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मुहर्रम के आख़री दौर में मजलिस-मातम का सिलसिला तेज़

 Sabahat Vijeta |  2016-12-07 14:49:30.0

Lucknow: Muslims participate in a mourning procession during Muharram in Lucknow on Tuesday. PTI Photo (PTI11_4_2014_000095B)

लखनऊ. अन्जुमन काज़मिया आबिदया के तत्वावधान में हर साल मनाई जाने वाली अय्यामे अज़ा की आखि़री रातें आ चुकी हैं. 2 महीने 8 दिन की अज़ादारी अपने सफ़र के आख़री पड़ाव पर है. हर साल की तरह से इस साल भी 26 सफ़र से 7 रबीउल अव्वल (27 नवम्बर से 8 दिसम्बर) तक चलने वाला प्रोग्राम चल रहा है. रोजाना मगरिब की नमाज़ के बाद मौलाना गुलाम पंजतन रिज़वी (मुसय्यब) रौज़ा-ए-कज्में में मजालिस को खिताब कर रहे हैं.


मजलिस की शुरुआत क़ुरान की तिलावत से होती है. तिलावत-ए-क़ुरान के बाद शायर अपने कलाम के ज़रिये हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम को नज़राना-ए-अक़ीदत पेश करते हैं.


अय्यामे अज़ा की आखरी रात 7 रबीउलअव्वल (8 दिसम्बर) को शाम साढ़े 6 बजे होने वाली पहली मजलिस को मौलाना मोहम्मद मेंहदी इफ़तेख़ारी साहब खि़ताब करेंगे. दूसरी मजलिस बाद विदायी अलमे मुबारक हुसैनिया नाजि़म साहब में रात दस बजे होगी. जिसे मौलाना कर्रार हैदर मौलाई खि़ताब करेंगे. मजलिस के बाद आग पर मातम होगा. आग के मातम के बाद दूसरे जि़लों से आयी हुई अन्जुमन हाए मातमी नौहाख़्वानी व सीनाज़नी करेगी.

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