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जानिए कैसे होती है वोटों की गिनती, जनता को ऐसे मिलते हैं रिजल्‍ट

 Girish |  2017-03-10 05:11:09.0

जानिए कैसे होती है वोटों की गिनती, जनता को ऐसे मिलते हैं रिजल्‍ट


तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो
लखनऊ: यूपी विधानसभा चुनाव के नतीजे 11 मार्च को आएगा। सभी सियासी दलों के साथ-साथ देश की जनता की नजर भी चुनाव परिणमों पर लगी टिकी हैं। यूपी विधानसभा चुनाव के मतगणना के लिए तैयारियां पूरी हो गई हैं। मतगणना 11 मार्च को सुबह 8 बजे से होगी। यूपी में 78 मतगणना केंद्र बनाए गए हैं। मतगणना के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। 72 जिलों में एक-एक केंद्रों पर मतगणना होगी। मतगणना केंद्रों में तीन स्तर की सुरक्षा व्यवस्था रहेगी, जबकि बाकी बचे तीन जिले आजमगढ़, कुशीनगर, अमेठी में दो-दो केंद्रों पर मतगणना होगी। 187 कंपनी केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को लगाया गया है। पीएसी यूपी पुलिस और होमगॉर्ड के जवान भी तैनात रहेंगे।

403 विधानसभा क्षेत्रों में आयोग ने प्रेक्षक तैनात किए हैं। सभी मतगणना स्थलों पर वीडियोग्रॉफी करवाई जाएगी। सबसे पहले पोस्टल बैलेट पेपर की गिनती होगी। बैलेट पेपर के बाद ईवीएम की काउंटिंग का क्रम शुरू होगा। मतगणना केंद्रों में तीन स्तर की सुरक्षा व्यवस्था रहेगी। पहले स्तर में लोकल पुलिस। दूसरे में स्टेज ऑर्मड पुलिस। तीसरे स्तर में सीएपीएफ की तैनाती रहेगी। मतगणना हॉल में कोई मोबाइल का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा।

इन सबके बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर वोटों की गिनती कैसे होती है और नतीजे आम लोगों तक कैसे पहुंचते है?दरअसल, वोटों की गिनती में बहुत ही गोपनीयता बरती जाती है। इसके लिए अधिकारियों की खास ट्रेनिंग दी जाती है और वोटों की गिनती सुबह आठ बजे शुरू होती है। सबसे पहले पोस्टल बैलेट गिने जाते हैं। 8.30 के करीब ईवीएम खोले जाते हैं और हर राउंड के वोटों की गिनती होती है, जो मीडिया और प्रत्याशी के एजेंट तक पहुंचाए जाते हैं।

सबसे पहले सील की जांच
गिनती से पहले चुनाव अधिकारी ईवीएम को कैरी करने वाले केस पर लगी कागज की मुहर और भीतर मौजूद ईवीएम पर लगी मुहर की जांच करता है। जब अधिकारी यह सुनिश्चित कर लेता है कि ईवीएम से कोई छेड़छाड़ नहीं हुई है तब वोटों की गिनती की प्रक्रिया शुरू होती है।

ईवीएम में दर्ज वोटों की गिनती
इसके लिए मतगणना कर्मी सबसे पहले ईवीएम को ऑन करता है। इसके बाद वह रिजल्ट बटन को दबाता है। इससे यह पता चलता है कि किस उम्मीदवार के पक्ष में कितने वोट पड़े। ईवीएम के रिजल्ट बटन को दबाने पर जो संख्या उभरती है, उसे फॉर्म नंबर 17 सी में दर्ज करना होता है। इस फॉर्म पर फिर उम्मीदवारों के एजेंट दस्तखत करते हैं। इसके बाद फॉर्म नंबर 17 सी को रिटर्निंग ऑफिसर को सौंप दिया जाता है।

सभी 14 मेजों से 17 सी फॉर्म होते हैं इकट्ठा
मतगणना क्षेत्र में लगीं सभी 14 मेजों पर मौजूद मतगणना कर्मी हर राउंड में फॉर्म 17 सी भरकर एजेंट से दस्तखत करवा कर रिटर्निंग अफसर के पास रखते जाते हैं। इसके बाद रिटर्निंग अफसर हर राउंड में मतों की गिनती दर्ज करता जाता है। इस नतीजे को हर राउंड के बाद ब्लैक बोर्ड पर दर्ज किया जाता है और लाउड स्पीकर की मदद से उसकी घोषणा भी होती है।

