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वर्ष 2020 तक भारत सहित 21 देश हो सकते हैं मलेरिया मुक्त

 Sabahat Vijeta |  2016-04-25 15:52:18.0

maleriaजेनेवा, 25 अप्रैल| विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एक आकलन में कहा है कि वर्ष 2020 तक 21 देश मलेरिया मुक्त हो सकते हैं। इनमें छह देश अफ्रीकी क्षेत्र के और भारत के चार पड़ोसी देश भूटान, चीन, नेपाल और मलेशिया हो सकते हैं। विश्व मलेरिया दिवस पर सोमवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। मलेरिया के खिलाफ डब्ल्यूएचओ के 2016-2030 के कार्यक्रमों में से एक लक्ष्य कम से कम 10 देशों से इस बीमारी को खत्म करना है।


जेनेवा स्थित डब्ल्यूएचओ ने एक बयान में कहा है कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए किसी देश को वर्ष 2020 से पहले कम से कम एक साल तक इसका कोई भी मामला नहीं मिलना चाहिए। बयान में कहा गया है कि डब्ल्यूएचओ का आकलन है कि अफ्रीकी क्षेत्र के छह देशों सहित 21 देश इस लक्ष्य को हासिल करने की स्थिति में हैं। अफ्रीकी देशों पर इस बीमारी का बोझ सबसे अधिक है।


डब्ल्यूएचओ के वैश्विक मलेरिया कार्यक्रम के निदेशक प्रेडो अलोंसो ने कहा, हमारी रिपोर्ट उन देशों को दर्शाती है जो मलेरिया उन्मूलन के रास्ते पर सही ढंग से बढ़ रहे हैं। रिपोर्ट में पेश डब्ल्यूएचओ के विश्लेषण के अनुसार ये 21 देश हैं-अल्जीरिया, बेलीज, भूटान, बोत्सवाना, काबो वर्डे, चीन, कोमोरोस, कोस्टारिका, इक्वाडोर, अल-सल्वाडोर, ईरान, मलेशिया, मैक्सिको, नेपाल, पराग्वे, कोरिया गणराज्य, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका , सूरीनाम, स्वाजीलैंड और पूर्वी तिमोर ।


अलोंसो ने कहा है कि डब्ल्यूएचओ ने खासकर अफ्रीका में मलेरिया फैलने की बहुत तेज दर को देखते हुए इसके लिए तत्काल अधिक निवेश की आवश्यकता पर जोर दिया है। साथ ही इन देशों की सराहना की है। उन्होंने कहा कि जीवन बचाना हर हाल में हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए।


रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया में वर्ष 2000 से ही मलेरिया से मरने वालों की संख्या में 60 फीसदी की कमी आई है। इसमें कहा गया है कि लेकिन इसके दूसरे स्तर, उन्मूलन तक पहुंचना आसान नहीं होगा।


दुनिया की करीब आधी आबादी 3.2 अरब लोगों पर मलेरिया का खतरा बरकरार है। केवल पिछले साल ही 95 देशों से मलेरिया के 21.4 करोड़ नए मामले सामने आए। रिपोर्ट में कहा गया है कि बीमारी से चार लाख से अधिक लोगों की मौत हो गई। अलोंसो ने कहा कि दुनिया को इस बीमारी से मुक्त करने के लिए हर हाल में दृढ़ राजनीतिक एवं वित्तीय प्रतिबद्धता के साथ नई प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल करना होगा।

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