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इनकी डिग्रियां कहां तक चेक करवाएंगे, जाना पड़ेगा डलहौजी से टेक्सास तक

 Tahlka News |  2016-05-12 18:56:13.0

digrialoksagardigriतहलका न्यूज ब्यूरो
नई दिल्ली: इस समय देश में डिग्री देखने दिखाने का चलन चल रहा है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की डिग्री को लेकर देशभर में बवाल मचा हुआ है. हालही में सरकार ने 21 ऐसी यूनिवर्सिटी को ब्लैकलिस्ट कर दिया जो फर्जी डिग्रियां बाँट रही थी. लेकिन भारत भूमि पर एक शख्स ऐसा भी है जिसके पास मौजूद डिग्रियों की जानकारी सुनकर शायद हर कोई हैरान हो जायेंगे.
इनकी डिग्रियां कहां तक चेक करवाएंगे इनकी डिग्रियां चेक करने के लिए डलहौजी से टेक्सास  तक जाना पड़ेगा. चौकाने वाली बात यह है कि आरबीआई गवर्नर तक को पढ़ाने वाले आलोक सागर ने अपनी शैक्षणिक योग्यता 32 साल में पहली बार बताई. आज तक अलोक सागर आदिवासियों के बीच गुमनाम ज़िन्दगी जी रहे थे. उन्होंने 1973 में आई. आई. टी., दिल्ली से एम टेक किया; 1977 में हयूस्टन यूनिवर्सिटी, टेक्सास, अमेरिका से शोध डिग्री ली, फिर, टेक्सास यूनिवर्सिटी से डेंटल ब्रांच में पोस्ट डॉक्टरेट और; समाजशास्त्र विभाग, डलहोजी यूनिवर्सिटी, कनाडा में फेलोशिप की। उन्होंने 1982 में दिल्ली आई आई टी में प्रोफेसर की नौकरी से त्याग पत्र दे दिया. उन्होंने वर्तमान आरबीआई गवर्नर रघुराम राजन को भी पढाया. आलोक सागर दिल्ली के रहने वाले है और पिछले 32 सालों से बैतूल और होशंगाबाद जिले के आदिवासी गाँव में गुमनामी कार्यकर्त्ता की जिन्दगी जी रह रहे हैं. जिसमें, 1990 से बैतूल जिले के एक ही छोटे से आदिवासी गाँव कोचामाऊ में रह रहे हैं.
उनकी डिग्री का रहस्य तब सामने आया जब एक घटना को लेकर पुलिस ने उन्हें संघर्ष से बाज न आने पर जेल में डाल देने की धमकी दे डाली.

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