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ACTION में राज्यपाल, भ्रष्टाचार के आरोपी कुलपत‌ि को किया निलंबित

 Vikas Tiwari |  2016-10-05 15:18:47.0

 राज्यपाल राम नाईक

तहलका न्यूज़ ब्यूरो

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के राज्यपाल एवं कुलाधिपति, राज्य विश्वविद्यालय, राम नाईक ने चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर के निलम्बित कुलपति, प्रो0 मुन्ना सिंह की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी हैं । मुन्ना सिंह के विरुद्ध इलाहाबाद उच्च न्यायालय के दो पूर्व न्यायाधीशों न्यायमूर्ति वी0डी0 चतुर्वेदी तथा न्यायमूर्ति वी0सी0 गुप्ता की अध्यक्षता में गठित की गयी दो अलग-अलग जाॅंचों में रिपोर्टें प्राप्त होने पर राज्यपाल/कुलाधिपति द्वारा दिनांक 04.10.2016 को प्रो0 मुन्ना सिंह के विरुद्ध उक्त आदेश पारित किया गया।


दोनों जाॅंचों से सम्बन्धित घटनाक्रम निम्नांकित प्रकार थे: -


 मुन्ना सिंह को दिनांक 23.10.2013 को चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर का कुलपति नियुक्ति किया गया था। इसके पूर्व  मुन्ना सिंह लखनऊ विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग में प्रोफेसर के पद पर नियुक्त थे। चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर के कुलपति पद पर रहते हुए प्रो0 मुन्ना सिंह ने 2014 में विभिन्न संवर्गों के शिक्षकों और कर्मचारियों की नियुक्ति के लिये कई विज्ञापन समाचार पत्रों में प्रकाशित करवाये थे, जिसके बाद गठित की गयी विभिन्न चयन समितियों ने अपनी संस्तुतियाँ उक्त कृषि विश्वविद्यालय के प्रबंध परिषद, जो शिक्षकों एवं कर्मचारियों आदि की नियुक्ति करने वाली संस्था है, को उसके अनुमोदन के लिए प्रेषित किया। परन्तु प्रबंध परिषद की बैठक द्वारा अनुमोदन प्रदान किये जाने से पूर्व ही उक्त कृषि विश्वविद्यालय के 75 शिक्षकों, कर्मचारियों और कतिपय सांसदों ने मुन्ना सिंह के विरूद्ध राज्यपाल को माह नवम्बर व दिसम्बर 2014 में इस आशय की शिकायतें भेजीं कि मुन्ना सिंह द्वारा शिक्षकों और कर्मचारियों की चयन प्रक्रिया के दौरान बडे़ पैमाने पर अनियमिततायें की गयी हैं, निर्धारित मानकों को जानबूझकर कम कर दिया गया है और कई प्रकार से भ्रष्टाचार भी किया गया है।


सहायक प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति के लिये आवेदन किये हुए एक अभ्यर्थी से मुन्ना सिंह की पत्नी वीना सिंह द्वारा उसकी नियुक्ति करा देने का आश्वासन देते हुए दूरभाष पर उससे 10 लाख रूपये की मांग की गयी। दूरभाष पर इस बातचीत को उक्त अभ्यर्थी ने रिकार्ड कर लिया था और उसकी सीडी कुलाधिपति को शिकायती पत्र के साथ सौपी थी।


शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए कुलाधिपति द्वारा अंतरिम आदेश पारित करते हुए प्रो0 मुन्ना सिंह एवं प्रबंध परिषद को चयन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से रोक दिया गया। कुलाधिपति ने उक्त शिकायतों की जाँच हेतु एक प्रारम्भिक जांच समिति गठित की, जिसके अध्यक्ष इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री एस0के0 त्रिपाठी थे और डाॅ0 मिल्खा सिंह औलख, तत्कालीन कुलपति कृषि विश्वविद्यालय, बांदा एवं डाॅ0 अख्तर हसीब, कुलपति नरेन्द्र देव कृषि विश्वविद्यालय, फैजाबाद, उसके सदस्यगण थे।


