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मंत्रिपरिषद के महत्वपूर्ण निर्णय

 Sabahat Vijeta |  2016-04-18 16:54:46.0

Lucknow : Uttar Pradesh Chief Minister Akhilesh Yadav while addressing the press conference at CM's office in Lucknow on Thursday. PTI Photo by Nand Kumar (PTI10_16_2014_000050B)

लखनऊ, 18 अप्रैल. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में आज यहां सम्पन्न मंत्रिपरिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए. इन फैसलों में प्रदेश में मेगा परियोजनाओं की स्थापना को दी जाने वाली विशेष सुविधाओं एवं रियायतों के सम्बन्ध में प्राप्त संस्तुतियां अनुमोदित कर दी गईं. इन छह नई मेगा परियोजनाओं पर करीब 3,166 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा. इससे लगभग 11,645 लोगों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे. सरकार ने पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए थीम पार्क / अम्यूजमेण्ट पार्क के लिए नीति में संशोधन करने का फैसला किया है.


कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश अवस्थापना एवं औद्योगिक निवेश नीति-2012 के अन्तर्गत प्रदेश में मेगा परियोजनाओं की स्थापना को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से विभिन्न मेगा परियोजनाओं को दी जाने वाली विशेष सुविधाओं एवं रियायतों के सम्बन्ध में प्राप्त संस्तुतियों को अनुमोदित कर दिया है.


सरकार को छह नई मेगा इकाइयों की स्थापना के सम्बन्ध में प्रस्ताव प्राप्त हुए थे. इनमें मेसर्स एलजी इलेक्ट्रानिक्स इण्डिया प्रा.लि. द्वारा ग्रेटर नोएडा में स्थित इकाई के विस्तारीकरण एवं विविधिकरण का प्रस्ताव 1,328 करोड़ रुपये, मेसर्स स्पर्श इण्डस्ट्रीज प्रा.लि. द्वारा वर्तमान में यूपीएसआईडीसी इण्डस्ट्रियल एरिया, जौनपुर कानपुर देहात में स्थापित इकाई के विस्तारीकरण एवं विविधिकरण का प्रस्ताव 324 करोड़, मेसर्स अशर एग्रो लिमिटेड द्वारा ग्राम दौताना तहसील छाता, जिला मथुरा में चावल एवं चावल मिलिंग पर आधारित उत्पाद, दाल मिलिंग एवं चक्की प्लाण्ट इकाई की स्थापना का प्रस्ताव 272.79 करोड़ रुपये, मेसर्स सुखबीर एग्रो इनर्जी लिमिटेड द्वारा ग्राम इनायतपुर पोस्ट गंगसरा तहसील पुवायां, जिला शाहजहांपुर में स्थापित राइस मिल की क्षमता का विस्तार एवं विद्युत उत्पादन हेतु विविधिकरण का प्रस्ताव 278.46 करोड़, मेसर्स सुखबीर एग्रो इनर्जी लिमिटेड द्वारा ग्राम बुदेरा तहसील कल्पाहार, जिला महोबा एवं ग्राम एवं परगना बनपुर तहसील महरौनी, जिला ललितपुर में सौर ऊर्जा उत्पादन परियोजना हेतु 377.99 करोड़ रुपये एवं मेसर्स बेन्नेट इन्स्टीट्यूट आफ हायर एजूकेशन द्वारा प्लाट नम्बर -8 से 11, टेक जोन-, गेटर नोएडा में बेन्नेट यूनिवर्सिटी स्थापित करने के लिए 585 करोड़ रुपये, इस प्रकार कुल 3,166 करोड़ रुपये के प्रस्ताव शामिल हैं. इन परियोजनाओं के माध्यम से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से करीब 11,645 रोजगार सृजित होने की सम्भावना है.


राज्य में 200 करोड़ रुपये अधिक के निवेश हेतु स्थापित होने वाली मेगा परियोजनाओं को दी जाने वाल सुविधाएं एवं प्रोत्साहनों इत्यादि पर विचार हेतु मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित प्राधिकृत समिति द्वारा इन इकाइयों के साथ चर्चा करने के उपरान्त इन्हें विभिन्न सुविधाएं/प्रोत्साहन दिए जाने पर विचार किया गया. समिति द्वारा इन इकाइयों को आगामी 7 से 10 वर्षों में लगभग 3,184 करोड़ रुपये मूल्य की सुविधाएं/प्रोत्साहन वितरित किए जाने की संस्तुति की गई है.


