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हाईकोर्ट ने कहा- डॉक्टरों की सैलरी से मृतकों के परिजनों को मुआवजा दिया जाए

 Abhishek Tripathi |  2016-06-04 13:50:07.0

a1तहलका न्यूज ब्यूरो
लखनऊ. हड़ताली जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल की वजह से केजीएमयू में मरीजों की मौत पर हाईकोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि डॉक्टरों के इलाज से इन्कार करने से जान गंवा चुके बेकसूर मरीजों के परिवारीजनों को 25-25 लाख रुपये मुआवजा दिया जाय।


मुआवजे की रकम 4 दिन तक हड़ताल में शामिल रहे डॉक्टरों के वेतन और भत्तों से वसूला जाए। हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने प्रदेश सरकार को आदेश दिया है कि वह सात दिन के अंदर अपने न्यायिक अधिकारियों की एक हाई पावर्ड कमेटी बनाए।


यह कमेटी जांच जांच करेगी कि 30 मई से 2 जून 2016 के बीच हड़ताल की वजह से इलाज से न मिलने से कितने मरीजों की मौत हुई है। रिपोर्ट दो महीने में देनी होगी। जस्टिस सुधीर अग्रवाल और जस्टिस राकेश श्रीवास्तव की खंडपीठ ने एक याचिका का बृहस्पतिवार को निस्तारण करते हुए यह आदेश दिया। खंडपीठ ने सूबे के सभी मेडिकल कॉलेजों के प्रिंसिपलों और केजीएमयू के वीसी प्रो. रविकांत को निर्देश किया कि वे उन डॉक्टरों की पहचान करें, जो हड़ताल पर गए या अपनी ड्यूटी से अनुपस्थित रहे या फिर विरोध की वजह से मरीजों का इलाज नहीं किया।


अदालत ने कहा कि वे इन सभी को दस्तावेजों में चेतावनी भेजेंगे और साथ ही उनके वेतन, भत्ते व मानदेय में डॉक्टरों के मामले के अनुसार कटौती करेंगे। जितने दिन इन डॉक्टरों ने काम नहीं उनकी ट्रेनिंग का उतना समय भी बढ़ाया जाएगा।

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