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समाजवादी पार्टी का ऐतिहासिक सफरनामा, मुलायम कैसे बने नेताजी...!

 Abhishek Tripathi |  2016-11-05 02:54:52.0

mulayam_singh_yadavतहलका न्यूज ब्यूरो
लखनऊ. समाजवादी पार्टी (सपा) आज सिल्वर जुबली समारोह मना रही है। समारोह का आयोजन लखनऊ स्थित जनेश्वर मिश्र पार्क में किया गया है। समारोह में प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव अपना शक्ति प्रदर्शन करेंगे। इस मौके पर देश के कई दिग्गज नेता एक ही मंच पर दिखाई देंगे। आइए हम आपको बताते हैं सपा का सफरनाम कहां से और कैसे शुरू हुआ...


4 अक्टूबर, 1992 को लखनऊ के बेगम हजरत महल पार्क में मुलायम सिंह यादव ने सपा बनाने की घोषणा की। राम मनोहर लोहिया और राज नरायण जैसे समाजवादी विचारधारा के नेताओं की छत्रछाया में राजनीति का ककहरा सीखने वाले मुलायम वैसे तो सपा के गठन से पहले ही यूपी के सीएम बन चुके थे। लेकिन इनकी अपने लोगों द्वारा खड़ी की गई अपनी कोई पार्टी नहीं थी। 1980 के आखिर में वो यूपी में लोक दल के अध्यक्ष बने थे जो बाद में जनता दल का हिस्सा बन गया।


जब कांग्रेस ने गिराई सपा की सरकार
सपा की कहानी मुलायम सिंह के सियासी सफर के साथ-साथ चलती रही। मुलायम 1989 में पहली बार यूपी के सीएम बने। नवंबर 1990 में केंद्र में वीपी सिंह की सरकार गिर गई तो मुलायम सिंह चंद्रशेखर की जनता दल (समाजवादी) में शामिल हो गए और कांग्रेस के समर्थन से सीएम की कुर्सी पर विराजमान रहे। अप्रैल 1991 में कांग्रेस ने समर्थन वापस ले लिया तो मुलायम सिंह की सरकार गिर गई। 1991 में यूपी में मध्यावधि चुनाव हुए जिसमें मुलायम सिंह की पार्टी हार गई और बीजेपी सूबे में सत्ता में आई।


जब मुलायम ने मायावती का समर्थन
साल 1992 में मुलायम सिंह यादव ने जब अपनी पार्टी खड़ी की तो उनके पास बड़ा जनाधार नहीं था। नवंबर 1993 में यूपी में विधानसभा के चुनाव होने थे। सपा मुखिया ने बीजेपी को दोबारा सत्ता में आने से रोकने के लिए बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से गठजोड़ कर लिया। सपा का यह अपना पहला बड़ा प्रयोग था। बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद पैदा हुए सियासी माहौल में मुलायम का यह प्रयोग सफल भी रहा। कांग्रेस और जनता दल के समर्थन से मुलायम सिंह फिर सत्ता में आए और सीएम बने।


कैसे मुलायम बने देश के रक्षा मंत्री
सूबे की राजनीति से बाहर होने के बाद अब मुलायम की नजर केंद्र की राजनीति पर थी। मुलायम को लगा कि अब सपा को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलानी है। मुलायम 1996 में मैनपुरी सीट से लोकसभा का चुनाव लड़े और जीते भी। केंद्र में संयुक्त मोर्चे की सरकार बनी और सपा इस गठजोड़ का हिस्सा। सपा मुखि‍या मुलायम सिंह का नाम प्रधानमंत्री के लिए तय होते-होते रह गया। मुलायम देवगौड़ा सरकार में रक्षा मंत्री बने। हालांकि 1998 में यह सरकार गिर गई और देश में फिर से आम चुनाव हुए।


जब कल्याण सिंह सपा में आए
बाबरी विध्वंस कांड के आरोपियों में से एक कल्याण सिंह को सपा में शामिल किया गया जो बीजेपी में उपेक्षित महसूस कर रहे थे। कल्याण सिंह के सपा में आने से मुलायम के कई साथियों ने पार्टी छोड़ दी जो नेताजी के सियासी सफर में कदम से कदम मिलाकर चले थे। जनेश्वर मिश्र, रामशरण दास और लक्ष्मीकांत वर्मा जैसे दिग्गज समाजवादी नेताओं का निधन हुआ। 2007 के विधानसभा चुनाव में प्रचंड बहुमत से सत्ता में आई बसपा के आक्रामक तौर तरीकों ने समाजवादी पार्टी को कमजोर करने में अहम भूमिका निभाई।

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