राज्य के मुख्य निर्वाचन अफसर को बताई जाती है संख्या
हर राउंड के बाद नतीजो के बारे मे राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सूचना दी जाती है। यह सिलसिला मतगणना खत्म होने के बाद तक चलता रहता है।

स्ट्रॉन्ग रुम से आती है इवीएम
ईवीएम को मतगणना केंद्र पर लगी मेज पर स्ट्रॉन्ग रूम से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम के बीच बेहद सुरक्षित रास्ते से लाया जाता है। रास्ते के दोनों ओर बैरिकेड लगे होते हैं।
हर मेज पर मौजूद होता है अफसर और पोलिंग एजेंटहर मेज पर एक सरकारी अफसर निगरानी के लिए मौजूद रहता है। इसके अलावा हर उम्मीदवार का एक पोलिंग एजेंट भी हर मेज पर मौजूद रहता है।

एक बार में खुलती हैं 14 ईवीएम
एक मतगणना क्षेत्र में अलग-अलग मेजों पर एक बार में 14 ईवीएम खोली जाती हैं। एक राउंड में 14 ईवीएम में मौजूद वोटों की गिनती की जाती है।

तारों की बाड़ करती है एजेंट और ईवीएम को अलग
वोटों की गिनती में लगे सरकारी कर्मचारियों और वहां मौजूद उम्मीदवारों के एजेंटों के बीच तारों की बाड़ लगी होती है ताकि एजेंट ईवीएम से छेड़छाड़ न कर सकें।

ये पूरी प्रक्रिया कुछ ऐसे होती है

- चुनाव की घोषणा से कम से कम हफ्ता भर पहले रिटर्निंग अफसर (आरओ) काउंटिंग का समय और जगह तय करते हैं
- काउंटिंग में सिर्फ आरओ, काउंटिंग स्टाफ, उम्मीदवार, उनके इलेक्शन एजेंट, काउंटिंग एजेंट, ऑन ड्यूटी सरकारी कर्मचारी और चुनाव आयोग के अधिकृत अधिकारी ही जा सकते हैं
- एक सेंटर पर 16 से ज्यादा काउंटिंग एजेंट नहीं हो सकते हैं
- एक हॉल में काउंटिंग टेबल की संख्या 14 से ज्यादा नहीं हो सकती है
- इसके अलावा आरओ और ऑब्जर्वर के लिए एक-एक टेबल होते हैं
- काउंटिंग हॉल में सिर्फ आधिकारिक वीडियो कैमरे ही लगते हैं
- अंदर किसी भी ऑडियो-विजुअल माध्यम का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है
- काउंटिंग स्टाफ और एजेंट काउंटिंग के पहले ईवीएम जांचते हैं
- पोस्टल बैलट पेपर्स की गिनती सबसे पहले की जाती है
- ईवीएम वोटों की गिनती पोस्टल बैलेट काउंटिंग के आधे घंटे बाद ही होती है
- लकड़ियों और तारों के जरिए बैरिकेड बनाए जाते हैं, जिससे उम्मीदवार और उनके एजेंट इवीएम के छू ना सकें
- काउंटिंग के बाद फाइनल रिजल्ट फॉर्म 20 में दिया जाता है
- एक राउंड की काउंटिंग के बाद ईवीएम को फिर से सीलबंद कर दिया जाता है
-एक राउंड की काउंटिंग के बाद आरओ 2 मिनट का अंतर लेता है, जिसमें उम्मीदवार या उनके एजेंट रिकाउंटिंग की मांग कर सकते हैं
- आरओ तय करता है कि रिकाउंटिंग की मांग सही है नहीं
- किसी भी तरह का मतभेद के निपटने के बाद आरओ ऑब्जर्वर से क्लियरेंस लेकर रिजल्ट घोषित करता है
- आरओ रिजल्ट चुनाव आयोग और दूसरे अधिकृत अधिकारी को देता है

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Girish ( 4001 )

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