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जानिए किस घिनौने तरीके से बनती है कच्ची, पीकर मौत है निश्चित

 Anurag Tiwari |  2016-07-17 10:03:47.0

kachchi sharab, spurious liquor, etah, hooch tragedy

तहलका न्यूज ब्यूरो

लखनऊ। एटा जिले में कच्ची शराब पीकर अब तक 24 लोगों की मौत हो चुकी है। ऐसा नहीं है कि यह पहली बार हो जब प्रदेश में कच्ची शराब पीकर लोगों के मौत के मुंह में जाने की घटना सामने आई हो। इससे पहले जनवरी 2015 में लखनऊ-उन्नाव की सीमा पर जहरीली कच्ची शराब पीकर 35 लोगों की मौत हुई थी। उससे पहले अक्टूबर 2013 में सपा सुप्रीमो के गढ़ आजमगढ़ में जरीली शराब पीकर 50 से अधिक लोग मौत केर मुंह में चले गए थे। दरअसल मुनाफ़ा कमाने के लिए कच्ची शराब के सौदागर जिन तरीकों और मटेरियल का इस्तेमाल करते हैं वही उसको जहरीला बना देता है। tahlkanews.com ने अवैध रूप से चल रहे इस कारोबार की पड़ताल की और जाना कि किस घिनौने तरीके से कच्ची शराब बनाई जाती है क्यों जहरीली हो जाती है।


कुत्ते का मल और ऑक्सीटोसिन  मिलाया जाता

आमतौर पर शराब बनाने के लिए महुआ या चावल की माड़ को हफ्ते 10 दिन तक सड़ाया जाता है।  इसके बाद उसे भट्ठी पर रख उसका डिस्टिलेशन किया जाता है।  शराब बनाने का रॉ मटेरियल जितना ज्यादा सड़ा होगा, माना जाता है कि शराब उतनी नशीली बनेगी।  लेकिन शराब इसी प्रोसेस  में जहरीली बन जाती है।  जल्दी पैसा कमाने के चक्कर में महुआ की लहान में कुत्ते का मल, ऑक्सीटोसिन  मिलाया जाता है। इससे सड़ने के प्रक्रिया तेज हो जाती है।  इस डिस्टिलेशन के दौरान उसमे नौसादर और यूरिया मिला दिया जाता है।  डिस्टिलेशन के बाद मिले कंसंट्रेटेड लिक्विड में पांच गुना पानी और ऑक्सीटोसिन मिलाया जाता है।  इसके बाद इसे अवैध कच्ची शराब की दुकानों पर सप्लाई कर दिया जाता है।  जहाँ इसके व्यापारी इसमें और पानी मिलकर 1 लीटर का 5 लीटर बनाते हैं।  ऐसे में कभी नशा कम हो जाये तो इसमें नशा बढाने के मिथाइल अल्कोहल मिला दिया जाता।  यह मिथाइल अल्कोहल शरीर में जाकर दुष्प्रभाव डालता है खासतौर से आँखों पर। इससे न केवल आँखों की रौशनी जाने का सौ फीसद खतरा है बल्कि जान जाने का खतरा भी रहता है।

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कच्ची शराव की जहरीला बनाने के लिए डालते है छिपकली
कच्ची शराब बनाने के लिए शराब कारोबारी इसी लहन में नशा बढाने के लिए इस में छिपकली को मार कर डाल देते हैं। वहीँ कुछ मामलों में लहन के सड़ने की प्रक्रिया को तेज करने के लिए उसमे कुत्ते का मल मिलाये जाने की बात भी सामने आई है।

शराब बनाने के लिए इन उपकरणों की पड़ती है जरूरत
शराब बनाने के लिए बहुत ज्यादा उपकरणों की जरूरत नही पड़ती है। इस के लिए भट्टी, खाली पीपा, एक पतीली, एक बोतल, दो फिट नली और एक पुरानी सूती साड़ी की जरूरत पड़ती है जो बजार में आसानी से मिल जाता है।

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लहन और शराब को जमीन में के आंदर दबा देते है
शराब के कारोबारी पुलिस से बचने के लिए शराब बनाने के लिए तैयार की गई लहन और शराब को खेतो और सड़के किनाने गढ्ढो में दबा देते है। पुलिस और आबकारी की टीम अगर कभी छापे मारी करती है तो उनके घरो पर शराब और लहन न मिले।

अच्छा मुनाफा है अवैध शराब के कारोबार में
शराब के कारोबार से जुड़े लोगो ने बताया कि शराब में कम लागत पर अधिक मुनाफा मिलता है। एक किलो गुड़ से पांच वोतल शराब तैयार हो जाती है। एक वोतल सौ रुपएं में बिक जाती है। शराब कारोबारी चालिस रुपए की लागत से तैयार की गई उनकी पांच बोतल शराब पांच सौ रुपए में बिकजाती है।

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बेहद लचर आबकारी अधिनियम में होती है गिरफतारी
एटा में हुई मौतों के बाद ही यूपी सरकार भले गैंगेस्टर एक्ट में कार्रवाई की बात कह रहे हों, लेकिन जानकारो की माने तो कच्ची शराब के कारोबार पर अंकुश न लगने की मूल बजह अबकारी अधिनियम में कड़ी सजा का प्रबधान नही है। जिससे  आबकारी बिभाग जब किसी को कच्ची शराब के साथ पकड़ता है तो उसका धारा 60 में चालान करता है। जिस में आरोपी को तुरंत जमानत मिल जाती है। आबकारी टीम को यदि शराब के साथ शराब बनाने के उपकरण मिलते है तो धारा 60-2 में कार्रवाई करता है। जिस में कोर्ट से अभियुक्त एक दो दिन में जमानत पर छूट जाता है। यदि टीम को छापे मारी के दौरान कैमिकल मिलता है तो अभियुक्ता का चालान खाद्य पदार्थो में मिलावट की आईपीसी की धारा 272में किया जाता है। इस एक्ट के तहत भी अधिकतर मामलों में अवैध शराब के कर्रोबारियों पर जुर्माना लगाकर छोड़ दिया जाता है।

शराब के साथ पकड़ने पर नही होती सजा
वर्तमान कानून में कच्ची शराब बनाने में पकड़े जाने पर कठोर सजा का कोई प्रबधान नही है। इस अपराध में कोर्ट अधिक तकर मामलो में जुर्माना लगा कर छोड़ देती है। सूत्रो की माने तो शराब के आरोपी कोर्ट में मजिस्टेट के हांथ पैर जोड़ कर मांफी मांगने लगते है जिस में कोर्ट अभियुक्तो को पांच सौ रुपए से लेकर अधिक से अधिक दो हजार रुपए तक का जुर्माना जमा करने के आदेश देकर छोड़ देते है।

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