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B' DAY: चंदा मांगकर पहली बार विधायक बने थे 'धरती पुत्र' मुलायम

 Abhishek Tripathi |  2016-11-22 04:25:15.0

mulayam_singh_yadavमुलायम सिंह यादव के जन्मदिन पर विशेष: 22 नवंबर को मुलायम सिंह यादव का 77वां जन्मदिन है। इस मौके पर tahlkanews.com उनके खास व्यक्तित्व, और अन्‍य पहलुओं से आपको रूबरू करा रहा है।


लखनऊ. प्रधानमंत्री बनने का मुलायम सिंह यादव का सपना भले ही अधूरा है, लेकिन उन्होंने पहले ही सियासी दाव में सभी को मात दे दी थी। कहा जाता है कि समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया के संपर्क में आने के बाद 1967 में मुलायम सिंह पहली बार संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर जसवंतनगर विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। यह था 60 का दशक, यहीं से मुलायम सिंह ने राजनीति में प्रवेश किया। मुलायम सिंह यादव को 'धरती पुत्र' और 'नेताजी' जैसे उपनामों से भी जाना जाता है।


जसवंतनगर विधानसभा सीट से मुलायम सिंह यादव का विधायक बनना इस यादव परिवार के लिए एक नई कहानी लिख गया। यहीं से मुलायम के सियासत में मजबूत कदम की नींव पड़ी। इसमें सैफई गांव के एक छोटे-से परिवार के देश का सबसे बड़ा सियासी परिवार बनने के सफर की शुरुआत हुई। इसके पहले इस परिवार का कोई सदस्य राजनीति में नहीं था। मुलायम सिंह के सबसे बड़े भाई रतन सिंह यादव 60 के दशक में सेना में नौकरी करते थे। कहा जाता है कि मुलायम को रतन का ही साथ मिला।


चंदा मांग कर मुलायम ने शुरू की थी सियासत की लड़ाई
मुलायम के साथ संघर्ष के दिनों में साथ रहे लोग बताते हैं कि परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। वह चुनाव खर्च के लिए चंदा भी बटोरते थे। हालही में मुलायम सिंह यादव के बड़े भाई रतन सिंह की मौत हो गई है। वह मुलायम सिंह के संघर्ष के दिनों को याद कर कहते थे कि 1967 के पहले चुनाव में वह दर्शन सिंह ‘प्रधान’ और बाबू राम ‘सेठ जी’ के साथ साइकिल से घूम-घूमकर चंदा मांगते थे और चुनाव प्रचार करते थे।

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