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RBI के इस एक फैसले ने बढ़ा दी यूपी के किसानों की मुश्किलें

 Tahlka News |  2016-11-16 09:26:30.0

तहलका न्यूज ब्यूरो

लखनऊ. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जिला सहकारी बैंकों में 500-1000 के नोट बदलने पर रोक लगाने का सर्कुलर जारी कर दिया है और इसके साथ ही दूर दराज के किसानो की मुसीबते और भी ज्यादा बढ़ गयी हैं. यूपी के किसानो का बड़ा सहारा उनके आस पास के ये सहकारी बैंक रहे हैं.इन इलाके के लोगों की बैंकिंग सहकारी समितियां और मिनी बैंकों से ही चलती है. यूपी के कुछ गांव तो ऐसे हैं जहां राष्ट्रीयकृत बैंको की शाखाएं भी नहीं हैं और ग्रामीण पूरी तरह से सहकारी बैंकों पर ही निर्भर है। सहकारिता को ग्रामीण क्षेत्रों की बैंकिंग की रीढ़ माना जाता है। गांवों में लोगों के बचत खाते भी इन्हीं समितियों और मिनी बैंकों में है। ऐसे में आरबीआई के इस कठोर फैसले का यूपी के गांवों में जमकर विरोध हो रहा है।


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सर्कुलर में कहा गया है कि इन सहकारी बैंको के पास बैंकिंग की आधुनिक व्यवस्थाएं मौजूद नहीं है और न ही असली और नकली नोटों के पहचान करने वाले यन्त्र है । ऐसे में नकली नोट को पकड़ पाना मुश्किल है। हालाकि जानकारों का कहना है कि ये कोई बड़ी समस्या नहीं है और ऐसी मशीने एक से दो दिनों में खरीदी जा सकती हैं.

मंगलवार को रिजर्व बैंक ने सर्कुलर जारी किया था जिसके मुताबिक सहकारी बैंको में नोट नहीं बदले जा सकते. रिजर्व बैंक का कहना है कि उसके पास कुछ शिकायते आई थी कि सहकारी बैंकों में जाली नोट और काले धन को सफेद किए जा रहे हैं करने की आशंका जाहिर की गई है।

रिजर्ब बैंक के इस फैसले से अचानक ही सूबे के सहकारी बांको की हजारो शाखाओं के उपभोक्ता परेशानी में फंस गए हैं.
यूपी में ग्रामीण आबादी काफी ज्यादा है। कई गांव ऐसे हैं जो आज भी विकास से कोसों दूर हैं। इन गांवों में किसान दो वक्त की रोटी भी उधार के पैसे ही जुगाड़ कर पाता है। ये उधार कोई और नहीं बल्कि सहकारी बैंक ही देते हैं। अब जब नोटबंदी का फैसला लागू हो गया है तो ऐसे किसानों की कमर टूट गई है, कहना गलत नहीं होगा।

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