प्राधिकृत समिति द्वारा 1,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश करने वाली इकाइयों को एक नई श्रेणी ‘सुपर मेगा प्रोजेक्ट’ के नाम से सृजित करने की संस्तुति भी की गई. इतना अधिक निवेश करने वाली इकाइयों को निवेश की अवधि 5 वर्ष से बढ़ाकर 7 वर्ष किए जाने तथा उन्हें विभिन्न अनुमन्य सुविधाओं में और लचीलापन प्रदान करने की संस्तुति की गई, जिसे मंत्रिपरिषद ने स्वीकार कर लिया है. इसके क्रम में शीघ्र ही उक्त निवेशकों को लेटर आफ कम्फर्ट निर्गत किए जाएंगे.


यह भी उल्लेखनीय है कि इसके पूर्व, 8 अन्य मेगा परियोजनाओं को लेटर आफ कम्फर्ट निर्गत किया जा चुका है, जिनके द्वारा 7,435 करोड़ रुपये का निवेश किया जाना था। इन 8 मेगा परियोजनाओं द्वारा अब तक 2,160 करोड़ रुपये का निवेश किया जा चुका है, जिनमें से 2 इकाइयों द्वारा उत्पादन भी प्रारम्भ किया जा चुका है.


पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए थीम पार्क/अम्यूजमेण्ट पार्क आदि की स्थापना हेतु पूर्व प्रख्यापित नीति में संशोधन
मंत्रिपरिषद ने प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए थीम पार्क/अम्यूजमेण्ट पार्क आदि की स्थापना हेतु पूर्व में प्रख्यापित नीति में संशोधन के प्रस्ताव को अनुमति प्रदान कर दी है. इसके तहत 6 नवम्बर, 2013 के शासनादेश द्वारा प्रख्यापित नीति में कई संशोधन किए गए हैं.

संशोधन के अनुसार राज्य/केन्द्र सरकार अथवा उसके स्वामित्वाधीन निगम, परिषद, कम्पनी, संस्था से थीम पार्क/अम्यूजमेण्ट पार्क परियोजना हेतु भूमि के क्रय या पट्टे पर लेने तथा परियोजना से सम्बन्धित समस्त भूमि हस्तान्तरणों पर स्टाम्प ड्यूटी में शत-प्रतिशत छूट प्रदान किए जाने की व्यवस्था यथावत रखी गई है.
थीम पार्क/अम्यूजमेण्ट पार्क परियोजना की स्थापना हेतु निर्माण अवधि अथवा 10 वर्ष (जो भी कम हो) राज्य में आयातित की जाने वाली निर्माण वस्तु/सामग्रियों पर, लगने वाले कर में शत-प्रतिशत छूट प्रदान की जाएगी.
थीम पार्क/अम्यूजमेण्ट पार्क परियोजना के संचालन की तिथि से मनोरंजन कर में 15 वर्ष तक शत-प्रतिशत छूट प्रदान की जाएगी. थीम पार्क/अम्यूजमेण्ट पार्क परियोजना के संचालन की तिथि से 15 वर्ष के लिए सुख साधन कर में शत-प्रतिशत छूट प्रदान करने की व्यवस्था भी की गई है.
प्रख्यापित नीति में थीम बेस्ड माल को भी समाहित करने तथा प्रख्यापित नीति के प्रस्तर-2 में उल्लिखित न्यूनतम क्षेत्रफल 300 एकड़ की बाध्यता को थीम बेस्ड माल के मामले में शिथिल करने का प्रावधान किया गया है। थीम बेस्ड माल के प्रकरण में अनुमन्यता की संस्तुति हेतु प्रमुख सचिव, पर्यटन की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया जाएगा।
थीम पार्क/अम्यूजमेण्ट पार्क परियोजना में राज्य सरकार के किसी सार्वजनिक उपक्रम/एस0पी0बी0 अथवा कम्पनी की भागीदारी की सीमा को परियोजना के लिए आवश्यक भूमि की लागत के अधिकतम 20 प्रतिशत के स्थान पर न्यूनतम 20 प्रतिशत किया गया है। उपरोक्त संशोधन/परिवर्तन पूर्व शासनादेश दिनांक 6 नवम्बर, 2013 की तिथि से ही प्रभावी होंगे।


आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे परियोजना के आंशिक वित्त पोषण हेतु हडको से ऋण प्राप्त करने के लिए शासकीय गारण्टी की अनुमति दी गई


मंत्रिपरिषद ने आगरा से लखनऊ प्रवेश नियंत्रित (ग्रीन फील्ड) एक्सप्रेस-वे परियोजना के आंशिक वित्त पोषण हेतु हडको से ऋण प्राप्त करने के लिए शासकीय गारण्टी तथा शासन के पक्ष में यूपीडा से काउण्टर गारण्टी निष्पादित करने की अनुमति प्रदान कर दी है.


