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नेपाल व उत्तराखंड में भारी बारिश से उप्र की नदियां उफनाईं

 Sabahat Vijeta |  2016-08-01 17:46:38.0

up river
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के कई क्षेत्रों में बारिश का दौर जारी है, उधर नेपाल और उत्तराखंड में हो रही भारी बारिश के कारण उफनाई नदियों ने प्रदेश के सात जिलों में कहर बरपा रखा है। कई क्षेत्रों में हालात बेकाबू हो रहे हैं। नेपाल और उत्तराखंड में हो रही बारिश का प्रभाव घाघरा, राप्ती के उफनाने के तौर पर सामने आ रहा है। बस्ती में घाघरा की बाढ़ से 70 गांव प्रभावित हैं। नदी यहां खतरे के निशान से 24 सेंटमीटर ऊपर है।


बनबसा बैराज से कई चरणों में छोड़े गए पानी से उफनाई घाघरा नदी गोंडा में खतरे के निशान से 65 सेंटीमीटर बह रही थी। जिले के 50 गांव बाढ़ के पानी से घिरे हैं। बलरामपुर में राप्ती नदी एवं पहाड़ी नालों के उफनाने से करीब 162 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं, हालांकि बहराइच में शारदा अब खतरे के निशान के नीचे बह रही है। नदी में कटान के चलते दर्जनों गांव में बाढ़ का खतरा गहराने लगा है।


घाघरा नदी की बाढ़ से 70 गांव प्रभावित


बाराबंकी में घाघरा के उफान से सैकड़ों गांव प्रभावित हैं, वहीं सिद्धार्थनगर में हिलोरें मारती बूढ़ी राप्ती तटवर्ती इलाकों में बसे ग्रामीणों को डरा रही है। सिद्धार्थनगर जिले के लगभग 300 गांवों में बाढ़ का पानी घुसने से लोगों का बुरा हाल है।


बस्ती जिले में घाघरा नदी अब भी खतरे के निशान से 24 सेंटीमीटर ऊपर है। नदी का रुख स्थिर है। घाघरा नदी की बाढ़ से जिले के 70 गांव प्रभावित हैं। बाढ़ के पानी से 19 गांव टापू बने हुए हैं। वैसे घाघरा नदी खतरे के बिंदु 92.730 के बदले 92.970 पर बह रही है। नदी का रुख स्थिर है, लेकिन कटान में कोई कमी नहीं आई है। नदी की बाढ़ से जिले की 29 हजार से अधिक जनसंख्या प्रभावित है। छह हजार हेक्टेयर से अधिक फसल बर्बाद हो रही है।


घाघरा नदी का दबाव बीडी बंधे पर बना हुआ है। नदी सहजौरा पाठक, बाघानाला, फूलडीह, मुंडेरीपुर, संदलपुर, केशवपुर, भरथापुर, केशवपुरुव पड़ाव के पास तेजी से कटान कर रही है।


दो हजार हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि जलमग्न


गोंडा से मिली जानकारी के अनुसार, तेज बरसात और बनबसा बैराज से कई चरणों में छोड़े गए पानी से उफनाई घाघरा नदी खतरे के निशान से 65 सेंटीमीटर और कोपा में सरयू नदी के लाल निशान से 26 सेंटीमीटर ऊपर बहने से कर्नलगंज एवं तरबगंज तहसील क्षेत्रों के लगभग 157 गांवों में बसी करीब दो लाख आबादी पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।


जिले के 50 गांव बाढ़ के पानी से घिरे हैं। दो हजार हेक्टयर कृषि योग्य भूमि जलमग्न है। दोनों तहसीलों में बने चरसड़ी, आदमपुर रेवली, भिखारीपुर-सकरौर एवं धौरहरा-परसपुर तटबंधों के कटने का खतरा बना हुआ है। बलरामपुर जिले में राप्ती नदी एवं पहाड़ी नालों के उफनाने से करीब 162 गांव बाढ़ की चपेट में आ गए हैं।


बाढ़ से अब तक तीन लोगों की मौत


आपदा प्रबंधन सूत्रों के अनुसार, बलरामपुर भारत-नेपाल सीमा से सटे होने के कारण नेपाल के चकरधड़ी बैराज से छोड़े गए पानी तथा पहाड़ों पर हो रही तेज बारिश से राप्ती नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 50 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। राप्ती भी लाल निशान को पार कर 105 से 115 सेंटीमीटर पर पहुंच गई है।


बाढ़ से अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है। मृतक के परिजनों को सहायता राशि दे दी गई है। बहराइच में शारदा नदी का जलस्तर घटने लगा है और अब खतरे के निशान के नीचे है। गिरजा बैराज (घाघरा) में नदी खतरे के निशान 136.80 मीटर के सापेक्ष 135.20 मीटर पर बह रही है।


गोपिया बैराज (सरयू) का डिस्चार्ज 865 क्यूसेक है, जबकि जलस्तर खतरे के निशान 133.50 मीटर के सापेक्ष 101.50 मीटर है। घाघरा नदी शारदा बैराज (शारदा), वनबसा बैराज (शारदा) पर खतरे के निशान से नीचे बह रही है, जबकि एल्गिन ब्रिज और घूर देवी (घाघरा) के पास अब भी खतरे के निशान से ऊपर है।

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