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हिमांशु वाजपेयी ने सुनाई अली अकबर की शहादत की दास्ताँ

 Sabahat Vijeta |  2016-11-22 15:33:15.0

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तहलका न्यूज़ ब्यूरो


लखनऊ. वर्धा यूनीवर्सिटी के रिसर्च स्कालर हिमांशु वाजपेयी ने आज नरही स्थित उर्दू मीडिया सेन्टर में हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के बेटे हज़रत अली अकबर की शहादत को इस अंदाज़ में पेश किया कि सुनने वाले फूट-फूट कर रो पड़े.


हिमांशु वाजपेयी ने मुहर्रम को किसी मज़हब ख़ास का हिस्सा मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह तो हमारी तहजीब का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि लखनऊ के ज़िक्र के बगैर तहजीब को ठीक से नहीं समझा जा सकता. उन्होंने कहा कि तहजीब और सेक्युलरिज्म को समझने के लिये लखनऊ को समझना ज़रूरी है.


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उन्होंने कहा कि सेक्युलरिज्म को मानने से इनकार करने वाला अपनी आज़ादी का सम्मान नहीं करता है. उन्होंने बताया कि अवध के बादशाह वाजिद अली शाह ने गणेश और कृष्ण पर ठुमरियां लिखीं क्योंकि वह सेक्युलरिज्म को मानते थे.


हिमांशु ने कहा कि मैंने शायरी सीखने के लिये कर्बला को पढ़ा. हिमांशु कहानियाँ सुनाया करते हैं. कहानियों के विषय अलग-अलग होते हैं. कहानी सुनाने का अंदाज़ ऐसा होता है कि सुनने वाला खुद को उस कहानी का हिस्सा मानने लगता है. आज उन्होंने हजरत इमाम हुसैन के बेटे हजरत अली अकबर अलैहिस्सलाम की शहादत को कहानी की तरह से सुनाया. कहानी भी ऐसी कि सुनने वालों की भी आँखें नम हुई और खुद सुनाने वाले की भी नम हो गई.


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उन्होंने बताया कि इमाम हुसैन के 18 साल के बेटे अली अकबर पैगम्बर-ए-खुदा हजरत मोहम्मद के हमशक्ल थे. वह बहादुर थे. आलिम थे. उनका कोई जोड़ नहीं था. अपने दौर के पढ़े-लिखों से लगातार तबादला-ए-ख्याल किया करते थे.


कर्बला की जंग का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि जब हजरत अब्बास शहीद हो गये. जब हजरत जैनब के दोनों बेटे औन व मोहम्मद अपनी कुर्बानी दे चुके. जब हजरत कासिम अपनी जान लुटा चुके तब अली अकबर ने जंग में जाने की इजाज़त माँगी. इमाम हुसैन ने कहा कि बेटे पर माँ का हक ज्यादा होता है. उनसे इजाज़त मांगो. माँ ने कहा कि तुम्हें फुफी ने पाला है उनसे इजाज़त लो. माँ और फुफी से इजाजत मिल गई तो उन्हें जंग पर जाते वक्त वह कपड़े पहनाये गये जो उनकी शादी के लिये सिलवाये गये थे.


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घर से जवान बेटा इस अंदाज़ में निकला जैसे जनाज़ा निकलता है. हर आँख में आंसू था. सब जानते थे कि जो जंग में गया है वह वापस नहीं लौटा है. 4 साल की बहन हजरत सकीना ने भी कहा कि अगर पानी लेने जा रहे हैं तो रहने दें क्योंकि पानी बहुत बेमुरव्वत है. जो पानी लेने जाता है वह वापस नहीं लौटता है. इमाम हुसैन ने कहा कि मेरे अल्लाह गवाह रहना मैं तेरे पैगम्बर के हमशक्ल को तेरी राह में भेज रहा हूँ.


हजरत अली अकबर ने दुश्मनों पर इस अंदाज़ में हमला किया कि दुश्मनों में भगदड़ मच गई. हर तरफ कोहराम मच गया. उनकी तलवार बिजली की तरह चमक रही थी. अली अकबर को काबू में करना मुश्किल हो गया तो दुश्मन फ़ौज की एक टुकड़ी इमाम हुसैन के खेमे पर हमले के लिये भेजी गई. यह जंग के उसूलों के खिलाफ था. यह बात सब जानते थे मगर दुश्मन भी ऐसे थे जिन्हें उसूलों से कुछ लेना-देना नहीं था. अली अकबर ने अपने खेमे की तरफ जाती फ़ौज की टुकड़ी पर ज़ोरदार हमला किया लेकिन उसी वक्त बाकी फ़ौज ने उन पर पीछे से हमला कर दिया. दोनों तरफ से हुए हमले में उन्हें सँभलने का मौक़ा नहीं मिला. किसी ने तीर मारा. किसी ने तलवार चलाई. किसी ने बरछी से वार किया. अली अकबर शहीद हो गये.


जवान बेटे की शहादत से इमाम हुसैन की कमर टूट गई. वह बेटे के पास पहुंचे तो वह खून में डूबे ख़ाक पर पड़े थे. सीने में बरछी टूट गई थी. ताज़ा खून सीने से बह रहा था. पैगम्बर की शबीह खाक पर एडियाँ रगड़ रही थी.

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