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कुछ इस तरह हुआ था सर्जिकल स्ट्राईक, हिल गयी पाकिस्तान की चूल

 Tahlka News |  2016-10-01 07:16:20.0

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नई दिल्‍ली. भारतीय सेना के जांबाज कमांडो ने पूरी तयारी के साथ जिस तरह से पाकिस्तान पर कब्‍जे वाले इलाके में सर्जिकल स्‍ट्राइक किया उसमे गुरिल्ला युद्ध कला के बुनियादी सिद्धांत ने खूब मदद की. इस सिद्धांत में दुश्मन को चुकाना सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है. भारतीय कमांडो जिस वक्त अपना आपरेशन शुरू करने वाले थे उस वक्त पाक सेना का ध्यान कहीं और था.

इस आपरेशन में कमांडोज ने 250 किलोमीटर के पहाड़ी और जंगली इलाके में स्थित 7 आतंकी लॉन्‍च पैड को निशाना बनाया और करीब दो किलोमीटर तक पीओके के अंदर घुस कर एक साथ ही सभी कैंपों पर हमला बोल दिया.

अँधेरी रात इस आक्रमण के लिए सबसे बड़ी सहयोगी साबित हुयी और जब दोपहर में सेना को इस आक्रमण की हरी झंडी मिली तब विशेष पैर कमांडो दस्ते ने अपनी तैयारियों को अमली जामा पहनना शुरू कर दिया.


आक्रमण किसी एक आर्मी बेस से करने की बजाए अलग अलग बेस से जोड़ो में उड़े हेलिकाप्टरो के जरिये किया गया. इसके साथ ही पाकिस्तानी सेना का ध्यान भटकानी के लिए भारतीय सेना ने उरी सेक्टर में अचानक फायर खोल दिया.

जब तक पाक सेना इसमें उलझी भारतीय हेलीकाप्टर अपने लक्ष्य की और बढ़ गए और रात लगभग पौने दो बजे कमांडोज अपने लक्ष्यों तक पहुँच चुके थे.सभी कैम्पस भले ही अलग अलग दुरी पर थे मगर आक्रमण एक साथ हुआ और सारे कैम्प एक साथ ही तबाह हो गए.

महज दो घंटे के इस आपरेशन के बाद जब ये कमांडोज अपने य्हिकानो पर लौट आये पकिस्तान तब तक सीमा की गोलीबारी में ही उलझा रहा.
इस हमले के दौरान पैरा कमांडोज ने स्‍वीडिश डिजाइन वाली कार्ल गुस्‍टव रॉकेट लॉन्‍चर, एक सोल्‍डर फायर्ड राइफल का इस्तेमाल किया जिसे दो सैनिकों की टीम ऑपरेट करती है और जो इतनी शक्तिशाली है कि टैंक या किसी मजबूत दीवार को भी ध्‍वस्‍त कर दे.

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