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सूचना आयोग ने सुनवाई कक्षों में ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था से इनकार किया

 Sabahat Vijeta |  2016-09-04 17:53:00.0

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लखनऊ. यूपी के समाजसेवियों द्वारा समाजसेविका उर्वशी शर्मा के नेतृत्व में सूचना आयोग में पारदर्शिता स्थापित करने के लिए लम्बे समय से चलाई जा रही मुहिम को तगड़ा झटका देते हुए उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग ने अपने सुनवाई कक्षों में ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था कराने से साफ-साफ मना कर दिया है. आयोग ने यह निर्णय लखनऊ की समाजसेविका उर्वशी शर्मा द्वारा इस सम्बन्ध में उच्च न्यायालय इलाहाबाद की लखनऊ खंडपीठ में दायर की गयी एक याचिका पर बीते 13 जुलाई को उच्च न्यायालय द्वारा पारित आदेश के साथ दिए गए प्रत्यावेदन का निस्तारण करते हुए दिया है.


सूचना आयोग में आने वाले आरटीआई प्रयोगकर्ताओं को सुनवाई कक्षों में सुनवाई के दौरान अपना पक्ष रखने से रोकने के लिए सूचना आयुक्तों द्वारा असत्य आरोप लगाकर उनके साथ मारपीट करने और झूठे मामलों में फंसाकर पुलिस के हवाले कर जेल भिजवाने की घटनाओं की बढ़ती संख्याओं के मद्देनज़र यूपी के समाजसेवी लखनऊ की वरिष्ठ आरटीआई कार्यकत्री उर्वशी शर्मा के नेतृत्व में लम्बे समय से उत्तर प्रदेश राज्य सूचना आयोग के सुनवाई कक्षों में ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था कराने की मुहिम चला रहे हैं.


इस मुहिम के अंतर्गत उर्वशी शर्मा की अगुआई में सूचना आयुक्तों का पुतला दहन, सूचना आयोग में कार्य वहिष्कार और सूचना आयोग के उद्घाटन के दिन उपराष्ट्रपति के विरोध प्रदर्शन के कार्यक्रम भी आयोजित किये जा चुके हैं. लखनऊ पुलिस ने इस मामले में उर्वशी के साथ आरटीआई कार्यकर्त्ता तनवीर अहमद सिद्दीकी को उपराष्ट्रपति के आगमन से 1 दिन पहले पुलिस हिरासत में ले लिया था और उपराष्ट्रपति के जाने के बाद ही रिहा किया था. समाजसेविका उर्वशी ने बताया कि उनकी इस मांग को मानते हुए पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त रणजीत सिंह पंकज ने इंदिरा भवन परिसर में सूचना आयुक्तों के सुनवाई कक्षों में ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था कराई थी किन्तु पंकज की सेवानिवृत्ति के बाद आये आयुक्तों ने कैमरों को हटवा दिया और वर्तमान मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी ने कार्यभार सँभालने के बाद ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था के अवशेष चिन्ह भी मिटा दिए थे. उर्वशी कहती हैं कि सूचना आयोग के सुनवाई कक्षों में ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था कराने के लिए उन्होंने देश और प्रदेश के संवैधानिक पदों पर आसीन सभी पदाधिकारियों को पत्र लिखे और धरना प्रदर्शन किया और जब इससे भी सूचना आयोग के कानों पर जूँ तक नहीं रेंगी तो विवश होकर उन्होंने बीते जुलाई महीने में उच्च न्यायालय इलाहाबाद की लखनऊ खंडपीठ में एक याचिका दायर करके के सुनवाई कक्षों में ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था कराने के लिए गुहार लगाई थी.


उर्वशी ने बताया कि उच्च न्यायालय ने बीते जुलाई की 13 तारीख की सुनवाई में उनसे कहा था कि वे न्यायालय के आदेश, जिसमें उच्च न्यायालय ने माना था कि आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता के लिए आयोग के सुनवाई कक्षों में ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था आवश्यक है, के साथ अपना मांगपत्र सूचना आयोग को दें. उन्होंने बीते 16 जुलाई और 21 जुलाई के दो पत्रों के माध्यम से हाई कोर्ट का आदेश आयोग को देते हुए आयोग के सुनवाई कक्षों में ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था कराने की मांग दोहराई थी जिस पर कार्यवाही करते हुए आयोग के सचिव राघवेन्द्र विक्रम सिंह ने बीते 19 अगस्त को उर्वशी को एक पत्र जारी करते हुए बताया है कि क्योंकि प्रदेश के शीर्ष न्यायिक संस्थान, उच्च न्यायालय,मानवाधिकार आयोग,उत्तर प्रदेश लोक सेवा अधिकरण,महिला आयोग,पिछड़ा वर्ग आयोग,उपभोक्ता फोरम,जनपद न्यायालयों, केन्द्रीय सूचना आयोग में में ऑडियो-वीडियो

रिकॉर्डिंग की व्यवस्था नहीं कराई गयी है अतः सूचना आयोग में भी ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की व्यवस्था करने की आवश्यकता व औचित्य नहीं पाया गया है.

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