प्रारम्भिक जांच में  मुन्ना सिंह के विरूद्ध लगाये गये आरोप प्रथमदृष्टया साबित होना पाये गये। प्रारम्भिक जांच आख्या प्राप्त होने पर कुलाधिपति द्वारा दिनांक 01.5.2015 को मुन्ना सिंह को निलम्बित करते हुए उन्हें लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति कार्यालय से सम्बद्ध कर दिया गया तथा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति वी0डी0 चतुर्वेदी की अध्यक्षता में एक तीन-सदस्यीय अंतिम जांच समिति गठित की गई, जिसके सदस्यगण प्रो0 जे0वी0 वैशम्पायन, कुलपति, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर एवं सेवानिवृत्त आई0ए0एस0 अधिकारी श्री रवीन्द्र नाथ उपाध्याय थे।


 मुन्ना सिंह द्वारा अपने निलम्बन आदेश को उच्च न्यायालय इलाहाबाद की लखनऊ पीठ के समक्ष चुनौती देते हुए यह आपत्ति की गयी कि निलम्बन अवधि में उन्हें लखनऊ विश्वविद्यालय से सम्बद्ध करने के बजाय किसी कृषि विश्वविद्यालय से सम्बद्ध किया जाना चाहिए।


उनकी उक्त आपत्ति को देखते हुए कुलाधिपति द्वारा निलम्बन आदेश दिनांक 01.5.2015 को संशोधित करते हुए प्रो0 मुन्ना सिंह को दिनांक 26.05.2015 को सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि विश्वविद्यालय, मेरठ से सम्बद्ध कर दिया गया। उक्त कृषि विश्वविद्यालय, मेरठ में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के बाद प्रो0 मुन्ना सिंह ने वहाॅं अपनी उपस्थिति आगे दर्ज कराना बंद कर दिया।


 मुन्ना सिंह द्वारा लखनऊ विश्वविद्यालय में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने संबंधी कुलाधिपति के पूर्व आदेश दिनांक 01.05.2015 का अनुपालन नहीं किया गया। उच्च न्यायालय इलाहाबाद की लखनऊ न्यायपीठ ने आदेश दिनांक 28.5.2015 पारित करते हुए प्रो0 मुन्ना सिंह के निलम्बन आदेश दिनांक 01.05.2015 का क्रियान्वयन स्थगित करते हुये जांच के दौरान उन्हें अवकाश पर जाने का निर्देश दिया।


कुलाधिपति सचिवालय द्वारा लखनऊ पीठ के उक्त अंतरिम आदेश दिनांक 28.5.2015 के विरूद्ध उच्चतम न्यायालय के समक्ष एस.एल.पी. प्रस्तुत की गयी। उच्चतम न्यायालय ने आदेश दिनांक 21.8.2015 पारित करते हुए लखनऊ पीठ के आदेश दिनांक 28.5.2015 के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी जिससे प्रो0 मुन्ना सिंह पुनः निलम्बित हो गये। अपने निलम्बन एवं जांच के दौरान प्रो0 मुन्ना सिंह द्वारा कुलाधिपति के समक्ष दो बार त्याग-पत्र प्रस्तुत किया गया जिसे कुलाधिपति द्वारा निरस्त कर दिया गया।


 मुन्ना सिंह द्वारा कुलाधिपति के आदेशों दिनांक 01.05.2015 व 26.05.2015, जिसके द्वारा पहले उन्हें लखनऊ विश्वविद्यालय से एवं उसके बाद कृषि विश्वविद्यालय, मेरठ से सम्बद्ध किया गया था, में अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराने और कुलाधिपति के उक्त आदेशों की अवहेलना करने सम्बन्धी उनके कदाचार की जाॅंच हेतु कुलाधिपति द्वारा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति वी0सी0 गुप्ता को जांच अधिकारी नामित करते हुए एक नई अन्तिम जाॅंच बैठायी गयी जिसमें  जाॅंच के बाद मुन्ना सिंह कुलाधिपति के उक्त आदेशों की अवहेलना के लिए भी दोषी पाये गये।