ज्ञातव्य है कि उक्त एक्सप्रेस-वे परियोजना हेतु बजट की व्यवस्था के लिए अतिरिक्त वित्तीय संसाधन जुटाने हेतु यूपीडा द्वारा हडको से 1530.64 करोड़ रुपये का ऋण प्राप्त किया जाना है. यूपीडा द्वारा हडको से ऋण प्राप्त किए जाने के लिए राज्य सरकार द्वारा हडको के पक्ष में शासकीय प्रत्याभूति प्रदान की जाएगी. इसके लिए यूपीडा से शासन के पक्ष में काउण्टर गारण्टी भी ली जाएगी.


शासन द्वारा हडको के पक्ष में निष्पादित की जाने वाली शासकीय गारण्टी में यह व्यवस्था रहेगी कि यूपीडा द्वारा हडको से लिए जा रहे 1530.64 करोड़ रुपये के ऋण की अदायगी का पूर्ण दायित्व यूपीडा का होगा. इसके लिए यूपीडा द्वारा हडको के पक्ष में एस्क्रो खाता खोला जाएगा तथा यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वर्षानुवर्ष ऋण की ब्याज सहित अदायगी के लिए एस्क्रो खाते में यथेष्ट धनराशि उपलब्ध रहे. यूपीडा द्वारा राज्य सरकार के पक्ष में काउण्टर गारण्टी भी निष्पादित की जाएगी.


यूपीडा द्वारा राज्य सरकार को एक प्रतिशत की दर से अवशेष गारण्टी की राशि पर वर्षानुवर्ष गारण्टी डीड का भुगतान किया जाएगा. इन सभी कार्यवाहियों के लिए मंत्रिपरिषद ने आज अनुमति प्रदान कर दी है.


पेराई सत्र 2012-13 में चीनी मिलों को गन्ना क्रय कर में दी गई एक वर्ष की छूट के सम्बन्ध में आ रही विसंगति का निराकरण


मंत्रिपरिषद ने पेराई सत्र 2012-13 में चीनी मिलों को गन्ना क्रय कर में दी गई एक वर्ष की छूट के सम्बन्ध में आ रही विसंगति का निराकरण कर दिया है. इसके क्रम में अब निर्णय लिया गया है कि 23 मई, 2013 को निर्गत शासनादेश के एक वर्ष के स्थान पर, कर निर्धारण वर्ष 1 अक्टूबर, 2012 से 30 अक्टूबर, 2013 तक लागू माना जाए, बशर्ते 23 मई, 2013 से 22 मई, 2014 तक जो पूर्व वर्षों की चीनी विक्रीत हुई, उस पर देय क्रय कर वापस न किया जाए.


उल्लेखनीय है कि मंत्रिपरिषद के अनुमोदनोपरान्त शासनादेश दिनांक 23 मई, 2013 द्वारा गन्ना क्रय कर पर एक वर्ष के लिए छूट प्रदान की गई थी. यह छूट चीनी मिलों द्वारा शासनादेश निर्गत होने की दिनांक से एक वर्ष के लिए चीनी विक्रय पर जमा किए जाने वाले गन्ना क्रयकर पर लागू की गई थी. गन्ना क्रयकर पर छूट की अधिकतम सीमा पेराई सत्र 2012-13 में क्रय किए गए गन्ने की वास्तविक मात्रा के क्रयकर के समतुल्य अर्थात 2 रुपये प्रति कुन्तल की सीमा निर्धारित की गई थी.


