे से पीड़ित जालौन जिले के 61 गावं के 4000 से अधिक परिवारों के सूखा पीड़ितों ने स्वयं आकर जिलाधिकारी कार्यालय में अपने आवेदन दिए, कार्यक्रम में महेश्वरी देवी, शकुन्तला देवी नरहन,राममूर्ति पिपरोंधा ने रो रो कर कहा की हमारे गावं में आज तक कोई अधिकारी नहीं गया फसलें सूख कर नष्ट हो गई कुछ पैदा ही नहीं हुआ, पशु मर गए, हम लोग क्या खाएं, कैसे जियें हम सब मर रहे है हमें आज तक कोई मुआवजा नहीं मिला. हम लोग प्यासों मर रहे है नलों ने पानी देना बंद कर दिया है, किसी भी गबन में पानी के टैंकर नहीं पहुंचे है. प्रमोद गौतम,के.के.प्रजापति,प्रगति गौतम, लक्ष्मी, आरती,शिवराम पाल, कमलेशी पाल,उदयवीर,महिपाल,किरन चौधारी,रिहाना मंसूरी,नीलिमा, सीलिमा, संतोष कुमार गौतम,नंदकुमार, विमल, कालूराम ने अपने अपने गावं में सूखा रहत आपदा आंकलन किया जिसके अनुभव इस सभा में रखे.

नेशनल दलित वाच/ एन,सी.डी.एच.आर. से राजेश ने कहा की बुंदेलखंड में पड़े सूखे पर सरकार तत्काल प्रभाव से दलित व वंचित परिवारों को राहत पहुंचाएं. जिला स्तर पर जिला आपदा प्रबंधन को सक्रिय कर केंद्र एवं राज्य सरकार के सूखा प्रबंधन के कार्यक्रमों में दलित व वंचित परिवारों पर विशेष ध्यान दिया जाये व ब्लाक स्तर पर सक्रिय निगरानी कमिटी बनाई जाये .
बुंदेलखंड दलित अधिकार मंच के संयोजक कुलदीप कुमार बौद्ध ने बताया की वर्तमान समय में बुंदेलखंड के प्रत्येक दलित वंचित परिवार के हालात बद से बदतर हैं. उन्हें शासन प्रशासन की ओर से मदद के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाये जा रहे हैं. न ही उन तक राहत पहुँच रही है, जब तक दलित वंचित आपदा से पीड़ित परिवारों को राह नहीं मिल जाति यह आन्दोलन जारी रखने की बात कही गई है.

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