Breaking News
  • Breaking News Will Appear Here

100 साल बाद इस गणेश चतुर्थी पर बनेगा अद्भुत महायोग, जानें पूजा का समय और विधि

 Girish Tiwari |  2016-09-05 03:58:40.0

lord-ganesh


तहलका न्‍यूज ब्‍यूरो
लखनऊ: गणेश चतुर्थी का पर्व पूरे देश में जोर-शोर से मनाया जा रहा है। बुद्धि और ज्ञान के देवता भगवान गणेश की पूजा का यह सबसे बड़ा दिन माना जाता है। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी पर गणेश जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। इस वर्ष भगवान श्रीगणेश का जन्माभिषेक दुरुधरा महायोग में किया जा रहा है।


ज्योतिषियों के अनुसार पांच ग्रहों का दुरुधरा महायोग पिछले सौ वर्षों में नहीं आया है। साथ ही अगले पचास वर्ष में भी यह महायोग नहीं आएगा। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से लेकर अनंत चतुर्दशी के 10 दिन तक गणेश उत्सव मनाया जाता है.


बता दें कि दुरुधरा योग चन्द्रमा से बनता है। कुंडली में चन्द्रमा जिस भाव में होता है, उसके दूसरे व बारहवें भाव में सूर्य को छोड़कर अन्य ग्रह आते हैं तो दुरुधरा योग बनता है। गणेश चतुर्थी पर चन्द्रमा तुला राशि में रहेगा। वहीं बुध, गुरु, शुक्र बारहवें भाव व मंगल तथा शनि द्वितीय भाव में रहेंगे। इस प्रकार पांच ग्रहों से दुरुधरा योग बनेगा। पिछले पचास वर्षों में तीन बार वर्ष 1999, 1959, 1956 में दो-दो ग्रहों से दुरुधरा योग बना है। वृहत्जातक, सारावली ग्रंथ में इसका विशेष उल्लेख किया गया है।


अगर इस दिन की पूजा सही समय और मुहूर्त पर की जाए तो हर मनोकामना की पूर्ति होती है। ऐसा माना जाता है कि गणपति जी का जन्म मध्यकाल में हुआ था, इसलिए उनकी स्थापना इसी काल में होनी चाहिए।


गणेश चतुर्थी पर भद्रा का साया नहीं होने से पूरे दिन गजानन की स्थापना हो सकेगी। ज्योतिर्विद् पं. रामचंद्र शर्मा ने बताया कि तुला राशि का चंद्रमा होने से पाताल लोक की भद्रा होती है। इसका असर पृथ्वी पर नहीं माना जाता। 5 सितंबर को सुबह 8.02 से रात 9.09 बजे तक भद्रा है। शास्त्रों के अनुसार कन्या, तुला, धनु और मकर राशि के चंद्रमा में भद्रा का असर नहीं होता है।


गणेश चतुर्थी पर चंद्रदर्शन निषेध है। इस दिन चंद्रमा के दर्शन से कलंक लगता है। लोग घर से बाहर न निकलें, इसके लिए रात में घरों पर पत्थर फेंकने की प्रथा है। शुभ योग और अभिजित मुहूर्त में गणेशजी की स्थापना से कई लाभ होंगे। सुबह 11.36 से 12.24 तक सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त है। इस दिन सोना-चांदी, बर्तन, प्लॉट-मकान सहित चल-अचल संपत्ति खरीदने से भी लाभ होगा।


करें ऐसे गणपति पूजन
सर्वप्रथम एक शुद्ध मिटटी या किसी धातु से बनी श्री गणेश जी की मूर्ति घर में लाकर स्थापित करें व मूर्ति पर सिंदूर चढ़ाकर षोड्शोपचार से उनका पूजन करना चाहिए तथा दक्षिणा अर्पित करके 21 लडडुओं का भोग लगाएं। इनमें से पांच लडडू गणेश जी की प्रतिमा के पास रखकर शेष ब्राम्हणों में बांट देना चाहिए। गणेश जी की पूजा सायंकाल के समय की जानी चाहिए जो उत्तम है।

Tags:    

  Similar Posts

Share it
Share it
Share it
Top