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इन बातों के लिए हमेशा याद रहेगा 2017 यूपी विधानसभा चुनाव

 Girish |  2017-03-09 11:15:58.0

इन बातों के लिए हमेशा याद रहेगा 2017 यूपी विधानसभा चुनाव

तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो
लखनऊ: पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव का मतदान समाप्त होने के बाद अब सबकी निगाहें 11 मार्च के नतीजों पर टिकी हैं। करीब दो महीने लंबा चला ये चुनाव अपने साथ कई यादें छोड़ गया। इस चुनाव में कई दिग्‍गज गायब रहे तो कई नए चेहरे सियासी पटल पर सामने आए। समाजवादी पार्टी में कलह के बाद सपा ने अखिलेश यादव के नेतृत्‍व में चुनाव लड़ा। वहीं, बीजेपी ने सीएम कैंडिडेट नहीं घोषित किया और पीएम नरेंद्र मोदी के चेहर पर चुनाव लड़ा।

इस दौरान दलबदलूओं का भी बोलबाला रहा। स्‍वामी प्रसाद मौर्य ने मायावती का साथ छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया। तो वहीँ यूपी कांग्रेस का प्रमुख चेहरा रीता बहुगुणा जोशी ने भी बीजेपी का साथ पसंद कर लिया. इसके अलावा सपा-कांग्रेस का गठबंधन हुआ तो बीजेपी ने भी क्षेत्रिय दलों के साथ मिलकर चुनाव लड़ा। इस बीच प्रचार और चुनावी भाषणों में गधा, कसाब, शमसान और स्‍कैम छाया रहा।

समाजवादी पार्टी में हुई कलह
यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले समाजवार्दी पार्टी में कलह शुरू हो गई। मुलायम सिंह यादव को अध्‍यक्ष पद से हटाकर अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी के अध्‍यक्ष बन गए। वहीं, शिवपाल यादव को प्रदेश अध्‍यक्ष पद से हटा दिया गया। कलह इतनी बढ़ गर्इ की पार्टी टुटने के कगार पर आ गई। मामला चुनाव आयोग पहुंच गया। हालांकि, बाद में सब ठीक हो गया और अखिेलेश के नेतृत्‍व में सपा ने चुनाव लड़ा। लेकिन मुलायम सिंह यादव ने केवल अपने भाई शिवपाल, छोटी बहु और बलिया से सपा प्रत्‍याशी पारस नाथ यादव के लिए ही प्रचार किया। तो शिवपाल यादव ने केवल अपने विधानसभा क्षेत्र में ही प्रचार किया।

सपा- कांग्रेस का हुआ गठबधंन
सपा मुखिया रहते हुए मुलायम सिंह यादव किसी भी दल से गठबंधन के खिलाफ थे। वहा चाहते थे कि जो भी दल मिलकर चुनाव लड़ना चाहे, वह सपा में विलय करें। लेकिन बाद में जब सीएम अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी के मुखिया बने तो उन्‍होंने कांग्रेस से गठबंधन कर लिया। चुनाव में सपा का पूरा दारोमदार अखिलेश यादव के कंधे पर रहा तो कांग्रेस के प्रचार की कमान राष्‍ट्रीय उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी के हाथ रही। अखिलेश यादव ने कांग्रेस का गठबंधन में 105 सीट दिए।
खूब चला दलबदल का खेल
विधानसभा चुनाव के पहले दलबदल का जैसा खेल इस बार हुआ वैसा पहले शायद ही कभी देखा गया होगा। विधायकों और नेताजी की कौन कहे, 16वीं विधानसभा मे नेता प्रतिपक्ष रहे स्‍वामी प्रसाद मौर्य और रालोद विधानमंडल दल के नेता दलवीर सिंह तक ने दलबदल कर लिया। सपा सरकार में मंत्री वसीम अहमद, शारदा प्रताप शुक्‍ल, और विजय मिश्र और पूर्व मंत्री शादाब फातिमा, नारद राय, अंबिका चौधरी भी टिकट नहीं नहीं पा सके। बाद में विजय, नाराद और अंबिका सपा छोड़ बसपा में चले गए। वहीं, शारदा प्रताप रालोद से चुनाव लड़े। कई नेता दल बदलने क बावजूद टिकट नहीं पा सके।

पीएम मोदी की प्रतिष्‍ठा दांव पर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय जनता पार्टी को प्रदेश की सत्‍ता में लाने के लिए अपनी प्रतिष्‍ठा दांव पर लगा दी। उन्‍होंने न सिर्फ ताबड़तोड़ करीब 24 बड़ी रैलियां कीं। बल्कि अपने संसदीय क्षेत्र वाराणसी में लगातार तीन दिन डेरा डाले रहे।

गायत्री के बहाने अखिलेश पर निशाना
चुनाव के दौरान अवैध खनन की औपचारिक सीबीआई जांच शुरू होने और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गैंगरेप एफआईआर दर्ज होने के निशाने पर आ गए। पीएम नरेंद्र मोदी से लेकर बीजेपी के हर नेता ने गायत्री के बहाने सीएम अखिलेश यादव पर निशाना साधा। गायत्री प्रजापति अभी भी फरार चल रहे हैं।

