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उपचुनाव: नोटबंदी के बाद पीएम मोदी की पहली अग्निपरीक्षा, जनता करेगी फैसला

 Abhishek Tripathi |  2016-11-19 07:23:45.0

byelection_pollतहलका न्यूज ब्यूरो
नई दिल्ली. देश के छह राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में उपचुनाव के लिए मतदान हो रहा है। इस चुनाव को केंद्र की बीजेपी नीत सरकार द्वारा 500 और 1000 रुपये के नोटों का चलन बंद किए जाने को लेकर पहले जनमत संग्रह के रूप में देखा जा रहा है।


पश्चिम बंगाल
पश्चिम बंगाल में कूच बिहार (आरक्षित अनुसूचित जाति) और तमलुक लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों और मोंटेश्वर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए शनिवार सुबह सात बजे से मतदान शुरू हो गए। इन सीटों पर 23 उम्मीदवार आमने-सामने हैं और इस दौरान लगभग 3,524,977 लोग अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिनमें 1,689,735 महिलाएं हैं।


बिहार
कूच बिहार संसदीय क्षेत्र में तृणमूल की रेणुका सिन्हा के निधन के बाद यह सीट खाली हो गई थी, जबकि तमलुक से सांसद सुवेंदू अधिकारी के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के मंत्रिमंडल में शामिल होने से यह सीट भी रिक्त हो गई थी। वहीं, तृणमूल के विधायक सजल पांजा के निधन के बाद मोंटेश्वर विधानसभा सीट खाली हुई थी।


मध्य प्रदेश
मध्य प्रदेश की शहडोल लोकसभा और नेपानगर विधानसभा सीट के लिए उपचुनाव के लिए मतदान हो रहे हैं। बीजेपी सांसद दलपत सिंह परस्ते के निधन के कारण शहडोल लोकसभा क्षेत्र में उप चुनाव हो रहा हैं, जबकि नेपानगर विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव यहां से बीजेपी विधायक राजेंद्र श्यामलाल दादू की सड़के हादसे में निधन होने के कारण हो रहे हैं। इस उपचुनाव में शहडोल लोकसभा सीट से 17 उम्मीदवार मैदान में हैं, जबकि नेपानगर विधानभा क्षेत्र से केवल चार उम्मीदवार ही अपना भाग्य आजमा रहे हैं।


कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री दलबीर सिंह और शहडोल लोकसभा क्षेत्र से पूर्व सांसद राजेश नंदिनी सिंह की बेटी हिमाद्री सिंह को उम्मीदवार बनाया है, तो बीजेपी ने प्रदेश के कैबिनेट मंत्री एवं आदिवासी नेता ज्ञान सिंह को मैदान में उतारा है। वहीं, नेपानगर विधानसभा क्षेत्र उप चुनाव के लिए कांग्रेस ने क्षेत्र के आदिवासी नेता अंतर सिंह बद्रे पर विश्वास जताते हुए उन्हें अपना उम्मीरवाद बनाया है, जबकि बीजेपी ने इस क्षेत्र से विधायक रहे दिवंगत राजेंद्र श्यामलाल दादू की बेटी मंजू दादू को अपना प्रत्यशी बनाकर क्षेत्र के मतदाताओं की सहानभूति हासिल करने की कोशिश की है।


असम
असम में लखीमपुर लोकसभा क्षेत्र और बैठालांसो विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव के लिए जारी वोटिंग में आठ उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला होगा। लखीमपुर में अमिय कुमार हांडिक (सीपीएम), प्रदान बरूआ (बीजेपी), डॉ हेम हरी प्रसन्न पेगू (कांग्रेस), हेमकांता मिरी (एसयूसीआई-कम्युनिस्ट) और दिलीप मोरान (निर्दलीय) मैदान में हैं। इससे पहले लखीमपुर लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल करते थे, जबकि मानसिंग रोंगपी के 12 जुलाई को कांग्रेस से बीजेपी में शामिल होने के बाद बैठालांसो की सीट रिक्त हो गई थी।


तमिलनाडु
वहीं तमिलनाडु में तंजावुर, अर्वाकुरुचि ओर तिरुप्पराकुंद्रम विधानसभा सीट पर हो रहे उपचुनाव में सत्ताधआरी एआईएडीएमके और डीएमके के बीच टक्कर है। अप्रेल- मई में हुए राज्य विधानसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों द्वारा भारी मात्रा में नकदी और शराब बांटे जाने के आरोपों के बीच इन सीटों पर मतदान टाल दिए गए थे।


अर्वाकुरुचि सीट से एआईएडीएमके के वी.सेंथिल बालाजी और डीएमके के के.सी. पलानीसामी आमने-सामने हैं, जबकि तिरुप्पराकुंद्रम से एआईएडीएमके के ए.के. बोस की सीधी भिड़ंत डीएमके के पी.सारावनन से होगी। वहीं तंजावुर की सीट से एआईएडीएमके के एम.रंगासामी डीएमकेक के अंजुगम भूपति दौड़ में शामिल हैं।


पुदुचेरी


इसके साथ ही पड़ोसी पुदुचेरी में भी नेल्लीथोपे विधानसभा क्षेत्र में मतदान प्रक्रिया जारी है। पुदुचेरी की नेल्लीथोपे सीट से कांग्रेस नेता वी. नारायणसामी और एआईएडीएमके के ओम शक्ति सेगर आमने-सामने हैं।


अरुणाचल प्रदेश
इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश में दूरस्थ अंजा जिले की हायुलियांग विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए शनिवार को वोट डाले जा रहे हैं। इस सीट पर नॉर्थ ईस्ट डेमोक्रेटिक अलायंस (एनईडीए) की तरफ से दासंगलु पुल बीजेपी प्रत्याशी हैं। राज्य के दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री कलिखो पुल की तीन में से सबसे छोटी पत्नी दासंगलु का मुकाबला निर्दलीय प्रत्याशी योम्पी क्री से है। कलिखो पुल ने इस साल अगस्त महिने में संदिग्ध परिस्थितियों में आत्महत्या कर ली थी।


त्रिपुरा
वहीं त्रिपुरा की त्रिपुरा की अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित बरजाला और खोवाई विधानसभा सीटों के लिए कड़ी सुरक्षा के बीच उपचुनाव हो रहे हैं। कांग्रेस में अंदरूनी फूट के चलते 6 जून को कांग्रेस विधायक जीतेंद्र सरकार के इस्तीफे के बाद बरजाला सीट और मार्क्‍सवादी कमुयनिस्ट पार्टी (सीपीएम) विधायक समीर देव सरकार के निधन के बाद खोवाई विधानसभा सीट खाली हुई थी।

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