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सरगम क्वीन निष्ठा को नहीं पसंद है आवाज में टेक्निकल सपोर्ट

 Tahlka News |  2016-11-07 08:55:16.0

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उत्कर्ष सिन्हा

10 साल उम्र की एक दुबली पतली सी ये बच्ची तब तक आपको किसी दूसरी सामान्य बच्ची की तरह ही दिखेगी जब तक आप उसकी आँखों में झांक कर नहीं देखते या फिर अचानक से शांत होते उसके चेहरे के साथ उसके गले से निकलते सुर आपके कानो में नहीं घुलने लगते. इस बच्ची के गले से निकले सुर जब आपके मन में घुलने लगते हैं तब सहसा इसके विशिष्ट होने का एहसास होने लगता है. ये बच्ची है निष्ठा शर्मा जिसने मशहूर टीवी रियलिटी शो

“ वायस आफ इंडिया किड्स” का ताज हासिल किया है.

सुल्तानपुर जैसे छोटे शहर से मुम्बई के ग्लैमर वर्ल्ड का सफ़र तय कर चुकी निष्ठा शर्मा सोमवार को लखनऊ में थी जब उससे बात करने का मौका मिला. पहली निगाह में एक समय स्कूली बच्ची सी दिखाई देती निष्ठा शर्मा से बातचीत का क्रम जैसे जैसे आगे बढ़ता गया ये बात साफ़ होती गयी कि विजेता यूँ ही नहीं बनते.

निष्ठा के पिता बताते हैं कि इसे कोई काम अधूरा छोड़ना नहीं पसंद. कही जाने से पहले ये अपनी पढाई और दूसरे काम ख़त्म कर ही लेती है और यही अनुशासन इसकी सबसे बड़ी खासियत है.
निष्ठा का पूरा परिवार संगीत से जुडा है. पिता और माँ दोनों संगीत में दक्ष है और भाई हर वाद्य बजाने में सिद्धहस्त. इस विरासत को निष्ठा शर्मा ने पूरी एकाग्रता से खुद में समाहित कर लिया है. अपनी आखो में चमक ला कर निष्ठा कहती है “ मैं ऐसी सिंगर बनना चाहती हूँ जिसकी आवाज को टेक्निकल सपोर्ट की जरुरत कभी नहीं पड़े.”

निष्ठा से बातचीत के दौरान उसकी बालसुलभता सहज ही आकर्षित करती है. प्रस्तुत है कुछ अंश...

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टीवी रियलिटी शो में जाने का ख्याल आपको कैसे आया?

मैं जब टीवी पर ऐसे शोज देखती थी तो कुछ चीजे मुझे बहुत लुभाती थी. जब मैं देखती थी कि इस शो में जाने वाले बच्चो को खूब मस्ती करने , बड़े बड़े माल्स में जाने का मौका मिलता है तो मन मचलता था. फिर एहसास हुआ कि अगर ये मुझे भी करना है तो मैं इसे संगीत के जरिये करुँगी . फिर थोड़ी तैयारी की और आडिशन देने लखनऊ आ गयी.

कैसा रहा आडिशन? क्या नर्वस हो रही थी ?

नर्वस तो नहीं लेकिन एक उत्सुकता जरुर थी. मैंने माता पिता के पैर छुए और अपने गुरु जी को याद किया. उसके बाद जब वे लोग मुझसे अलग अलग शैली के गाने सुनने लगे. और फिर मेरे भैया के साथ एक डूएट गाने को कहा तब ही मैं समझ गयी कि मैं पास हो गयी हूँ.

फिर मुम्बई का आडिशन तो और कठिन था ? कैसे किया?

हाँ वो तो था मुश्किल , मगर कोच ने मुझे बताया कि मुझे अपना गाना मुखड़े की बजे अंतरा से शुरू करना चाहिए . मैंने गाना चुना था “ मेरे ढोलना सुन..” उसके अंतरे में सरगम आती है .. सरगम मुझे बहुत पसंद है..तो मेरे भटकने कि गुन्जायिश भी कम हो गयी और जैसे ही मैंने सरगम पकड़ी नीति मैंम ने बजर दबा दिया , मेरा मनोबल बढ़ा और फिर मैंने पूरे आत्मविश्वास के साथ दूसरे जजेज के बजर दबाने तक खुद को सम्हाले रखा.

फिर मेंटर चुनने का निर्णय कैसे लिया ?


मुझे शेखर जी बहुत पसंद हैं , उनका संगीत बहुत पसंद है, मैं उन्हें ही अपना मेंटर बनाना चाहती थी मगर नीति मैम ने पहले बजर दबाया था तो मैं और कुछ सोच नहीं पायी और उनकी टीम में चली गयी.

आपने तो हर शैली के गाने गाये हैं, मगर सबसे ज्यादा पसंद क्या है ?

मुझे क्लासिकल और सेमी क्लासिकल सबसे ज्यादा पसंद है. उसमे मुझे सुकून मिलता है. मुझे लगता है कि यदि मैं इसमें आगे गयी तो हर कुछ गाना आसान हो जाएगा.

बालिवुड के गायकों में आपको सबसे ज्यादा कौन पसंद है ?dsc_2386


मुझे आशा भोसले जी सबसे ज्यादा पसंद हैं. उनकी वेराईटी अद्भुत है. गजल, भजन, पॉप, सेमी क्लासिकल सब कुछ वे इतना अच्छा गाती है.

एक सफ़र तो कामयाबी से पूरा कर लिया, अब आगे क्या ?

अभी तो पढाई को कवरअप करना है, हलाकि मैं वहां भी अपनी पढाई करती रहती थी मगर बहुत कुछ छुटा हुआ है उसे पूरा करना है. वो बहुत जरुरी है, फिर सीनियर कम्पटीशन के लिए तैयारी करते रहना है.

संगीत के अलावा और क्या पसंद है ?

चिप्स और कुरकुरे, और मैथ्स के सवाल हल करने में मजा आता है. परियों की कहानिया उसे लुभाती हैं और पोकेमान और निंजा हथोडी बहुत पसंद है. शिन्चेंन इसलिए पसंद है कि वो अपनी बहन का बहुत ख्याल रखता है. स्टोरी बुक्स बहुत पढ़ती हूँ.

निष्ठा से बातचीत ख़त्म होते होते आप उसके मुरीद हो चुके होते हैं.

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