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बाबा विश्वनाथ की नगरी में प्रकट हुए कान्हा, गंगा बनी कालिंदी

 Anurag Tiwari |  2016-11-03 14:23:42.0

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तहलका न्यूज ब्यूरो

वाराणसी. गुरुवार को बाबा विश्वनाथ की नगरी  में ब्रिजधाम का नजारा था. यह नजारा तुलसी घाट पर देखने को मिला. आज मां गंगा यमुना के अवतार में थी.

गंगा की लहरों पर कालियानाग के फन पर नृत्य मुद्रा में वेणू वादन करते कान्हा को देख चारों ओर वृन्दावन बिहारी लाल की जय हर हर महादेव के उद्घोष से माहौल गूंजायमान हो गया.

नजारा था काशी के लक्खा मेला में गिनती किए जाने वाले तुलसीघाट पर आयोजित विश्वप्रसिद्ध नाग-नथैया मेले का. दोपहर तीन बजे गणपति वंदना के इस आयोजन की शुरुआत हुई. इसके बाद भगवान श्रीकृष्ण और उनके बाल सखा गंगा नदी प्रतीक रूप से यमुना के किनारे कंचुक गेंद खेलते नजर आए. इस दौरान गेंद यमुना के दह में चली जाती है. कहा जाता है कि दह में कालियानाग का वास था, इसके चलते कोई नदी के उस तरफ नही जाना चाहता. भगवान श्रीकृष्ण यमुना में उतरते हैं और गेंद लाने के साथ कालिया नाग का मान-मर्दन कर देते हैं.


सालों से चली आ रही परम्परा के अनुसार काशीनरेश के उत्तराधिकारी महाराज कुवंर अनन्त नारायण सिंह और अनके बेटे रामनगर दुर्ग से गंगा में बड़े स्टीमर के काफिले में तुलसीघाट पहुंचे. उन्होंने स्टीमर में सवार होकर लीला की प्रदक्षिणा कर नज़ारे को देखा.  शाम 4 बजकर चालीस मिनट पर कदम्ब की डाल के उपर चढ़कर कान्हा यमुना रुपी गंगा के दह में कूद जाते हैं. कान्हा जब काफी देर तक नदी से नही निकलते तो वहां मौजूद उनके बालसखा मायूस होकर रोने लगते हैं.

तभी भगवान श्रीकृष्ण कालियानाग का मान मर्दन कर उसके फन पर नृत्य मुद्रा में वेणुवादन करते हुए प्रकट होते है. यह देख गंगा तट पर मौजूद लाखों श्रद्धालुओ और देशी विदेशी पर्यटक भगवान श्रीकृष्ण की जय, हर-हर महादेव के उद्घोष कर माहौल को गुंजायमान कर देते हैं. इसके बाद महाआरती लीला का समापन हुआ. लीला के समापन के बाद परम्परा के अनुसार काशीनरेश के उत्तराधिकारी महाराज कुवंर अनन्त नारायण सिंह ने लीला कमेटी के व्यवस्थापक प्रो. विश्वम्भर नाथ मिश्र को परम्परानुसार सोने की गिन्नी भेंटस्वरुप दी.

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