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राजनीतिक पार्टीयों को कोई छूट नहीं, पुराने नोटों में चंदा लेना गलत: जेटली

 Girish Tiwari |  2016-12-18 02:48:59.0

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तहलका न्यूज़ ब्यूरो


नई दिल्ली. राजनीतिक पार्टियों को टैक्ट छूट पर संदेह की स्थिति पर वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सफाई दी है. उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को कोई नई छूट नहीं दी गई है.


इसके अलावा जेटली ने कहा कि कोई भी दल 500 एवं 1000 रुपये के पुराने नोटों में चंदा स्वीकार नहीं कर सकते क्योंकि उन्हें पिछले महीने ही अस्वीकार कर दिया गया था. पुराने नोट लेने वाले दल कानून का उल्लंघन करेंगे. ऐसा करने वाला कोई भी दल कानून का उल्लंघन करेगा.


वित्त मंत्री ने साफ किया कि आईटी ऐक्ट, 1961 के सेक्शन 13ए के तहत राजनीतिक दलों को अपने अकाउंट का ऑडिट, खर्च और आय की जानकारी और बैलेंस शीट जमा करानी होती हैं. इसके प्रावधानों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.


जेटली ने कहा कि पंजीकृत राजनीतिक दलों की आय पर ऐतिहासिक रूप से दी जाने वाली सशर्त टैक्स छूट जारी है. पीएम नरेंद्र मोदी के नोटबंदी की घोषणा के बाद या एनडीए सरकार ने पिछले ढाई वर्षों में कोई नई छूट या रियायत नहीं दी है.


राजनीतिक दल बैंकों को 30 दिसंबर तक पुराने नोटों में रखी गई नकदी जमा करा सकते है, बशर्ते वे संतोषजनक रूप से आय के स्रोत का संतोषजनक उत्तर दें और उनकी खाता पुस्तिका आठ नवंबर से पहले की प्रविष्टियां दर्शाती हो.


अगर राजनीतिक पार्टियों के रिकॉर्ड में कोई असंगति पाई जाती है तो आयकर अधिकारी अन्य लोगों की तरह उनसे भी पूछताछ कर सकते हैं.


केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने शनिवार को कहा कि उन्हें किसी तरह की छूट नहीं है और आयकर अधिकारी उनसे उसी तरह पूछताछ कर सकते हैं जैसे किसी अन्य से.


राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक पार्टियां 500 और 1000 रूपए के नोटों में चंदा नहीं ले सकतीं, क्योंकि ऐसे नोट अब वैध नहीं रह गए हैं.


अधिया ने कई ट्वीट करके कहा कि राजनीतिक पार्टियों को कथित छूट से जुड़ी खबरें गलत और भ्रामक हैं. नोटबंदी और कर संशोधन कानून, 2016 लाने के बाद राजनीतिक पार्टियों को कोई छूट या विशेष सुविधा नहीं दी गई है.


राजनीतिक पार्टियों की आय और चंदे आईटी ऐक्ट, 1961 के सेक्शन 13ए के दायरे में आती है. पंजीकृत राजनीतिक दलों को दिए जाने वाले चंदे को कुछ शर्तों के साथ टैक्स छूट प्राप्त है.


जिसमें खातों की आडिट व 20000 रुपये से अधिक के सभी चंदे टैक्स दायरे में शामिल है. राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे के बारे में रिपोर्ट निवार्चन आयोग को देनी होती है.


नोटबंदी के बाद डिजिटल भुगतान पर जोर दे रही केंद्र सरकार ने शनिवार को संकेत दिए कि बंद किए गए 500 और हजार रुपये के नोटों के स्थान पर समान राशि की नई मुद्रा जारी नहीं की जाएगी.


अरुण जेटली ने कहा कि 15.44 लाख करोड़ रुपये के पुराने अमान्य नोटों के बराबर नए नोट जारी नहीं किए जाएंगे. इस अंतर की पूर्ति डिजिटल मुद्रा करेगी. जेटली ने कहा कि नोटबंदी की इस पहल के पीछे यह प्रयास रहा है कि चलन में कम नगदी को ही रखा जाए.


हमारा यह सोचा-समझा प्रयास है कि बाकी अंतर को डिजिटल मुद्रा के जरिए पूरा किया जाए. सरकार ने आठ नवंबर को अचानक जब नोटबंदी की घोषणा की थी. तब 500 रूपये के 171650 करोड़ और 1000 रूपये के 68580 करोड़ नोट चलन में थे.

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