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कभी तनहाइयों में भी, हमारी याद आएगी... अलविदा मुबारक बेगम

 Sabahat Vijeta |  2016-07-19 07:04:09.0

कभी तनहाइयों में भी, हमारी याद आएगी... अलविदा मुबारक बेगम

मुम्बई. अपने वक्त कि मशहूर गायिका मुबारक बेगम का लंबी बीमारी के बाद 76 साल की उम्र में सोमवार रात को निधन हो गया. 1950 से 1970 के दौरान हिंदी सिनेमा में मुबारक बेगम एक जाना माना नाम थी. कभी तन्हाईयों में भी हमारी याद आएगी..जैसे गीत ने उन्हें अमर कर दिया है.

आल इण्डिया रेडियो से अपना सफ़र शुरू करने वाली मुबारक बेगम ने मुफलिसी में अपना बचपन बिताया था. उन्हें संगीत का बहुत शौक था और इसे उनके पिता ने पहचान लिया. पिता ने उन्हें किराना घराने के उस्ताद रियाजउद्दीन खां और उस्ताद समद खां की शागिर्दी में गाने की तालीम दिलवाई. उन्हें ऑल इंडिया रेडियो पर ऑडीशन देने का मौका मिला.

इसके बाद मुबारक बेगम ने फिल्मो का रुख किया. उन्हें पहला बड़ा ब्रेक फिल्म मधुमति के गाने 'हाले दिल सुनाइए से...' मिला. केदार शर्मा की फिल्म 'हमारी याद आएगी' से उन्हें शोहरत मिली और इसके बाद उन्होंने एक से बढ़कर एक नगमे इंडस्ट्री को दिए. जिनमें 'हमारी याद आएगी' का गीत 'कभी तन्हाइयों में हमारी याद आएगी..' हमराही का 'मुझको अपने गले लगा लो..' खूनी खजाना का 'ऐ दिल बता..' डाकू मंसूर का गीत 'ऐजी-ऐजी याद रखना सनम...' शामिल हैं.


1950 से 1970 के दशक के बीच हिंदी सिनेमा के लिए सैकड़ों गीतों और गजलों को अपनी आवाज दी थी जिसके लिए उन्हें याद किया जाता है. 1950 और 1960 के दशक के दौरान उन्होंने सर्वश्रेष्ठ संगीतकारों के साथ काम किया. इनमें एसडी बर्मन, शंकर जयकिशन और खय्याम शामिल हैं.

काम की कमी के बाद मुबारक के पास आमदनी का कोई जरिया नहीं रहा और वे बदहाली का जीवन जीने पर मजबूर हो गईं. उनके परिवार में उनका एक बेटा-बहू, एक बेटी और चार पोतियां हैं. बेटा ऑटो चलाकर घर का खर्च चलाता है और बेटी को पार्किंसन की बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया है.

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