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बेशर्मी: अलगाववादी सरकार से लेते हैं हर साल 100 करोड़, अलापते हैं पाकिस्तान का राग

 Anurag Tiwari |  2016-09-07 04:51:28.0

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तहलका न्यूज वेब टीम

नई दिल्ली. जिस थाली में खाना उसी में छेद करना यह कहावत कश्मीर के अलगाववादी नेताओं पर बखूबी फिट बैठती है. कश्मीर में भारत के खिलाफ नफरत का माहौल खड़ा करने वाले अलगाववादी नेताओं की जिन्दगी किसी वीवीआईपी से कम नहीं है.  हैरानी की बात है कि हर साल इनके ऐशो-आराम और मुफ्तखोरी पर औसतन 100 करोड़ का खर्च जम्मू-कश्मीर और केंद्र की सरकारें उठाती हैं.

हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक़ 2010 से ही अलगाववादी नेताओं के होटल बिल पर सरकार हर साल औसतन 4 करोड़ रुपए खर्च करती आ रही है. बीते पांच सालों में इनके होटलों में रुकने के लिए 21 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं. अब सवाल उठने शुरू हो गए हैं कि भारत के खिलाफ साजिश करने वाले इन अलगाववादियों को उनके घरों में रखने के बजाय होटलों में सरकारी खर्च पर मेहमान बना कर क्यों रखा गया है?


अलगाववादियों की सुरक्षा पर सालाना 100 करोड़ रुपए का खर्च जम्मू-कश्मीर और केंद्र सरकार मिलकर उठा रही हैं. अलगाववादियों पर हो रहे इस खर्च का ज्यादातर हिस्सा केंद्र सरकार के जिम्मे है. इनकी सुरक्षा के खर्च का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र और जम्मू-कश्मीर सरकार 10 प्रतिशत देती है.

राज्य सरकार के मुताबिक़ बीते पांच सालों में इन अलगाववादियों की केवल सुरक्षा के नाम पर 309 करोड़ खर्च किए गए. इसमें से 150 करोड़ रुपए साल 2010 से 2016 तक उनके निजी सुरक्षा गार्ड्स के सैलरी के नाम पर खर्च हुए. पांच साल में अलगाववादियों पर कुल 506 करोड़ का खर्चा आया है जो कि जम्मू-कश्मीर सूबे के बजट से भी ज्यादा है जो कि महज 484.42 करोड़ रुपयों का है.

बुधवार को सर्वदलीय बैठक में आम सहमति बनने के बाद सरकार अलगाववादी नेताओं के इस सरकारी खर्चे पर रोक लगाने का मन बना चुकी है. अब माना जा रहा है कि अब अलगाववादियों के सरकारी हनीमून पैकेज खत्म करने का वक्त आ चुका है.







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