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आसान नहीं थी गोल्डन गर्ल से “अम्मा” की डगर, विधान सभा में खींचा गया था पल्लू

 Tahlka News |  2016-12-06 07:26:22.0

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उत्कर्ष सिन्हा

एक वक्त में सुनहरे परदे पर अपने मादक सौन्दर्य से जवान दिलो की धड़कने बढ़ाने वाली जयललिता जयराम अपने निधन के वक्त तक हर उम्र की आवाम के दिलो में अपनी मसीहाई छवि बना चुकी थी मगर इस गोल्डन गर्ल के अम्मा बनाने तक का सफ़र इतना आसान भी नहीं था.

जयललिता भी एक सामान्य से घर में जन्मी थी और उन्हें भी छोटी छोटी ख्वाहिशो के ही सपने आते थे मगर प्रारब्ध उन्हें इस मुकाम तक ले गया जहाँ वे भारतीय इतिहास का एक अमित पन्ना बन गयी. आमतौर पर जयललिता को लोग एक ऐसी जिद्दी औरत के तौर पर जानते हैं जिसने पहले सिनेमा और फिर सियासत तक अपनी सफलता के झंडे गाड़े और इस बीच में आने वाले अपने हर विरोधी को बहुत ही कडाई के साथ किनारे लगा दिया, अपनी आलिशान जिंदगी के कारण सुर्ख़ियों में रहने वाली इस महिला के अन्दर गरीबो के लिए अथाह हमदर्दी थी, मगर जयललिता के इस जिद्दी रूप के उभरने के पीछे उनकी जिंदगी की वो कुछ कड़वी यादे भी थी जिसने जया के व्यक्तित्व में बुनियादी परिवर्तन कर दिए.

तमिल राजनीती के इतिहास में लौह महिला के नाम से जानी जाती जयललिता को वह दिन भी देखना पड़ा था जब 1989 में भरी विधान सभा में उनकी साडी का पल्लू खींच लिया गया. उस वक्त विधानसभा में बजट पेश किया जा रहा था तब कांग्रेस के एक विधायक ने स्पीकर से जया पर लगे किसी आरोप पर बहस की अनुमति मांगी जो खारिज हो गयी . इसके बाद विधानसभा में मारपीट शुरू हो गई जैसे ही जयललिता सदन से निकलने के लिए तैयार हुईं, एक डीएमके सदस्य ने उन्हें रोकने की कोशिश की.उसने उनकी साड़ी इस तरह से खींची कि उनका पल्लू गिर गया. जयललिता भी जमीन पर गिर गईं. इस वाकये के बाद जया ने कसम खाई कि वह सदन में तभी कदम रखेगी, जब वह महिलाओं के लिए सुरक्षित बनेगा.इसके बाद जयललिता ने सदन जाना छोड़ दिया और फिर बतौर मुख्यमंत्री ही सदन में वापसी की.

शुरूआती राजनीती में चमक दमक दिखने वाली जयललिता ने खुद की शान शौकत हमेशा बरकारा राखी मगर गरीबो के लिए उन्होंने कई ऐसी योजनाये शुरू की जिसने उन्हें लगभग अपराजेय बना दिया. हालिया लोकसभा चुनावो में नरेन्द्र मोदी की लहर को जाया के करिश्में ने तमिलनाडु तक नहीं पहुँचने दिया.हर महीने 20 किलो चावल देने के जया के फैसले का अर्थशास्त्रियों ने खूब विरोध किया मगर उपहारों की राजनीती जयललिता ने नहीं रोकी. कभी महिलाओं को मिक्सी तो कभी गरीबो को एलईडी टीवी और उसके बाद “अम्मा” कैंटीन ने उन्हें गरीबो का मसीहा बना दिया.

1978 में तमिल पत्रिका कुमुदम में जयललिता ने अपनी जिंदगी के कुछ ऐसे राज खोले थे जो उनके बदलाव का बायस बने. हांलाकि तब तक जया सियासी गलियारे से बहुत दूर थी. जया ने बताया था कि कैसे उनकी दोस्त के ब्वॉयफ्रेंड के कारण उनकी बहुत बदनामी हुई थी. वह लड़की जया की पड़ोसी थी, जिससे उनकी दोस्ती हो गई थी. लड़की का ब्वॉयफ्रेंड उनके बगल वाले फ्लैट में रहता था. जया दोनों के बीच मिडएटर का काम करती थी. मोहल्ले में हल्ला मचने के बाद उस दोस्त की मां ने जयललिता पर ही बदचलन होने के आरोप लगा दिया.

जयललिता पर लिखी गयी एक किताब “अम्मा” भी उनकी जिंदगी के कई राज खोलती है. जयललिता के एक बयान ने कर्णाटक में तूफ़ान मचा दिया था जब एक इंटरव्यू में जया ने कहा कि मैं खुद को कर्नाटक की नहीं, तमिल मानती हूं, क्योंकि मेरी मां तमिलनाडु से हैं. इस बयान पर कर्नाटक के कुछ राजनीतिक संगठन भड़क गए. मैसूर में जया की पहली फिल्म की शूटिंग चल रही थी. भीड़ वहां पहुंची, जया को गालियां बकने लगी इसके बाद जया ने कन्नड़ भाषा में कहा ‘मैं तमिल हूं और वही रहूंगी, अब जाओ यहां से मैं माफी नहीं मांगूंगी.

जयललिता के मूल्याङ्कन के कई पहलू हो सकते हैं. कई उनके अन्दर एक तानाशाह देखते हैं तो कई मसीहा, और कुछ भ्रष्टाचारी तो कुछ पाने विरोधियों को नेस्तनाबूत करने वाली जिद्दी औरत मगर बतौर मुख्यमंत्री जेल जाने वाली पहली शख्स के दाग लगाने के बावजूद जयललिता की लोकप्रियता पर कोई सवाल नहीं उठा सकता.

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