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GST बिल पास, जानिए कैसे लोगों की जिंदगी करेगा आसान

 Abhishek Tripathi |  2016-08-04 02:24:59.0

GST_billतहलका न्यूज ब्यूरो
नई दिल्ली. राज्यसभा में वित्तमंत्री अरुण जेटली ने जीएसटी बिल पेश कर दिया। इसे पेश करते समय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि संसद में जीएसटी को 2006 में पहली बार रखा गया था। राज्‍यों की वित्‍त मंत्रियों की कमेटी ने अपने सुझाव दिए। सिलेक्‍ट कमेटी के कुछ सुझावों को शामिल किया गया है। पूरे देश में एक टैक्‍स सिस्‍टम होगा। जीएसटी से भारत एक समान मार्केट में बदल जाएगा, सभी पार्टियों से बात की गई, कई तरह के सुझाव दिए गए। सहमति बनाने की पूरी कोशिश की गई। जीएसटी से पूरे देश में बड़ा बदलाव आएगा।


जीएसटी से रुकेगी टैक्स चोरी
उनके बाद बीजेपी के भूपेंद्र यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मानना है कि भारत के विकास में राज्यों को मिलकर काम करना होगा और जीएसटी के जरिए हम भारत को 'एक समान बाज़ार' के रूप में पेश कर पाएंगे। इसके बाद हम 29 अलग-अलग बाज़ारों से एक बाज़ार में तब्दील हो जाएंगे, जो हमारी ताकत होगा। हमारे बिल में आम आदमी द्वारा दिए जाने वाले टैक्स को सरल कर दिया गया है।


इस वजह से सपा ने किया जीएसटी का सपोर्ट
उनके बाद समाजवादी पार्टी के नेता नरेश अग्रवाल ने कहा कि उनकी पार्टी नहीं चाहते हुए भी जीएसटी बिल का समर्थन कर रही है, क्योंकि वे नहीं चाहते कि लोग उन्हें भारत के आर्थिक विकास की राह का रोड़ा समझें। उन्होंने कहा कि सरकार टैक्स की अधिकतम सीमा को निश्चित कर दिया जाना, इसिलिए स्वीकार नहीं कर रही है, क्योंकि उसका इरादा टैक्स की दर को बढ़ाने का है।


जीएसटी बिल पर चर्चा के दौरान मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सीताराम येचुरी ने कहा, क्या हम चाहते हैं कि केंद्र के पास राज्य भीख का कटोरा लेकर जाएं। देश का संघीय ढांचा खत्म नहीं होना चाहिए। हमारे संविधान की संप्रूभता लोग हैं। तो अगर लोकसभा से पारित बिल अगर राज्यसभा में लोगों के पक्ष में नहीं पाया गया, तो हम इसके खिलाफ हैं। वहीं, जीएसटी पर गठित राज्यसभा की प्रवर समिति में बीएसपी के प्रतिनिधि रहे सतीश चंद्र मिश्रा ने कहा, 'वस्तु एवं सेवा कर को बड़ी शक्तियां दी गई हैं। इसमें कानून में बदलाव करने की राज्य की शक्तियां छीन ली गई हैं, जिससे लोग प्रभावित होंगे।'


जीएसटी क्या है?
वस्तु और सेवाओं से जुड़ा टैक्स
पूरे देश भर में एक ही दर लागू
अलग-अलग करों से छुटकारा
राज्यों को मिलेगा टैक्स में हिस्सा
शुरुआती सालों में राज्यों को छूट
करों के वसूली में आसानी
जीडीपी बढ़ने की संभावना
कारोबार में होगी सुविधा
आर्थिक सुधारों के लिए ज़रूरी
आज़ादी के बाद सबसे बड़ा टैक्स सुधार
यूपीए सरकार का बड़ा एजेंडा


GST कहां से कहां तक?
2000: वाजपेयी सरकार ने कमेटी बनाई
2004: केलकर टास्क फोर्स GST का सुझाव दिया
2006: चिदंबरम ने अप्रैल,2010 से लागू का प्रस्ताव रखा
केंद्र और राज्य के बीच टैक्स की साझेदारी
2010: प्रणब दा ने अप्रैल 2011 से लागू करने का ऐलान किया
यूपीए सरकार टैक्स सुधार लागू करने में नाकाम
2011: 115वां संविधान संशोधन विधेयक पेश
विधेयक स्टैंडिंग कमेटी को भेजा गया
2013: संसद में स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट पेश
यूपीए सरकार पास कराने में नाकाम रही
गुजरात समेत बीजेपी राज्यों का विरोध
2014: सत्ता में आई बीजेपी ने जोर लगाया
122वां संविधान संशोधन बिल पेश हुआ
कांग्रेस की स्टैंडिंग कमेटी को भेजने की मांग
2015: जेटली का अप्रैल,2016 से लागू करने का ऐलान

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