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नोएडा के 'अखलाक' को हिंदू ने दी कब्र की जमीन

 Tahlka News |  2016-05-09 13:18:48.0

a1तहलका न्यूज ब्यूरो
नोएडा. जहां एक तरफ देश में आए दिन हिन्दू-मुस्लिम सांप्रदायिक तनाव की घटनाएं सामने आती हैं। वहीं, कुछ लोग ऐसे भी हैं जो धर्म और जात-पात से ऊपर उठकर मानवता की मिसाल बन जाते हैं। ऐसी ही कुछ मिसाल देखने को मिली नोएडा के इलाहाबास गांव में। यहां के एक हिन्दू परिवार ने अपने मुस्लिम पड़ोसी की मौत के बाद, उसे दफनाने के लिए अपने पुरखों की जमीन दान में दे दी। ये उदहारण ऐसे जिले से सामने आया है, जहां से दादरी कांड के चलते देश में असहिष्णुता का मुद्दा देश-विदेश में चर्चा का कारण बना था।


दफनाने के लिए नहीं मिली जगह 24 घंटे पड़ा रहा शव
मामला नोएडा के इलाहाबास गांव का है। जहां मुस्लिम समुदाय के एक बुजुर्ग का शव 24 घंटे तक इसलिए पड़ा रहा, क्‍योंकि उन्‍हें दफनाने के लिए दो गज जमीन भी नहीं उपलब्ध हो पा रही थी। नोएडा फेज-2 पुलिस के मुताबिक, शनिवार को गांव में रहने वाले 65 वर्षीय महमूद का निधन हो गया था। परिवार वाले उन्हें दफ़नाने के लिए कब्रिस्तान ले गए। जहां महावीर सिंह नामक शख्स ने कब्रिस्तान को अपनी जमीन बताते हुए वहां शव दफनाने को लेकर आपत्ति कर दी। महावीर ने दावा किया कि उसके पूर्वजों ने खाली पड़ी 1200 वर्ग मीटर जमीन को अस्थायी रूप से कब्रिस्तान के रूप में इस्तेमाल करने की इजाजत दे दी थी। महावीर ने अदालत के कागजात दिखाते हुए कहा कि जमीन के मालिकाना हक को लेकर वह कोर्ट में गया था, जहां से उनके पक्ष में फैसला आया था।


24 घंटे तक शव को नहीं नसीब हुई कब्र
महमूद का शव दफनाए जाने की अनुमति न मिलने पर परिजन शव घर वापस ले आए। उसे सुरक्षित रखने के लिए उन्होंने उसे बर्फ की सिल्ली पर रख दिया। घरवालों ने महमूद के शव को 24 घंटे तक बर्फ के सहारे सुरक्षित रखा।


गांव के ही दूसरे शख्स ने दे दी दफनाने को अपनी जमीन
महमूद के रिश्‍तेदार शमीउद्दीन ने बताया कि जब इस मामले की सिटी मैजिस्ट्रेट बच्चू सिंह सहित पुलिस को दे दी गई। मामला आसपास के इलाके तक प्रचारित होने के चलते गांव में भीड़ बढ़ने लगी। इसके चलते गांव में साम्रदायिक तनाव जैसे हालात पैदा हो गए। इसी बीच जब मामले की जानकारी गाँव के ही राजेंद्र प्रधान को लगी तो उन्होंने अपनी 1000 वर्ग मीटर जमीन कब्रिस्तान के लिए मुस्लिम समुदाय को दान करने की घोषणा कर दी। उनके कब्रिस्तान के लिए जमीन दान दिए जाने से मसला सुलझ गया और महमूद के शव को उस जमीन पर बाइज्जत दफ़न कर दिया गया।

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