चूंकि गन्ना क्रयकर पर उक्त छूट पेराई सत्र 2012-13 में शासनादेश निर्गत होने की तिथि अर्थात दिनांक 23 मई, 2013 से एक वर्ष के लिए चीनी विक्रय पर जमा होने वाले क्रयकर में दिया गया है. अतः इसमें आ रही कठिनाइयों के दृष्टिगत विसंगति दूर किए जाने की मांग उ.प्र. शुगर मिल्स एसोसिएशन के माध्यम से की जाती रही है. इस तथ्य के दृष्टिगत मंत्रिपरिषद ने यह निर्णय लिया.


एसजीपीजीआई, लखनऊ में न्यू ओपीडी भवन के निर्माण में प्रस्तावित माड्युलर ओटी, स्ट्रक्चरल ग्लेजिंग, जिप्सम स्टील, अल्ट्रा पार्टीशन, फाल्स सीलिंग एवं ग्रेनाइट के निर्माण की अनुमति प्रदान


मंत्रिपरिषद ने एसजीपीजीआई, लखनऊ में न्यू ओपीडी भवन के निर्माण में प्रस्तावित माड्युलर ओटी, स्ट्रक्चरल ग्लेजिंग, जिप्सम स्टील, अल्ट्रा पार्टीशन, फाल्स सीलिंग एवं ग्रेनाइट के निर्माण की अनुमति प्रदान कर दी है.


ज्ञातव्य है कि यह सभी निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग की निर्धारित विशिष्टियों से उच्च हैं. व्यय वित्त समिति ने कतिपय निर्देशों के साथ प्रायोजना की लागत 104.5803 करोड़ रुपये अनुमोदित की है. समिति ने उक्त निर्माण कार्यों से पूर्व मंत्रिपरिषद की अनुमति प्राप्त करने का सुझाव दिया था, जिसके क्रम में आज मंत्रिपरिषद ने एसजीपीजीआई में न्यू ओपीडी के निर्माण की अनुमति प्रदान कर दी है.


यह भी उल्लेखनीय है कि एसजीपीजीआई में वर्ष 1993 में 6 विभागों के लिए ओपीडी की स्थापना की गई थी. यहां पर जगह की कमी के कारण रोगियों के इलाज और चिकित्सकीय कार्य में कठिनाई हो रही है. संस्थान में नये ओपीडी का निर्माण प्रस्तावित किया गया है. पुराने ओपीडी का उपयोग मरीजों के डे-केयर की सुविधा प्रदान करने के लिए जाएगा. इसके लिए शुरुआत में 180 बेड की व्यवस्था की जाएगी, जिसे बढ़ाकर 360 बेड किया जाएगा.


राजकीय मेडिकल कालेज, इलाहाबाद के पुस्तकालय, परीक्षा हाल, लेक्चर थियेटर एवं छात्र स्टडी रूम के निर्माण कार्य हेतु प्रस्तावित उच्च विशिष्टियां अनुमोदित


मंत्रिपरिषद ने राजकीय मेडिकल कालेज, इलाहाबाद में एमसीआई मानकों को पूर्ण किए जाने हेतु पुस्तकालय, परीक्षा हाल, लेक्चर थियेटर एवं छात्र स्टडी रूम के निर्माण कार्य हेतु प्रस्तावित उच्च विशिष्टियों को अनुमोदित कर दिया है. इसके तहत स्ट्रक्चरल ग्लेजिंग, दीवार पर विट्रीफाइड टाइल्स, मैटेलिक फाल्स सीलिंग जैसे कार्य कराए जाएंगे.


विभिन्न कलेक्ट्रेट/तहसीलों के पुराने जर्जर राजस्व भवनों के पुनर्निर्माण कार्य हेतु ध्वस्तीकरण की अनुमति


मंत्रिपरिषद ने प्रदेश के विभिन्न कलेक्ट्रेट/तहसीलों के पुराने जर्जर राजस्व भवनों का पुनर्निर्माण कार्य कराए जाने के दृष्टिगत इनके ध्वस्तीकरण की अनुमति प्रदान कर दी है. पुराने, निष्प्रयोज्य व जर्जर भवनों के पुस्तांकित मूल्यों में से स्क्रैप के निस्तारण से प्राप्त धनराशि को समायोजित कर ध्वस्तीकरण की लागत को जोड़ते हुए उक्त धनराशि बट्टे खाते में डालने का निर्णय भी लिया गया है.


