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आज है BJP के 'लक्ष्मण' का जन्मदिन, ऐसी रही 2 से 282 सीटों की यात्रा

 Abhishek Tripathi |  2016-11-08 06:15:25.0

lk_advaniतहलका न्यूज ब्यूरो
नई दिल्ली. भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के भीष्म पितामाह कहे जाने वाले लाल कृष्ण आडवाणी का आज जन्मदिन है। उनका जन्म 8 नवंबर 1927 को हुआ था। वह आज 88 साल के हो गए हैं। लाल कृष्ण आडवाणी बीजेपी के कद्दावर नेताओं में से एक हैं। वह बीजेपी के ऐसा नेता है, जिन्होंने पार्टी को पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है1

साल 1942 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से अपने करियर की शुरुआत करने वाले आडवाणी बीजेपी के अध्यक्ष से लेकर प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार तक बने। बीजेपी के उत्थान में आडवाणी की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है। जनसंघ से अलग होने के बाद बीजेपी का निर्माण हुआ।

राम मंदिर को दिया समर्थन


लाल कृष्ण आडवाणी पार्टी के पहले अध्यक्ष बनाए गए। कहा जाता है कि उस वक्त अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में बीजेपी ने हिंदुत्व के प्रति उदार दृष्टिकोण अपनाया, लेकिन 1984 के चुनावों में उसका खास फायदा नहीं मिला और बीजेपी ने केवल दो सीटें जीतीं।

इसके बाद लाल कृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में बीजेपी ने विश्व हिंदू परिषद के साथ रामजन्मभूमि को चुनावी मुद्दा बनाया और चुनावी घोषणापत्र में जगह दी। इससे पहले वर्ष 1980 में विश्व हिंदू परिषद ने अयोध्या में राम मंदिर बनाने को लेकर अभियान चलाया था। इसके बाद वर्ष 1989 में हुए चुनावों में बीजेपी 86 सीटें जीतकर आई और वीपी सिंह के नेशनल फ्रंट के साथ सरकार बनाई।

निकाली रथ यात्रा
आडवाणी ने वर्ष 1990 कारसेवकों और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने के लिए रथ यात्रा निकाली। उन्होंने कारसेवकों को बाबरी मस्जिद में पूजा करने के लिए इकट्ठा किया। इसे रथयात्रा में गुजरात में सोमनाथ से लेकर उत्तर भारत के बड़े हिस्से को कवर किया गया। इस दौरान बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने रथ यात्रा को सांप्रदायिक करार देते हुए आडवाणी को बिहार में प्रवेश करने से रोक दिया। इस दौरान उन्हें हिरासत में भी लिया गया।

इसके बाद बीजेपी ने वीपी. सिंह के नेशनल फ्रंट से समर्थन वापस लिया और चुनाव में कूद गई। इन चुनावों में बीजेपी 120 सीटों के साथ दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। इसके बाद अयोध्या में बाबरी मस्जिद गिराई गई और सांप्रदायिक दंगे भड़के। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान बीजेपी हिंदुत्व का चेहरा बनकर उभरी हो और उस समय देश की सबसे बड़ी पार्टी कांग्रेस के लिए चुनौती बन गई। एक समय ऐसा भी था जब वाजपेयी को राम और आडवाणी को लक्ष्मण कहा जाता था।

लाल कृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में वर्ष 1996 के चुनावों में बीजेपी ने 161 सीटें जीतीं और सत्ता में आई। अटल बिहारी वाजपेयी इस सरकार में प्रधानमंत्री बने। हालांकि, ये सरकार महज 13 दिन ही चल सकी। इसके बाद 1998 में हुए चुनावों में बीजेपी फिर से सत्ता में आई और वाजपेयी के नेतृत्व में पूरे पांच साल सत्ता में बनी रही। आगे हुए चुनावों में बीजेपी के वोट घटते-बढ़ते रहे और साल 2014 में वह 282 सीटों के साथ पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में लौटी।

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