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CJI: जब सरकार अपना धर्म भूल जाती हैं तो कोर्ट को दखल करना पड़ता है

 Anurag Tiwari |  2016-06-06 08:22:27.0

[caption id="attachment_86279" align="alignnone" width="1024"]PM नरेन्द्र मोदी ,  CJI टीएस ठाकुर  File Photo: PM नरेन्द्र मोदी और CJI टीएस ठाकुर[/caption]

जम्मू. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने सरकार के कामकाज पर तीखी टिपण्णी की है। उन्होंने कहा कि जब सरकारें अपना धर्म भूल जाती हैं तो कोर्ट को दखल देना पड़ता है। उन्होंने यह बाकायदा सुप्रीम कोर्ट के कामकाज पर टिपण्णी करने वाले सरकार के मंत्रियों का नाम लेते हुए कहा। सीजेआई ने यह बात ईटीवी से एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कही। सीजेआई के इस बयान के बाद विपक्षी पार्टियों ने सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है।

सरकार इफेक्टिव तरीके से काम करे तो कोट क्यों दखल दे

सीजेआई ने एक सवाल के जवाब में कहा कि अगर सरकार अगर अपना काम प्रभावी ढंग से करें तो कोर्ट क्यों चाहेगी कि वह सरकार के मामलों में दखल करे।  यह कोर्ट की मजबूरी है कि अगर लोगों के मौलिक अधिकारों को लेकर जो काम होना चाहिए अगर नहीं होता तो हमें दखल देना पड़ता है।


 

50 फीसदी केसेज में सरकार ही दे सकती है रिलीफ

सीजेआई ने कहा कि माना जाता है कि कोर्ट में जो केसेज जाते हैं उनमें 85 फीसदी सरकार के खिलाफ होते हैं।  आइडियल सिचुएशन में तो सिस्टम में ही ऐसा होना चाहिए कि जिसका जो हक हो वह उसे मिले। जब वह उसे नहीं मिलता तो सिटीजन कोर्ट में नागरिक मजबूर होकर जाता है। ऐसे में सरकार के पास ऐसी लिटिगेशन पॉलिसी होनी चाहिए कि जिसमे जिसका जो हक बने वह उसे मिल जाए। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा हो कि 50 फीसदी केसेज जो सरकार के खिलाफ है उसमें सिटीजन को अपने आप ही रिलीफ मिल जाए बाकि 50 फीसदी केसेज ऐसे भी होते हैं जिसमे उनका हक नहीं बनता।

CJI ने सरकार के काम के रिव्यु की बात कही

सीजेआई ने भारत सरका के कामकाज पर कमेन्ट करते हुए कहा कि अब वह समय आ गया है जब किसी प्रोसेस के जरीए सरकार के कामो की समीक्षा की जानी चाहिए जाए। उन्होंने जजों की नियुक्ति प्रक्रिया लेकर भी सरकार की आलोचना की।  जस्टिस ठाकुर ने कहा जब लोग जेलों में बंद हों और न्याय के लिए आवाज लगा रहे हों, ऐसे में सरकार जजों की नियुक्ति के प्रस्तावों को पर 2 महीने से अधिक समय के लिए टाल नहीं सकती  उन्होंने कहा कि कोर्ट नागरिक कानूनों को किसी की निजी महिमा मंडन के लिए लागू करने का आदेश नहीं देती हैं। उन्होंने कहा कि अब सरकार के कामों के ऑडिट का समय आ गया है।

देश के 1700 कानून बदले जाने चाहिए

चीफ जस्टिस ने आगे कहा देश में लागू वर्तमान 1700 कानूनों को बदलने का समय आ चुका है। उन्होंने कहा कि वर्षों पुराने इन कानूनों में से सिर्फ 300 बदले जा चुके हैं। जस्टिस ठाकुर ने कहा कि गरीबी हटाने की 30 प्रकार की योजनाएं हैं, लेकिन वे सिर्फ कागजों तक सीमित हैं।

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