ज्ञातव्य है कि जनपद गोरखपुर में इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों के भण्डारण हेतु गोदाम तथा जिला निर्वाचन कार्यालय के भवन का निर्माण कार्य, जनपद आगरा में इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीनों के लिए गोदाम/वेयर हाउस का निर्माण, जनपद शाहजहांपुर की तहसील जलालाबाद के अनावासीय भवनों का पुनर्निर्माण, जनपद रामपुर के रामपुर क्लब परिसर में सर्किट हाउस/ट्रांजिट हाउस का निर्माण, जनपद वाराणसी कलेक्ट्रेट के अनावासीय भवनों को पुनर्निर्माण के लिए पुराने/जीर्णशीर्ण राजस्व भवनों का ध्वस्तीकरण आवश्यक है।


इसके लिए जनपद गोरखपुर कलेक्ट्रेट स्थित जिला निर्वाचन कार्यालय के जीर्णशीर्ण भवन, जनपद आगरा के तहसील सदर स्थित पुराने जीर्णशीर्ण आवासीय भवनों, जनपद शाहजहांपुर की तहसील जलालाबाद के पुराने जर्जर भवनों, जनपद रामपुर के पुराने जर्जर रामपुर क्लब तथा जनपद वाराणसी कलेक्ट्रेट का मुख्य भवन, प्रोबेशन आफिस, अभिलेखागार, सिटी मजिस्ट्रेट भवन, कैण्टीन एवं कर्मचारी कल्याण, एसडीएम कोर्ट तथा लोक शिकायत भवनों की अधिवर्षता आयु पूर्ण हो चुकी है. इन्हें ध्वस्त कर उपरोक्त नए निर्माण कार्य सम्पादित कराए जाएंगे.


जनपद इटावा की तहसील ताखा के अनावासीय भवनों का निर्माण उच्च विशिष्टियों/विशिष्टियों के आधार पर माडल तहसील के रूप में कराए जाने हेतु अनुमति


मंत्रिपरिषद ने जनपद इटावा की तहसील ताखा के अनावासीय भवनों का निर्माण उच्च विशिष्टियों के आधार पर माडल तहसील के रूप में कराए जाने हेतु अनुमति प्रदान कर दी है. इसके लिए प्रस्तावित 11 करोड़ 13 लाख 97 हजार रुपये की प्रशासकीय एवं वित्तीय स्वीकृति प्रदान किए जाने के दृष्टिगत, मानकीकृत लागत तथा क्षेत्रफल में शिथिलीकरण की अनुमति प्रदान कर दी गई है. प्रायोजना की प्रस्तावित लागत 10 करोड़ रुपये से अधिक है. जबकि नामित कार्यदायी संस्था पैकफेड की गैर मानकीकृत कार्यों के कराए जाने की लागत सीमा 10 करोड़ रुपये होने के कारण, मंत्रिपरिषद ने कार्यदायी संस्था की लागत सीमा के शिथिलीकरण को भी अनुमति प्रदान कर दी है.


जनपद सीतापुर की तहसील महोली के अनावासीय भवनों का निर्माण माडल तहसील के रूप में कराए जाने के दृष्टिगत मानकीकृत लागत एवं क्षेत्रफल में शिथिलीकरण को मंजूरी


मंत्रिपरिषद ने जनपद सीतापुर की तहसील महोली के अनावासीय भवनों का निर्माण माडल तहसील के रूप में कराए जाने हेतु प्रस्तावित लागत 11 करोड़ 74 लाख 93 हजार रुपये पर प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति दिए जाने के दृष्टिगत, मानकीकृत लागत एवं क्षेत्रफल में शिथिलीकरण के प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान कर दी है. साथ ही, कार्यदायी संस्था की निर्धारित लागत सीमा पर भी शिथिलीकरण प्रदान किया गया है. प्रायोजना की प्रस्तावित लागत 10 करोड़ रुपये से अधिक है. जबकि नामित कार्यदायी संस्था पैकफेड की गैर मानकीकृत कार्यों के कराए जाने की लागत सीमा 10 करोड़ रुपये होने के कारण, मंत्रिपरिषद ने कार्यदायी संस्था की लागत सीमा के शिथिलीकरण को भी अनुमति प्रदान कर दी है.


