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इंडिया में अब नहीं चल पाएगी Use & Throw Policy

 Anurag Tiwari |  2016-10-14 01:56:54.0

Save Water, Water Crisis, Water Dispute, Cauvery, Tamilnadu, Karnatakaसुशील कुमार   

नई दिल्ली.  कर्नाटक-तमिलनाडु, पंजाब-हरियाणा और अन्य राज्यों के बीच दोनों राज्यों के बीच बहने वाली नदियों के जल बंटवारे को लेकर तनाव के बीच विशेषज्ञों ने कहा है कि जो तरीका इस्तेमाल किया जा रहा है उसमें आमूल परिवर्तन की जरूरत है। राज्यों का यह तनाव अक्सर हिंसा में तब्दील हो जाता है।

भारत अब अपने मौजूदा 'इस्तेमाल करो और फेंक दो' वाले अंदाज को नहीं बर्दाश्त कर सकता।

जब तक देश जल संरक्षित करना शुरू नहीं करता और पेयजल प्रदूषण जैसी समस्याओं का निवारण कर उसे पुनरावर्तन कर दोबारा इस्तेमाल नहीं करता। इन विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े जल संकट का खतरा मंडराते रहेगा।

विशेषज्ञों ने सिंचाई के नए तरीके अपनाने की भी संस्तुति की है, क्योंकि देश में उपलब्ध ताजा जल का 80 प्रतिशत इस्तेमाल खेती में होता है।


साउथ एशिया नेटवर्क ऑफ डैम्स, रिवर्स एवं पीपुल के समन्वयक हिमांशु ठक्कर ने कहा कि भारत में भूजल भारत में ताजा पानी का एक प्रमुख स्रोत है, लेकिन यह असीमित नहीं है इसलिए इसका इस्तेमाल ज्यादा समझदारी के साथ करने की जरूरत है।

ठक्कर ने आईएएनएस से कहा कि भूजल के इस्तेमाल को नियंत्रित करने की जरूरत है। हमें ऐसा करने के लिए यही समय है।

पूर्व केंद्रीय जल संसाधन सचिव एस. के. सरकार ने भी इसका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश एक मौन जल संकट है। यह मुख्य रूप से गरीबों को प्रभावित करता है। उन्होंने आईएएनएस से कहा कि हर व्यक्ति को इसे समझना होगा।

एजिलेंट टेक्नोलॉजी के विपणन कार्यक्रम प्रबंधन अंकुर श्रीवास्तव ने कहा कि सुरक्षित एवं स्वच्छ पेयजल मिलना बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग जल जनिक बीमारियां जैसे हैजा, दस्त और पेचिश के शिकार होते हैं।

अमेरिका स्थित नाल्को वाटर के कार्यकारी उपाध्यक्ष क्रिस्टोफ बेक ने कहा कि लोगों के पानी के इस्तेमाल के रवैये को बदलने की जरूरत है, क्योंकि यह सीमित है और इसका 'इस्तेमाल करो और फेंक दो' वाले अंदाज में उपयोग नहीं किया जा सकता।

(आईएएनएस)



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