नहीं दिखे ये बड़े नेता
विधानसभा चुनाव के पहले बिहार के सीएम और जेडीयू अध्‍यक्ष नीतीश कुमार ने प्रदेश में कई सभाएं की थी। पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी नोटबंदी के खिलाफ सभा करने लखनऊ आई थी। पिछले चनुाव तक पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार की राष्‍ट्रवादी कांग्रेस पार्टी भी सूबे में सक्रिय नजर आती थी। लेकिन इस बार पवार भी नहीं दिखे।

बीजेपी के स्‍टार कैंपेनर
बीजेपी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अमित शाह से लेकर केंद्रीय गृहमंत्री सहित बड़ी संख्‍या में केंद्रीय मंत्रियों और नेताओं ने चुनाव के दौरान जमकर प्रचार किया। हालांकि, प्रदेश अध्‍यक्ष केशव प्रसाद मौर्य और गोरखपुर के सांसद महंत आदित्‍यनाथ सबसे ज्‍यादा सभाएं करने वाले स्‍टार कैंपेनर के रूप में चमके। प्रदेश की लीडरशिप में इन्‍हें सबसे ज्‍यादा तवज्‍जों दी गर्इ।

कौएद का सपा की जगह बसपा से विलय
माफिया मुख्‍तार अंसारी की पार्टी कौमी एकता दल सपा में विलय के लिए महीनों हाथ-पैर मारती रही। सपा में विवाद के बावजूद मुलायम ने कौएद का विलय कर लिया। लेकिन अखिलेश के सपा अध्‍यक्ष बनने के बाद यह विलय रद्द हो गया। आखिरकार मुख्‍तार ने मायावती के से मिलकर कौएद का बसपा में विलय कर दिया। कभी मुख्‍तार अंसारी को माफिया बताने वाली मायावती ने मुस्लिम मतों के लिए मुख्‍तार को क्‍लीन चिट भी देने की कोशिश की।

निषाद पार्टी की पूर्वांचल में उदय
पिछले चुनाव में पीस पार्टी नए क्षेत्रीय दल के रूप में सामने आई थी। इस बार पूर्वांचल में निषाद पार्टी ने दस्‍तक देने की कोशिश की है। पूर्व सांसद धनंजय सिंह और विधायक विजय मिश्र सहित कई चर्चित चेहरे इस दल से मैदान में हैं। निषाद पार्टी सीट भले कम पाए, पर कई सीटों का समीकरण बिगाड़ सकती हैं।

नारों ने सबकों लुभाया
यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान सभी दलों ने जमकर प्रचार किया। हर दल अपने स्‍टार प्रचारकों के जरिए वोटरों को लुभाने की कोशिश की। इसके लिए हर दल ने अलग-अलग नारे और स्‍लोगन का प्रयोग किया। सपा ने 'काम बोलता है' और 'कांग्रेस ने 27 साल यूपी बेहाल' का नारा दिया। हालांकि, गठबंधन के बाद सपा-कांग्रेस का नारा 'यूपी को ये साथ पसंद है' हो गया। वहीं, बीजेपी ने 'न गुण्‍डाराज न भ्रष्‍टाचार, अबकी बार भाजपा सरकार' का नारा दिया। इस दौरान बीएसपी ने भी प्रचार पूरा जोर लगाया। बसपा ने पहली बार सोशल मीडिया के जरिए जनता से जुड़ने की कोशिश की।

आयोग बना मूक दर्शक
इस बार चुनाव में निर्वाचन आयोग की पहले जैसी हनक नजर नहीं आई। चुनाव से जुड़े जिम्‍मेदार अधिकारी संवाद से बचने की कोशिश करते नजर आए, शिकायतों और सवालों पर कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठते रहे। सुप्रीम कोर्ट के स्‍पष्‍ट निर्देश और आयोग के सख्‍त फरमान के बावजूद सियासी दल जाति व धर्म के नाम पर वोट मांगते रहे और आयोग मूक दर्शक बना रहा।

521 लोगों पर मुकदमा दर्ज
इस बार चुनाव के दौरान आयकर विभाग और पुलिस ने करीब सवा अरब रुपए बरामद किए। चुनाव आयोग ने आचार संहिता उल्‍लंघन के 766 मामलों में कार्रवाई करते हुए 521 लोगों पर मुकदमा दर्ज करवाया है।

22,400 व्‍यक्तियों के विरुद्ध जारी गैर जमानती वारंट
चुनाव में गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए पुलिस ने आईपीसी की धारा 107-116 के तहत 36.25 लाख व्‍यक्ति पाबंद किए गए। ये वे लोग हैं जिन पर चुनाव में गड़बड़ी करने की आशंका व्‍यक्‍त की जा रही थी। पुलिस ने 22,400 व्‍यक्तियों के विरुद्ध जारी गैर जमानती वारंट के सापेक्ष 21,653 को तामील कराया।









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