जनपद मैनपुरी के निर्माणाधीन बस स्टेशन के भवन के बाहर प्रस्तावित स्ट्रक्चरल ग्लेजिंग का कार्य अनुमोदित


मंत्रिपरिषद ने जनपद मैनपुरी में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम के बस स्टेशन के विस्तारीकरण एवं आधुनिकीकरण की गतिशील प्रक्रिया में भवन के बाहर प्रस्तावित स्ट्रक्चरल ग्लेजिंग के कार्य को अनुमोदित कर दिया है. प्रस्तावित स्ट्रक्चरल ग्लेजिंग का कार्य आवश्यक एवं जनहित में होने के कारण यह निर्णय लिया गया है.


बस स्टेशन जनपद इटावा के विस्तारीकरण एवं आधुनिकीकरण हेतु भवन के बाहर प्रस्तावित स्ट्रक्चरल ग्लेजिंग का कार्य अनुमोदित


मंत्रिपरिषद ने बस स्टेशन जनपद इटावा के विस्तारीकरण एवं आधुनिकीकरण हेतु भवन के बाहर प्रस्तावित स्ट्रक्चरल ग्लेजिंग के कार्य को अनुमोदित कर दिया है. कार्य की महत्ता एवं आवश्यकता के दृष्टिगत यह निर्णय लिया गया है.


जनपद रामपुर की तहसील विलासपुर में अग्निशमन केन्द्र की स्थापना हेतु भूमि के निर्धारित मानक को शिथिल करने का फैसला


मंत्रिपरिषद ने जनपद रामपुर की तहसील विलासपुर में 2 यूनिट के अग्निशमन केन्द्र की स्थापना हेतु 6,000 वर्गमीटर भूमि के निर्धारित मानक को शिथिल करते हुए प्रस्तावित अग्निशमन केन्द्र के आवासीय/अनावासीय भवनों का निर्माण उर्ध्वाकार कराने के लिए उपलब्ध भूमि 2,670 वर्गमीटर का मानक निर्धारित करने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया है.


उद्योगों की स्थापना के लिए अधिग्रहीत भूमि को फ्री-होल्ड किए जाने की नीति मंजूर
मंत्रिपरिषद ने औद्योगिक विकास विभाग (तत्कालीन उद्योग विभाग) द्वारा उद्योगों की स्थापना के लिए विभिन्न कम्पनियों हेतु अधिग्रहीत की गई भूमि को फ्री-होल्ड किए जाने सम्बन्धी नीति, 2016 को मंजूरी प्रदान कर दी है.

औद्योगिक विकास विभाग (तत्कालीन उद्योग विभाग) द्वारा निजी कम्पनियों के लिए अधिग्रहीत भूमि, जो उद्योगों की स्थापना के लिए विभिन्न कम्पनियों को गवर्नमेन्ट ग्राण्ट एक्ट के तहत ट्रांसफर डीड/अनुबन्ध के माध्यम से दी गई हैं, को फ्री-होल्ड किए जाने पर, जो व्यवस्था की गई है, उसके अन्तर्गत ऐसी औद्योगिक इकाईयां, जो रूग्ण घोषित हों/बन्द पड़ी हों अथवा ऐसी प्रदूषणकारी/खतरनाक कार्यरत औद्योगिक इकाईयां, जो प्रदूषण के दृष्टिकोण से मानवीय स्वास्थ्य तथा सुरक्षा के लिए हानिकारक हैं और जिन्हें जनहित में अथवा पर्यावरणीय कारणों से बन्द किए जाने/शहर के बाहर स्थानान्तरित किए जाने की बाध्यता हो, को फ्री-होल्ड किया जाएगा.

रूग्ण/बन्द पड़ी औद्योगिक इकाईयों के सम्बन्ध में फ्री-होल्ड की कार्यवाही बीआईएफआईआर/न्यायालयों/उच्च न्यायालयों/उच्चतम न्यायालय द्वारा रूग्ण औद्योगिक इकाईयों के सम्बन्ध में पारित किए गए आदेश का अनुपालन करते हुए, उस दशा में की जाएगी, जब वे आदेश अन्तिम हो गए हों.

ऐसी कार्यरत औद्योगिक इकाईयां, जिनके पास मानक से अधिक भूमि उपलब्ध है, ऐसी सरप्लस भूमि को फ्री-होल्ड किया जाएगा. यह फ्री-होल्ड परिवर्तन उसी दशा में अनुमन्य होगा, जब ऐसी इकाई को 1 हेक्टेयर अथवा उससे अधिक क्षेत्रफल की भूमि औद्योगिक प्रयोजन हेतु दी गई हो और ऐसी आवंटित भूमि पर वर्तमान में औद्योगिक इकाई कार्यरत हो.