न्यायमूर्ति वी0डी0 चतुर्वेदी की अध्यक्षता वाली जांच समिति ने प्रो0 मुन्ना सिंह की पत्नी द्वारा शिक्षक पद पर नियुक्ति के लिए प्रत्याशी से 10 लाख रूपये की मांग करते हुए रिकार्ड की गयी सी0डी0 की उनकी आवाज से मिलान करने के लिए उनकी आवाज का नमूना लेने हेतु जाॅंच समिति के समक्ष उपस्थित आने के लिए नोटिस भेजी परन्तु जाॅंच समिति के समक्ष उपस्थित होने से पूर्व ही प्रो0 मुन्ना सिंह की पत्नी श्रीमती वीना सिंह ने आत्महत्या कर ली।


कुलाधिपति द्वारा गठित दोनो ही जांचों में प्रो0 मुन्ना सिंह को उनके विरूद्ध लगाये गये आरोपों का दोषी पाया गया। न्यायमूर्ति वी0डी0 चतुर्वेदी एवं न्यायमूर्ति वी0सी0 गुप्ता की अध्यक्षता वाली जांच समितियों से जाॅंच रिपोर्टें प्राप्त हो जाने पर कुलाधिपति द्वारा जाॅंच रिपोर्टों की प्रतियाँ प्रो0 मुन्ना सिंह को पे्रषित कर उनकी आपत्तियाॅं मांगी गयी और उन्हें सुनवाई का पूरा अवसर प्रदान किया गया।


कुलाधिपति द्वारा मुन्ना सिंह को व्यक्तिगत रूप से भी सुना गया। सुनवाई के दौरान  मुन्ना सिंह द्वारा कुलाधिपति के समक्ष चयन प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं के सम्बन्ध में तथा उनके आदेशों के अनुपालन में लखनऊ विश्वविद्यालय एवं कृषि विश्वविद्यालय, मेरठ में अपनी उपस्थिति की रिपोर्ट दर्ज नहीं कराने के सम्बन्ध में क्षमा याचना करते हुए पश्चाताप व्यक्त किया गया और कुलाधिपति को अपनी पत्नी की आत्महत्या के तथ्य से अवगत कराते हुए अपने ऊपर अपने दो पुत्रों, जो क्रमशः आस्टेªलिया व भारत में बी.टेक. एवं काॅलेज स्तर की पढ़ाई कर रहे हैं, को भावनात्मक एवं आर्थिक रूप से सहारा देने का दायित्व अपने अकेले के ऊपर होने के बारे में भी बताया गया।


कृृषि विश्वविद्यालय, कानपुर के कुलपति के रूप में प्रो0 मुन्ना सिंह का तीन वर्ष का कार्यकाल आगामी दिनांक 23.10.2016 को समाप्त हो रहा है। लखनऊ विश्वविद्यालय में मुन्ना सिंह की सेवा अभी भी आठ वर्ष शेष है।


मुन्ना सिंह की पत्नी द्वारा आत्महत्या कर लेने तथा उनके दोनों पुत्रों को भावनात्मक एवं आर्थिक रूप से सहारा देने का दायित्व अकेले प्रो0 मुन्ना सिंह पर होने के तथ्यों को विचारगत करते हुए कुलाधिपति द्वारा मुन्ना सिंह के प्रकरण में मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उन्हें कुलपति के पद से पदच्युत नहीं करते हुए उन्हें लखनऊ विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के पद पर अपना शेष कार्यकाल पूरा करने का अवसर प्रदान करने का निर्णय लिया गया और आदेश दिनांक 04.10.2016 द्वारा चन्द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर के कुलपति के रूप में प्रो0 मुन्ना सिंह की सेवायें तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गयीं।

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