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यूपी चुनाव: चौथे चरण के मतदान को प्रभावित करेंगे ये मुद्दे

 Avinash |  2017-02-22 17:25:43.0

यूपी चुनाव: चौथे चरण के मतदान को प्रभावित करेंगे ये मुद्दे

तहलका न्यूज़ ब्यूरो
लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में गुरुवार को चौथे चरण का मतदान होगा. चौथे चरण के अंतर्गत प्रतापगढ़, कौशांबी, इलाहाबाद, जालौन, झांसी, ललितपुर, महोबा, हमीरपुर, बांदा, चित्रकूट, फतेहपुर और रायबरेली सहित कुल 12 जिलों की 53 सीटों पर बृहस्पतिवार को वोट डाले जाएंगे. इस दौरन करीब 1 करोड़, 84 लाख 82 हजार से ज्यादा मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे. वहीँ यूपी चुनाव के चौथे चरण की इन 53 सीटों ने लिए तमाम राजनीतिक दलों और निर्दलियों सहित कुल 680 उम्मीदवार चुनावी मैदान में हैं.
इसके अलावा इस चरण के चुनाव में जिन उम्मीदवारों पर लोगों की खास नजर होगी उनमें रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ राजा भैया, प्रमोद तिवारी की बेटी आराधना मिश्रा, बहुजन समाज पार्टी के गया चरण दिनकर, समाजवादी पार्टी में मंत्री मनोज पांडे, बाहुबली नेता अखिलेश यादव की बेटी आदिति सिंह और बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सिद्धार्थनाथ सिंह शामिल हैं.

गौरतलब है कि तीन चरण के मतदान के बाद यूपी के करीब आधे प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है, लेकिन अभी भी यह स्पष्ट नही हो प् रहा है कि जनता का रुझान किस ओर है. सभी राजनीतिक गणितिज्ञ अब चौथे चरण के मतदान पर ध्यान केन्द्रित किए हुए हैं. वहीँ विकास के मुद्दों से शुरू हुआ यूपी विधानसभा का चुनाव अब धार्मिक ध्रुवीकरण के मुद्दों की ओर बढ़ गया है. नेताओं के बोल और रणनीतियां बदल गई हैं.

दरअसल बात ये है कि, राजनीतिक दृष्टि से बेहद उपजाऊ, भौगोलिक-सांस्कृतिक सरोकारों से जुड़े इन इलाके में सीटें भले ही कम हैं, लेकिन बेहद अहम हैं. शायद यही वजह है कि पश्चिम से पूरब की तरफ बढ़ रही जंग के सियासी सेनापतियों की वाणी बदलने के साथ हमला करने का तरीका भी बदलता जा रहा है.

बता दें कि अब जिन सीटों पर अब जंग होने वाली है, वह जातीय लिहाज से तो दलित व पिछड़ा फैक्टर काफी प्रभावी है, आर्थिक कसौटी पर भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश की तुलना में काफी पिछड़ा है. उद्योग-धंधों की कमी से रोजगार का संकट है. खेती भी पश्चिम की तुलना में काफी बदहाल है. स्वास्थ्य व शिक्षा की दुश्वारियां हैं. एक तरफ बुंदेलखंड, मिर्जापुर व सोनभद्र जैसे पथरीले व उबड़-खाबड़ जमीन वाले इलाके हैं तो दूसरी तरफ गोंडा से गोरखपुर व वाराणसी के बीच समतल जमीन वाले जिले हैं.

सीधी-सपाट गणित न होने के कारण यहां के बारे में भविष्यवाणी करना काफी मुश्किल है. चुनाव में इन इलाकों के जमीनी मुद्दे और जातीय समीकरण यहाँ सियासी पार्टियों व चेहरों की साख बनाने व बिगाड़ने का काम करते हैं. शायद यही वजह है कि जातीय ध्रुवीकरण की गणित और सियासी समीकरणों को बनाने व बिगाड़ने की दिलचस्पी पश्चिम से ज्यादा दिखती है. कारण यह है कि पश्चिम के विपरीत इस इलाके में पिछड़ों को कई उपजातियां हैं, जो अलग-अलग हिस्सों में प्रभावी संख्या में मौजूद हैं.

इनमें कुर्मी, लोध, कुशवाहा, मौर्य, राजभर, निषाद, बिंद, कश्यप, केवट, सैथवार, बढ़ई, नाई, लोहार, नोनिया चौहान जैसी 80 से ज्यादा जातियां शामिल हैं. वहीँ पूर्वांचल के कई जिलों में भूमिहार वोट भी हैं. दलितों की भी लगभग सभी उपजातियां रहती हैं. इनमें पासी काफी प्रभावी हैं.

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