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यूपी के 6 जिलों के 154 गांव रोज पीते हैं ज़हर

 Anurag Tiwari |  2016-08-20 03:43:37.0

[caption id="attachment_104795" align="aligncenter" width="1024"]Contaminatwed Water, Western UP प्रतीकात्मक चित्र[/caption]

बागपत. अगर आप वेस्ट यूपी के इन 6 जिलों में रहते हैं तो आपको अपने स्वास्थ्य को लेकर थोड़ा एक्स्ट्रा अलर्ट रहना पड़ेगा। इन जिलों में शहर तो शार गाँव का पानी भी जहरीला हो चुका है। हालता यह है कि इन गाँवों में रहने वाले किसी न किसी जानलेवा रोग से पीड़ित हैं ।

वेस्ट यूपी के छह जनपदों के 154 गांवों का पानी काफी जहरीला पाया गया है। बागपत में सबसे ज्यादा गांवों का पानी जहरीला मिला है और पानी जहरीला होने के कारण ही लोगों में सबसे ज्यादा बीमारी फैल रही। इसी के कारण कैंसर की बीमारी होने के कारण उनकी मौत हो रही। वेस्ट यूपी के छह जनपदों के 345 हैंडपंपों का पानी जहरीला पाया गया है, जिससे एनजीटी ने सभी हैंडपंपों पर लाल निशान लगाने के आदेश दे दिए, ताकि लोगों को फैलने वाली बीमारियों से बचाया जा सके। बागपत, शामली, मेरठ, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर व गाजियाबाद के पानी की टीम ने जांच की गयी थी, क्योंकि इनके गांव हिंडन व यमुना नदी किनारे बसे हुए है, जिसमें फैक्ट्रियों व चीनी मिलों का प्रदूषित पानी जाने के कारण पानी जहरीला हो जाता है।


अब तो वेस्ट यूपी के छह जनपदों का पानी इतना जहरीला हो गया कि इसका पानी पीने योग्य नहीं है। यदि कोई इस पानी को पीता है तो वह बीमारियों की चपेट में आकर जान गंवा देता है। चीनी मिलों व फैक्ट्री का प्रदूषित पानी को यमुना नदी व हिंडन नदी में छोड़ा जाता है, जिससे इसका पानी जहरीला हो गया है। प्रशासन भी इनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कोई सख्त कदम नहीं उठा पा रहा है। प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही के कारण ही लोगों की जान खतरे में पड़ती जा रही है, जिससे वह खतरनाक बीमारी कैंसर, टीबी आदि की चपेट में आ गये है।

बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मेरठ व गाजियाबाद जनपदों की जांच एनजीटी टीम के सदस्यों ने की तो यह सच्चाई सामने आयी। इन जनपदों के 154 गांवों का पानी जहरीला मिला, जिसमें सबसे ज्यादा गांव बागपत के प्रदूषित मिले है। बागपत जनपद के करीब 51 जनपदों के हैंडपंपों का पानी पूरी तरह से प्रदूषित पाया गया है, जहां का पानी पीने से लोगों की बीमारियों की चपेट में आ रहे है। इन जनपदों के 345 हैंडपंपों का पानी जहरीला है, जिसपर लाल निशान लगाकर लोगों को पानी पीने से रोकने के लिए कहा गया है, ताकि वह जहरीला पानी पीकर अपनी जान को खतरे में न डाल सके। यह सभी गांव यमुना नदी व हिंडन नदी के किनारे बसे हुए है, जिससे इनका पानी नीचे-नीचे हैंडपंपों को प्रदूषित करता जा रहा है। एनजीटी टीम की रिपोर्ट के बाद प्रदेश के मुख्य सचिव ने जनपदों के डीएम को पत्र लिखकर सभी हैंडपंपों की दोबारा जांच कराकर सील करने के आदेश दिए है और इसके प्रति किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने की हिदायत दी।

टीम करेगी पानी की जांच

मुख्य सचिव ने आदेश दिए है कि पानी की जांच करने के लिए टीम का गठन किया जाए। टीम में प्रशासनिक विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, जल निगम के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग, ग्राम्य विकास विभाग, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त टीम का गठन करके पानी की जांच कर लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए, ताकि उनको किसी भी प्रकार की हानि न पहुंच सके।

पहुँचाया जाएगा पीने का पानी

मुख्य सचिव ने कहा कि यदि किसी गांव के सभी हैंडपंप प्रदूषित है तो वहां पर टैंकरों से पानी पहुंचाया जाए, ताकि किसी भी प्रकार से ग्रामीणों को पानी के लिए परेशानी न उठानी पड़े। इसलिए इसकी व्यवस्था पहले ही कर ली जाए।

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