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केंद्र सरकार ने कहा- भारत कोहिनूर पर नहीं कर सकता दावा

 Tahlka News |  2016-04-18 10:28:19.0

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तहलका न्यूज़ ब्यूरो

नई दिल्ली, 18 अप्रैल. कोहिनूर हीरा 720 कैरेट का था। इस समय ये 105 कैरेट का है और यह ब्रिटेन की महारानी के ताज में जड़ा है। माना जाता है कि ये हीरा 1848 के ब्रिटेन-सिख युद्ध के बाद ब्रिटेन के हाथ उस वक्त आया जब नाबालिग दलीप सिंह ने इसे ब्रिटेन के शासकों को सौंप दिया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि कोहिनूर को वापस लाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार से 6 हफ्ते में डिटेल रिपोर्ट मांगी है। वहीं केंद्र सरकार ने कोर्ट से कहा है भारत कोहिनूर पर दावा नहीं कर सकता क्योंकि यह न चोरी हुआ और न जबरदस्ती ले जाया गया। केंद्र ने कोर्ट से कहा गिफ्ट दिया गया था कोहिनूर। कोर्ट कोहिनूर हीरा देश में वापस लाए जाने की मांग करने वाली पर सुनवाई कर रहा था।




सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस याचिका को पेंडिंग रखा जाएगा क्योंकि अगर यह खारिज होती है तो कोहिनूर पर भारत का दावा कमजोर हो जाएगा और कहा जाएगा कि देश की सबसे बड़ी कोर्ट ने केस खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जैसे टीपू सुल्तान की तलवार वापस आई, हो सकता है आगे भी ऐसा ही हो।






66 साल तक ग्वालियर के तोमर राजवंश का कुल गौरव रहा कोहिनूर। यह जानकारी कम लोगों को है कि कोहिनूर तोमर राजवंश के पास आधी सदी से ज्यादा वक्त तक रहा। मध्यकालीन इतिहासकारों का कहना है कि बाबरनामा के मुताबिक कोहिनूर साउथ इंडिया के किसी राजा के पास था। अलाउद्दीन खिलजी ने इसे वहां से लूट कर अपने कब्जे में लिया। बाद में खिलजी वंश के शासक मध्य प्रदेश के मालवा में कोहिनूर को ले आए। मालवा के राजा होशंगशाह खिलजी ने ग्वालियर पर आक्रमण किया था लेकिन तोमर राजा डोंगरेंद्र सिंह ने शाह को बुरी तरह हराया। होशंगशाह को दूसरी संपत्तियों के साथ अलाउद्दीन खिलजी का साउथ से लूटा हीरा कोहिनूर भी तोमरों को सौंपना पड़ा।1460 से 1526 तक ये हीरा तोमरों के खजाने में मानमंदिर की शोभा बढ़ाता रहा। बाद में ग्वालियर नरेश विक्रमादित्य की विधवा महारानी ने तोमर राजवंश के गौरव की रक्षा करने के लिए इसे मुगल बादशाह हुमायूं को भेंट किया था।


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