ऐसी औद्योगिक इकाईयां, जिन्हें ट्रांसफर डीड/अनुबन्ध के माध्यम से भूमि दी गई है और यदि औद्योगिक इकाई वहां पर संचालित होने के बाद पूर्णतः बन्द पड़ी है और जिसे पुनर्वासित किया जाना सम्भव नहीं है, भले ही ऐसी औद्योगिक इकाई बीएफआईआर के निर्णय हेतु सन्दर्भित न हों, ऐसी इकाईयां विवाद रहित होने की स्थिति में इनसे अध्यासित भूमि का इस नीति की व्यवस्थानुसार फ्री-होल्ड अनुमन्य होगा.

ऐसी संचालित औद्योगिक इकाईयां, जिन्हें ट्रांसफर डीड/अनुबन्ध के माध्यम से भूमि दी गई है तथा जो विस्तार हेतु भूमि की अतिरिक्त आवश्यकता होने अथवा जिन्हें कन्जेशन, यातायात एवं परिवहन सम्बन्धी समस्याओं के कारण वर्तमान स्थल पर कार्यशील रहना व्यवहारिक नहीं है और शहर के बाह्य क्षेत्रों में स्थानान्तरण के लिए इच्छुक हों, से अध्यासित भूमि का इस नीति की व्यवस्थानुसार फ्री-होल्ड अनुमन्य होगा.

नीति के तहत औद्योगिक परियोजनाओं हेतु ट्रांसफर डीड/अनुबन्ध के माध्यम से दी गई भूमि का तात्कालिक प्रभाव से चालू लीज के विधिक उत्तराधिकारी अथवा विधिक क्रेता के पक्ष में फ्री-होल्ड करने की तिथि को जिलाधिकारी द्वारा निर्धारित तत्समय प्रचलित सर्किल रेट के 15 प्रतिशत पर फ्री-होल्ड किया जाएगा.

भूमि के फ्री-होल्ड के सम्बन्ध में शासन स्तर पर एक 8-सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति गठित की जाएगी, जिसके अध्यक्ष अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास आयुक्त, उत्तर प्रदेश होंगे। इस समिति द्वारा सम्बन्धित भूमि की लोकेशन, उसके चारों ओर हो चुके विकास/निर्माण की प्रकृति, यातायात कनेक्टिविटी, भूमि की प्रचलित मार्केट वैल्यू आदि के सम्बन्ध में विचार कर फ्री-होल्ड हेतु अपनी संस्तुति प्रस्तुत की जाएगी, जिस पर मंत्रिपरिषद के अनुमोदन से अन्तिम निर्णय लिया जाएगा.

उ.प्र. ग्रामीण आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान, सैफई, इटावा की प्रायोजना के सम्बन्ध में उच्च विशिष्टियों का प्रस्ताव मंजूर
मंत्रिपरिषद ने उत्तर प्रदेश ग्रामीण आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान, सैफई, इटावा के अन्तर्गत अर्बन डेवलेपमेन्ट के मास्टर प्लान से सम्बन्धित प्रायोजना के सम्बन्ध में उच्च विशिष्टियों के प्रस्ताव पर मंजूरी प्रदान कर दी है। इस संस्थान के अन्तर्गत मेडिकल काॅलेज, आवासीय एवं अनावासीय भवनों, पैरामेडिकल विज्ञान महाविद्यालय आदि का निर्माण किया गया है तथा वर्तमान में 500 बेडेड सुपर स्पेशियलिटी हाॅस्पिटल का निर्माण कार्य प्रगति पर है. संस्थान में छात्रों, शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक कार्मिकों एवं इलाज हेतु आने वाले रोगियों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है. ऐसी स्थिति में वर्तमान में अवस्थापना सम्बन्धी सुविधाएं अपर्याप्त अनुभव की जा रही हैं.

इस प्रायोजना में प्राविधानित उच्च विशिष्टियों के प्रयोग पर मंत्रिपरिषद के अनुमोदन के पश्चात् अर्बन डेवलेपमेन्ट मास्टर प्लान के अन्तर्गत कराए जाने वाले विकास कार्योें से उत्तर प्रदेश ग्रामीण आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान, सैफई, इटावा में अवस्थापना सुविधाएं और विकसित होंगी, जिसका लाभ मरीजों एवं संस्थान को होगा.

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