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पंकज प्रसून का वैलेन्टाइन डे

 shabahat |  2017-02-06 12:39:26.0

पंकज प्रसून का वैलेन्टाइन डे

व्यंग्य की दुनिया के सुपरिचित हस्ताक्षर पंकज प्रसून एक तरफ युवा व्यंग्यकार हैं तो दूसरी तरफ युवा वैज्ञानिक भी हैं. साथ ही युवा तो हैं ही. युवा नौकरी में प्रमोशन पाने के बाद यह इनका पहला वैलेंटाइन डे है. बहुत उत्साहित हैं. हर वर्ग को इन्होने वैलेंटाइन डे की मुबारकबाद दी है. हम इन्हें मुबारकबाद दें इससे पहले आप इनकी बधाइयों को पढ़िये और आनंद लीजिये. अच्छा लगे तो हमें सराहें, कहीं बुरा लगे तो बताएं इनका निजी वाला मोबाइल नम्बर है हमारे पास.

वैलेंटाइन डे यानी प्रेम चतुर्दशी 14 फरवरी को विश्व भर के आशिकों द्वारा मनाया जाने वाला इश्कोत्सव है. प्रेम सप्ताह का आरम्भ 7 फरवरी को रोज डे यानी गुलाब दिवस से होता है. पंकज प्रसून ने रोज डे पर बिभिन्न प्रकार के आशिकों के लिए विभिन्न प्रकार की कविताएं लिखी हैं.

आनंद लीजिये

आलसी आशिकों के लिए




जिसको अपना ही न पाया उसको फिर मैं छोड़ूँ क्यों

जिसको जां से जोड़ लिया है उसको दिल से जोड़ूँ क्यों

खड़ा हुआ मैं फुलवारी में बड़ी देर से सोच रहा

उस गुलाब को पाने खातिर इस गुलाब को तोड़ू क्यों


नाज़ुक दिल आशिको के लिए –


नाजुक गुलाब है कहीं टूटे न पंखुड़ी

इस खौफ से हमने उन्हें छूकर नहीं देखा


नेता टाइप आशिकों के लिए –

काँटों भरे गुलाब से संतोष तुम करो

आचार संहिता है कमल दे नहीं सकता


अवयस्क आशिकों के लिए –

गुलाब की खुशबू तुम भूल जाओ

खुशबू के पीछे पीछे स्कूल जाओ

उसके चक्कर में फूल बनते रहो

और उस फूल से ही फूल जाओ


शायर टाइप आशिकों के लिए

उसने फूल को मसला मसल के फेंक दिया

मैंने भी तो मतला मसल के फेंक दिया


व्यंग्य-आशिकों के लिए


अबकी गुलाब दिवस पे मैं फूल लेने गया

देखकर भाव हम रह गए ठगे हैं

कीमत गुलाब की बताई जो हजार रूपये

ऐसा लगा आज हम सोते सोते जगे हैं

मैंने कहा फूल वाले थोड़ा कंशेसन दो

वह बोला की काहे दूं क्या आप मेरे सगे हैं

आपको पता नहीं चुनाव का ये सीजन है

सारे 'फूल' नेता जी के स्वागत में लगे हैं

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