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CM के भरोसे पर हमेशा रहे नाकाम, बड़े बेआबरू होकर निकले ‘यशस्वी’

 Anurag Tiwari |  2016-07-05 07:24:13.0

Yashsavi Yadav, Controversial IPS, Chief Minister, Akhilesh Yadav, Uttar Pradesh, Kanpur, Lucknow, Rajesh Pandeyअनुराग तिवारी

लखनऊ. यशस्वी यादव एक ऐसे आईपीएस अफसर हैं जो यूपी में अपने दोस्त की फजीहत करने के लिए जाने जाएंगे। यह दोस्त को और नहीं बल्कि यूपी के बेदाग़ छवि वाले सीएम अखिलेश यादव हैं। इसे विडम्बना ही कहेंगे कि जब-जब सीएम अखिलेश यादव न केवल यशस्वी यादव को महाराष्ट्र कैडर से  डेप्युटेशन पर यूपी लेकर आए बल्कि उन्हें लखनऊ और कानपुर जैसे बड़े जिलों की कमान सौंपी। लेकिन जब-जब सीएम ने उन्हें कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी यशस्वी यादव ने न केवल सरकार की किरकिरी की बल्कि पर्सनल रूप से सीएम को भी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा। यशस्वी यादव के नाम एक और रिकॉर्ड रहा कि इन्होने अपने प्रभाव के चलते 45 दिनों तक लखनऊ को नया पुलिस कप्तान के बिना ही रहने दिया। अब आखिरकार यशस्वी यादव यूपी से भी दागदार करियर लेकर विदा हो गए। यशस्वी यादव को उनके मूल कैडर महाराष्ट्र के लिए अवमुक्त कर दिया गया है।


लखनऊ 45 दिनों तक रहा बिना पुलिस कप्तान के

बीते साल 1 मई को यशस्वी यादव को राजधानी लखनऊ के एसएसपी पद से हटाया गया। लेकिन इस विवादित अफसर ने अपने राजनितिक पहुँच और रसूख के चलते, इस महत्वपूर्ण पद पर 45 दिनों तक किसी की तैनाती नहीं होने दी। हटाए जाने के बाद से सरकार ने कई काबिल आईपीएस अधिकारियों को लाने की कोशोह की लेकिन यशस्वी यादव ने अपने रसूख के चलते सरकार के इन प्रयासों पर पानी फेर दिया।  कोई भी अफसर यशस्वी यादव की फैलाई हुई गंदगी में आकर काम करने को तैयार नहीं हुआ। यशस्वी यादव के कर्मों का फल था कि लखनऊ एसएसपी पोस्ट की छवि बुरी तरह खराब हो चुकी थी। इसके बाद सरकार ने 45 दिनों तक लखनऊ एसएसपी पोस्ट खाली रहें के बाद प्रमोटी आईपीएस, अनुभवी और मीडिया फ्रेंडली ऑफिसर राजेश पांडेय राजधानी की कमान सौंपी।

विवादों से चोली दामन का साथ
कानपुर जैसे बड़े जिले के एसएसपी बनने के यशस्वी यादव ने ऐसा काम किया जो पूरे यूपी में आईपीएस कैडर के लिए काले अध्याय के रूप में जाना जाएगा। यशस्वी यादव पर सपा विधायक इरफान सोलंकी के साथ कानपुर हैलट अस्पताल के डॉक्टरों से हुए विवाद के बाद समाजवादी पार्टी कार्यकर्ता की तरह काम करने के आरोप लगे थे। यह यशस्वी यादव का ही कारनामा था कि पूरे प्रदेश में डॉक्टरों को हड़ताल करने पड़ी और 50 से अधिक बेगुनाह मरीज मौत के मुंह में समा गए।

कोर्ट की दखल के बाद कानपुर से हुई विदाई

हैलट कांड के बाद यशस्वी यादव सरकार की सरपरस्ती के भरोसे बैठे थे, लेकिन इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूरे मामले का स्वत: संज्ञान लिया और राज्य सरकार को फटकार लगाते हुए न्यायिक जांच के आदेश दिए। कोर्ट ने कानपुर रेंज के आईजी, डीआईजी और एसएसपी को हटाने का आदेश दिया तब जाकर उन पर कार्रवाई हुई। इस पूरे प्रकरण में यशस्वी याद ने अपने बाल सखा सीएम अखिलेश यादव की जमकर किरकिरी कराई।

लखनऊ आकर जारी रहा विवादित फैसलों का सिलसिला

यशस्वी यादव ने कानपुर से हटाये जाने के बाद भी सबक नहीं लिया, जबकि सीएम अखिलेश यादव ने एक बार दोस्ती की खातिर उनपर भरोसा जताते हुए राजधानी लखनऊ का कप्तान बना दिया। यशस्वी यादव यहाँ भी अति-उत्साह में फैसले लेते रहे और फर्जी खुलासे करते रहे। यहाँ ताकि उन्होंने एक एयरगन  के कारोबारी को बड़े हथियारों का सौदागर बता दिया। उनके इस खुलासे में कई खामियां नजर आईं। यही नहीं लखनऊ यूनिवर्सिटी के पास बाबूगंज में एचडीएफसी बैंक में 50 लाख रुपयों की लूट और 3 हत्याओं का खुलासा करने में नाकाम रहे। एक दिन इन्ही यशस्वी यादव ने अचानक तेलंगाना में मारे गए सिमी आतंकियों के सर पर लूट और ह्त्या का ठीकरा फोड़कलर अपनी पीठ थपथपाने की कोशिश की। लेकिन उन्ही के सीनियर अफसरों ने उनकी इस थ्योरी की हवा निकाल दी। यशस्वी यादव की लचर पुलिसिंग व्यवस्था का ही नतीजा है कि लूट और ह्त्या की इतनी बड़ी घटना लखनऊ पुलिस के लिए अनसुलझा रहस्य बनी हुई है।

अपने मूल कैडर महाराष्ट्र में रहे हैं विवादित

ऐसा नहीं है कि अपने गृह कैडर यूपी में डेप्युटेशन आने के बाद विवादों से दोस्ती की हो। यशस्वी अपने मूल कैडर में भी गलत कारणों से सुर्खियों में बने रहे। यहाँ तक कि वहां भी हाईकोर्ट ने उन्हें नौकरी से निकाले जाने के आदेश दे दिए थे। लेकिन यशस्वी ने एनसीपी के नेताओं की नजदीकी के चलते बच गए। कोल्हापुर पुलिस प्रशिक्षण कैंप में एक सेक्स स्कैंडल में उनकी नौकरी जाते-जाते बची थी। इस प्रशिक्षण स्कूल में हुए कांड में एक अविवाहित प्रशिक्षु गर्भवती पायी गयी थी। इस मामले ने पूरे महाराष्ट्र में खलबली मचा दी थी। बाद में यशस्वी यादव सहित कई अफसर निलंबित किये गये थे।

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