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#earthquake: भूकंप से थर्राया दिल्ली-एनसीआर, 2 लोगों की मौत

 Tahlka News |  2016-04-10 10:37:31.0

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                     फोटो: अफगानिस्तान का हिंदुकुश इलाका था भूकंप का केंद्र, 190 किमी. की गहराई में 6.8 तीव्रता से आया भूकंप।
तहलका न्यूज ब्यूरो

नई दिल्ली, 10 अप्रैल. राजधानी में रविवार दोपहर भूकंप के झटके महसूस किए गए। दिल्ली-एनसीआर के अलावा नॉर्थ इंडिया के कई शहरों में ये झटके लगे। 3.59 बजे पहले झटका लगा और फिर 4.01 बजे तक तीन झटके लगे। बताया जा रहा है कि भूकंप के ये झटके दिल्ली के आसपास, चंडीगढ़, श्रीनगर में भी महसूस किए गए हैं। भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.8 बताई जा रही है।


a4                                                                              फोटो: दिल्ली में रोक दी गई है मेट्रो सर्विस।

आईपीएल खिलाड़ी बाल-बाल बचे
भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान का नॉर्थ-ईस्टर्न बदखासन सूबे का अश्काशम डिस्ट्रिक्ट था। भूकंप के झटके महसूस होने के बाद कई जगह लोग अपने घरों और ऑफिसेस से बाहर निकल आए। सबसे ज्यादा झटका पाकिस्तान और अफगानिस्तान में भी महसूस किया गया। भूकंप का केंद्र हिंदूकुश की पहाड़ियों में जमीन से 210 किलोमीटर नीचे बताया जा रहा है। पाकिस्तान में रिक्टर पैमाने पर तीव्रता 7.1 बताई जा रही है। मोहाली में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए। ऑस्ट्रेलिया क्रेकिटर एरोन फिंच ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी। आईपीएल के चलते ऑस्ट्रेलिया की क्रिकेट टीम मोहाली में है। फिंच ने बताया कि मोहाली में होटल को खाली करा लिया गया। दिल्ली में भी मेट्रो ट्रांसपोर्ट को कुछ देर के लिए रोक दिया गया। हालांकि कुछ देर बाद इन्हें फिर से शुरु कर दिया गया है। दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर कहा कि -भूकंप के झटके काफी डरावने थे मैं सचिवालय की छठे फ्लोर पर फर्नीचर को हिलते हुए देख रहा था। उम्मीद है सब कुछ ठीकठाक होगा।


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फोटो: फाइल फोटो।
कहां-कहां महसूस किए गए झटके?

दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और गुजरात में भूकंप के झटके महसूस किए गए।


a3                                                                   फोटो: नई दिल्ली में लोग घरों और ऑफिसों से बाहर आए।

क्यों आता है भूकंप?
पृथ्वी के अंदर सात प्लेट्स हैं, जो लगातार घूम रही हैं। जहां ये प्लेट्स ज्यादा टकराती हैं, वह जोन फॉल्ट लाइन कहलाता है। बार-बार टकराने से प्लेट्स के कोने मुड़ते हैं। जब ज्यादा दबाव बनता है तो प्लेट्स टूटने लगती हैं। नीचे की एनर्जी बाहर आने का रास्ता खोजती है। डिस्टर्बेंस के बाद भूकंप आता है।


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फोटो: भूकंप के झटकों के बाद बाहर निकले लोग।
700 साल पुरानी फॉल्ट लाइन में है एशिया का बड़ा हिस्सा

अर्थक्वेक ट्रैक एजेंसी के मुताबिक, हिमालयन बेल्ट की फॉल्ट लाइन के कारण एशियाई इलाके में ज्यादा भूकंप आ रहे हैं। इसी बेल्ट में हिंदुकुश रीजन भी आता है। इस साल अप्रैल-मई में नेपाल में आए भूकंप के कारण करीब 8 हजार लोगों की मौत हुई थी। हिमालय कुछ सेंटीमीटर के हिसाब से उत्तर में खिसक रहा है। हिमालयन फॉल्ट लाइन पर भारत सरकार की मदद से अमेरिकी वैज्ञानिकों ने एक स्टडी की थी। यह स्टडी यूएस जर्नल लिथोस्फीयर और जेजीआर में छपी थी। इस स्टडी को लीड कर चुके जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवान्स्ड साइंटिफिक रिसर्च के सी.पी. राजेंद्रन के मुताबिक, हिमालय 700 साल पुरानी फॉल्ट लाइन पर मौजूद है। यह फॉल्ट लाइन ऐसी जगह पर पहुंच चुकी है, जिसकी वजह से कभी भी वहां ऐसा बड़ा भूकंप आ सकता है, जो पिछले 500 साल में नहीं देखा गया हो।


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