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आज गाय की पूजा से मिलेगा मनचाहा फल, जानें क्‍यों मनाते हैं गोवर्धन उत्‍सव

 Vikas Tiwari |  2016-10-31 04:49:54.0

govardhan puja


तहलका न्यूज़ ब्यूरो

नई दिल्ली. कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा के दिन पूरे देश में गोवर्धन पूजा का पर्व मनाया जाता है। दीपावली के दूसरे दिन गो पूजा का विशेष महत्‍व होता है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन गाय की पूजा के बाद गाय पालक (गाय की सेवा करने वाला) को गिफ्ट और अन्‍न देना चाहिए। ऐसा करने से घर में सुख समृद्धि आती है। यूपी के वृंदावन और मथुरा में इस दिन गोवर्धन पूजा और अन्‍नकूट उत्‍सव मनाया जाता है।


कैसे शुरू हुई गोवर्धन उत्‍सव 

गोवर्धनलीला के संदर्भ में श्रीकृष्ण की मूलचिंता थी ईश्वर के नाम पर मानवता का शोषण। ब्रज का तत्कालीन समाज तब जल और कृषि में समृद्धि के लिए इंद्र की पूजा करता था। पूजा के नाम पर तब पाखंड रचा जाता। श्रीकृष्ण ने ब्रजवासी जनों से कहा कि वे मुख्यतः ग्राम/वनों में निवास और विचरण करते हैं। अतः उन्हें अपने पर्यावरण का ही पूजन करना चाहिए। यह भी बताया कि वर्षा का जल इंद्र से न आकर वृक्ष, पर्वतों की कृपा से उपलब्ध होता है।


ब्रजवासियों ने पर्यावरण के देवता श्री गोवर्धन को सम्मानित का उत्सव प्रारंभ किया। इस उत्सव का एक और गहरा महत्व है। श्रीकृष्ण ने अपनी लीलाओं के द्वारा भक्ति अर्थात् सेवा को ही प्रमुख साधन स्वीकार किया। अतः उनका यह संकल्प था कि आध्यात्म जगत में भी भक्त की प्रतिष्ठा सर्वोपरि होनी चाहिए।



क्‍यों मनाते हैं गोवर्धन उत्‍सव
एक कथा के अनुसार, ''भगवान श्री कृष्ण ने इंद्र की पूजा को बंद कराकर उसकी जगह गोवर्धन पूजा की शुरुआत की थी। इससे गुस्‍साए इंद्रदेव ने तेज बारिश करा दी। बारिश के पानी से बचने के लिए लोग इधर उधर भागने लगे, लेकिन उन्‍हें छुपने के लिए कोई जगह नहीं मिली। इसके बाद श्री कुष्ण जी ने अपनी छोटी उंगली (कनिष्ठ उंगली) पर गोवर्धन पर्वत को उठा लिया और सभी ब्रजवासी सात दिन तक गोवर्धन पर्वत की शरण मे रहे।


ब्रह्मा जी के समझाने के बाद इंद्रदेव ने मांगी थी माफी
श्री कृष्‍ण के सुदर्शन चक्र के प्रभाव से ब्रजवासियों पर बारिश की एक बूंद भी नहीं पड़ी। आखिरकार ब्रह्मा जी ने इंद्रदेव को समझाया कि पृथ्वी पर श्रीकृष्ण ने जन्म ले लिया है। उनसे तुम्‍हारा वैर लेना ठीक नहीं है। यह बात सुनकर इंद्रदेव अपनी मुर्खता पर बहुत लज्जित हुए और उन्‍होंने भगवान श्रीकृष्ण से माफी मांगी। इसके बाद सातवें दिन श्री कृष्‍ण ने गोवर्धन पर्वत को नीचे रखकर ब्रजवासियों से कहा कि अब हर साल गोवर्धन पूजा कर अन्नकूट का पर्व मनाया जाएगा।


कैसे करें पूजा
गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर जल, मौली, रोली, चावल, फूल, दही और तेल का दीपक जलाकर इसकी पूजा करें। ऐसी मान्‍यता है कि इंद्र के कोप से बचने के लिए गोकुल वासियों ने जब गोवर्धन पर्वत के नीचे शरण ली, तब उन्‍होंने 56 भोग बनाकर श्री कृष्ण को भोग लगाया था। इससे खुश होकर श्री कृष्ण ने आशीर्वाद दिया और कहा इंद्र से डरने की जरूरत नहीं है, वह गोकुल वासियों की हमेशा रक्षा करेंगे।


ऐसे बनाएं अन्नकूट
अन्नकूट बनाने के लिए कई तरह की सब्जियां, दूध और मावे से बने मिष्ठान और चावल का प्रयोग किया जाता है। अन्नकूट में सीजन के अनुसार अन्न, फल और सब्जियों का प्रसाद बनाया जाता है। गोवर्धन पूजा में भगवान कृष्ण के साथ धरती पर अन्न उपजाने में मदद करने वाले सभी देवों जैसे, इंद्र, अग्नि, वृक्ष और जल देवता की भी पूजा की जाती है। गोवर्धन पूजा में इंद्र की पूजा इसलिए होती है, क्योंकि अभिमान चूर होने के बाद इंद्र ने श्री कृष्ण ने माफी मांग ली थी। श्री कृष्ण ने आशीर्वाद स्वरूप गोवर्धन पूजा में इंद्र की पूजा को भी मान्यता दी है।

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