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यहां चाहकर भी भक्त विसर्जित नहीं कर पाए मां दुर्गा की मूर्ति

 Anurag Tiwari |  2016-10-09 12:58:28.0

Durga Puja, Varanasi, Idol, Immersion, Mukherjee, 249 Years

तहलका न्यूज ब्यूरो

वाराणसी. आमतौर पर प्रचलन है कि विजयादशमी के दिन मां दुर्गा की प्रतिमाएं विसर्जित कर दी जाती हैं. वहीं धर्मनगरी काशी में एक मूर्ति जो लगभग ढाई सौ साल से विसर्जित नहीं की जा सकी है. कहा जाता है कि इसके पीछे खुद माँ दुर्गा का निर्देश है कि उनकी मूर्ति विसर्जित न की जाए.

काशी के सोनारपुरा के कालीबाड़ी मोहल्ले के मुखर्जी परिवार के आहाते में स्थित दुर्गा जेई की मूर्ति पिछले 249 सालों से विसर्जित नहीं की गई है. यहां रहने वाले बताते हैं कि उस समय परिवार के मुखिया के मां दुर्गा ने खुद सपने में आकर कहा था कि उनकी मूर्ति को विसर्जित न किया जाए और वे वहीं रहना चाहती हैं. तब से मां दुर्गा इस बंगाली परिवार के घर में विराजमान हैं. मुखर्जी परिवार ने अब मां के स्थान को मंदिर का रूप दे दिया है.


इस मंदिर के पुजारी श्यामल भट्टाचार्य के मुताबिक़ साल 1767 में पुरखों ने नवरात्रि के समय दुर्गा पूजा के लिए मां दुर्गा की मूर्ति स्थापित की थी. परम्परा के अनुसार विजयदशमी के दिन परिवार के लोगों ने विसर्जन के लिए मां की मूर्ति को उठाने का प्रयास किया, लेकिन मूर्ति अपनी जगह से हिली तक नहीं. पुजारी के अनुसार उस समय वहां मौजूद सभी लोगों ने मिलकर मूर्ति उठाने का प्रयास किया लेकिन 5 फीट ऊंची प्रतिमा अपने जगह से हिली तक नहीं.

मुखर्जी परिवार के सदस्य एचके मुखर्जी बताते हैं कि उसी रात परिवार के मुखिया मुखर्जी दादा को मां ने सपने में दर्शन दिया और कहा कहा कि वे यहां से जाना नहीं चाहती हैं और उन्हें रोज गुड़ और चने का भोग रोज शाम को लगा दिया जाए.

मुखर्जी के अनुसार मूर्ति मिट्टी, पुआल, बांस, सुतली से बनी हुई है, लेकिन आज भी ढाई सौ सालों बाद भी मूर्ति वैसी बनी हुई है. नवरात्रि के दिनों में इस दिव्य मूर्ति के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है.

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