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बाढ़ का कहर: बिहार में चूहे खाकर जिंदा हैं दलित

 Abhishek Tripathi |  2016-08-09 02:36:51.0

flood_in_biharतहलका न्यूज ब्यूरो
पटना. बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों खासकर कोसी व सीमांचल में हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते ही जा रहे हैं। कोसी के बाढ़ के पानी का दंश झेल रहे सहरसा जिले के कई गांव में भोजन और पानी का जुगाड़ समस्या बन गई है। सहरसा के सलखुआ प्रखंड स्थित दलित आबादी वाले बनाही गांव के लोग तो चुहे खाकर भूख मिटा रहे हैं।


सहरसा के सलखुआ में दलितों का गांव है बनाही। यहां की करीब एक हजार की आबादी बाढ़ से घिर गई है। गांव के पौने दो सौ घर चारों तरफ से पानी घिर गया है जिससे बाहर से कुछ लाना भी मुश्किल हो गया है। ऐसे में यहां के लोग चूहे खाकर भूख मिटा रहे हैं।


खेतों में पानी भर जाने के चलते बड़ी संख्या में चूहे गांव की ऊंची जमीन पर शरण लेने पहुंच गए हैं। अनाज और सब्जी नहीं मिलने पर गांव के लोगों ने भी हालात से समझौता करते हुए चूहों को अपना भोजन बना लिया है। लोग मजबूरी में इसे खा रहे हैं। बारिश में घिरे गांव के ही कुछ लोग दिनभर चूहे पकड़ते हैं और उसे महंगे दामों में 40-50 रुपए किलो बेच रहे हैं।


गांव के लोगों का कहना है कि तीन दिनों से गांव से बाहर निकलने का साधन नहीं मिला है। अनाज या अन्य सामान तो मिलना मुश्किल है। आदमी की मजबूरी है कि वह चूहा खाने पर विवश है। बेचन सादा का कहना है कि वह दिन भर में 10-12 किलो चूहा पकड़ लेता है। बेचन की तरह और भी है जो चूहा मारकर बेचते हैं और जो नहीं बिकता है वह घर में बनाकर खा लेते हैं।

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